जब रोज मोहल्ले के बच्चों से पिटकर घर आते थे ब्रूस ली, ऐसे बने रफ्तार के बादशाह

नई दिल्ली। मार्शल आर्ट्स की दुनिया में अगर कोई आपसे कहे कि महान मार्शल आर्टिस्ट ब्रूस ली बचपन में खूब पिटे हैं, तो शायद आप इस बात पर यकीन न करें। लेकिन, जनाब ठहरिए… ये बात 100 प्रतिशत सच है। चलिए.. दुनिया के महान मार्शल आर्टिस्ट ब्रूस ली के जन्मदिन पर आज हम आपको बताएंगे वो कहानी, जो शायद आपने कभी नहीं सुनी होगी।

(साभार-गूगल)

रोज पिटकर आते थे ब्रूस

ब्रूस ली का जन्म सैन फ्रैंसिस्को के चाइना टाउन में हुआ था। उनके माता-पिता हांगकांग के रहने वाले थे। जब ब्रूस 3 महीने के थे, तभी उनके माता-पिता हांगकांग वापस लौट आए। हांगकांग की गलियों में खेलते हुए ब्रूस ली बड़े होने लगे। शुरुआत में मोहल्ले के बड़े बच्चे उनकी पिटाई कर दिया करते थे। ली ने अपने बचाव के लिए कुछ दोस्तों को साथ मिलाकार एक गैंग बना लिया। गैंग भले ही बन गया हो, लेकिन बाकी बच्चे भी उनके जैसे ही थे। नतीजा ये हुआ कि पहले ब्रूस अकेले पिटते थे, और अब पूरी गैंग साथ पिटने लगी। हर रोज ब्रूस ली की गैंग पिटने के बाद रोते हुए घर पहुंचती थी।

रोज-रोज की मार पिटाई के कारण एक दिन उनकी मां का दिल पसीज गया। ली को हिम्मत बंधाकर मां सीधे उन्हें महान मार्शल आर्टिस्ट ‘इप मान’ के पास ले गई। इप मान ने ब्रूस ली की विलक्षणता को पहचाना और उन्हें मार्शल आर्ट्स की बारीकियां सिखाईं। ली ने लंबे समय तक मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ली, लेकिन उस वक्त उनपर इसका कोई खास फर्क नहीं पड़ा।

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बने मोहल्ले के गुंडे

मार्शल आर्ट्स सीखने के बाद बस वो मोहल्ले के गुंडे बनकर रह गए। हर दूसरे दिन पुलिस उनके दरवाजे पर पहुंच जाती थी। ब्रूस ली की हरकतों से उनके मां-बाप बड़े परेशान हुए। जब ब्रूस ली नहीं सुधरे तो उन्होंने पुलिसवालों को रिश्वत खिलाकर सारे मामले रफा दफा करवाए। पिता ने इसके बाद उन्हें अमेरिका भेज दिया, ताकि ब्रूस एक डॉक्टर बन सके।

कहते हैं कि ब्रूस ली ने कॉलेज में एडमिशन तो ले लिया, मगर उनका मन हमेशा मार्शल आर्ट्स में ही लगा रहता था। यहां उन्होंने अपना कुंग फू स्कूल खोल लिया। अमेरिका में रहने वाले चीनी ब्रूस ली की इस हरकत से बहुत नाराज हुए। उनका मानना था कि गैर चीनियों को मार्शल आर्ट्स सिखाना अपराध है। हालांकि, ब्रूस पर इन बातों का कोई असर नहीं हुआ।

उस वक्त चीनी-अमेरिकी फाइटर वोंग जैक मान ने ब्रूस ली को चुनौती दी कि अगर तुम मुझे हरा दोगो, तभी अमेरिका में अपना स्कूल चला पाओगे। ब्रूस ली ने वोंग का चैलेंज स्वीकार कर लिया। कहते हैं कि वोंग ब्रूस ली के सामने 2 मिनट भी नहीं टिक पाया और मैदान छोड़कर भाग खड़ा हुआ। तब ब्रूस ली ने दौड़ा-दौड़ाकर वोंग को ललकारा, लेकिन उसने हार मान ली। इस फाइट के बाद अमेरिका में उनके स्कूल का नाम हो गया।

फिल्म शूट में कैमरामैन ने कर दिया ब्रूस को फिल्माने से इंकार

ब्रूस ली की तेजी का एक और उदाहरण उस वक्त मिला जब वो फिल्में करने लगे। एक फिल्म के सीन में कैमरामैन ने सीधे तौर पर उन्हें फिल्माने से इंकार कर दिया। कैमरामैन का कहना था कि ब्रूस ली के मूव्स और स्टंट इतने तेज थे कि कैमरा भी उसकी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा था। इसके बाद डॉयरेक्टर के कहने पर ब्रूस ली ने धीरे-धीरे अपने स्टंट किए। कैमरे में कैद ब्रूस ली की तेज रफ्तार वाले स्टंट जो अब तक आपने यूट्यूब वगैरह पर देखे हैं, वो भी काफी स्लो हैं। ब्रूस को कैमरे के सामने अपनी रफ्तार बहुत कम करनी पड़ती थी, ताकि उन्हें फिल्माया जा सके।