सफेद कबूतर ने ड्राइवर को जुर्माने से बचाया, लोग बोले- पवित्र आत्मा हुई मेहरबान
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सफेद कबूतर ने ड्राइवर को जुर्माने से बचाया, लोग बोले- पवित्र आत्मा हुई मेहरबान

नई दिल्ली: भारत से करीब 7 हजार किलोमीटर दूर जर्मनी में एक अजीब ओ गरीब घटना देखने को मिली। कोई इसे इत्तेफाक बता रहा है। तो कई पवित्र आत्मा करार दे रहा है। लेकिन सच्चाई क्या है ये असल में कोई नहीं जानता। खैर जो भी है इस घटना ने एक शख्स का नुकसान होने से तो जरूर बचा लिया है।

जर्मनी में घटी अजीब ओ गरीब घटना

  • पहली नजर में देखें तो ये फिल्मी सीन जैसा है। लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो रील से रियल लाइफ में तब्दील होने में समय नहीं लगा।
  • दरअसल, जर्मनी अपने हाइवे के लिए पहचाना जाता है। आप जर्मनी में जितना चाहें उतनी तेजी से अपनी गाड़ी दौड़ा सकते हैं। लेकिन आम सड़क में नहीं बल्कि उसके लिए एक हाइवे अलग से तैयार किया गया है।
  • लेकिन जहां स्पीड लिमिट हो वहां आप कतई भी स्पीड ज्यादा नहीं कर सकते।

अगर आपकी स्पीड नियम से ज्यादा होगी तो आपका चालान हो सकता है। अब तो ज्यादातर जगहों पर ऑटोमेटिक चालान करने की सुविधा है। यानी अगर आपकी स्पीड ज्यादा है तो आपकी और कार की फोटो खिंच जाती है। उसके बाद ये चालान आपके घर अपने आप आ जाएगा। लेकिन एक ही सूरत में आप इस चालान से बच सकते है। बस कैमरे में आपकी तस्वीर नहीं आनी चाहिए। भले ही आपकी गाड़ी कोई और चला रहा हो। ऐसा नहीं है कि अगर गाड़ी आप नहीं चला रहे हैं तो चालान आपसे नहीं लिया जा सकता है।

Viersen - Taube Schützte Identität von Raser (picture-alliance/dpa/Polizei Viersen)
Source-Google

कबूतर के कारण नहीं कट पाया इस शख्स का चालान

हाल ही में जर्मनी के एक छोटे से शहर फीएरसेन में एक व्यक्ति 30 जोन में गाड़ी 54 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा रहा था। ऐसे में उसे 105 यूरो यानी लगभग आठ हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता था। लेकिन जैसे ही स्पीड कैमरे ने तस्वीर खींची एक सफेद कबूतर कार के सामने आ गया और तस्वीर में ड्राइवर का चेहरा छिप गया। ट्रैफिक पुलिस ने काफी सोच विचार के बाद फैसला किया कि व्यक्ति से फाइन नहीं लिया जाएगा। पुलिस ने कहा- लगता है ड्राइवर को बचाने के लिए ऊपर वाले ने कोई चाल चली है।

ईसाई मान्यताओं के मुताबिक सफेद कबूतर को पवित्र आत्मा का प्रतीक माना जाता है। इस घटना के बाद लोग तरह-तरह की बाते बना रहे हैं। कुछ लोग उसे फरिशता बता रहे हैं। तो कोई महज इत्तेफाक बता रहा है। जो भी इस घटना के बारे में सुन रहा है। वो अपने हिसाब से उसकी व्याख्या कर रहा है।

29 May, 2019

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