महामृत्युंजय मंत्र के पीछे की कहानी, जानिए इसके पीछे का पूरा सच
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महामृत्युंजय मंत्र के पीछे की कहानी, जानिए इसके पीछे का पूरा सच

पौराणिक काल में शिव भगवान के अनन्य भक्त मृकण्ड ऋषि को कोई भी संतान नहीं थी। जिसके कारण वे और उनकी पत्नी विधाता के इस फैसले से परेशान रहा करते थे। मृकण्ड शिव भगवान के भक्त थे उन्होंने सोच कि भगवान शिव संसार के कष्टहरता हैं। तो वे ही इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। जिसके बाद उन्होंने भगवान शिव की पूजा करनी शुरु कर दी।

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वहीं भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने मृकण्ड को दर्शन दिए और कहा कि वे कोई भी इच्छा मांग सकते हैं। जिसके बाद मृकण्ड ने पुत्र प्राप्ती की इच्छा मांगी। तब भगवान शिव ने उन्हें दो विकल्प दिए, पहला कि उन्हें एक ऐसे पुत्र की प्राप्ति होगी जिसकी आयु दीर्धायु होगी यानि के लंबी आयु तो होगी लेकिन बालक बुद्धि में कमजोर होगा। दूसरा- पुत्र की अल्पायु होगी यानि कम आयु होगी लेकिन वो वुद्धिमान बहुत होगा। जिसके बाद मृकण्ड ने अल्पायु यानि के छोटी उम्र वाला पुत्र मांगा।

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जिसके बाद मृकण्ड को पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने मार्कण्डेय रखा। बचपन से ही मार्कण्डेय शिव भक्त बने। अब जैसे-जैसे पुत्र बड़ा होने लगा मृकण्ड और उनकी पत्नी परेशान रहने लगे। जिसे देखकर पुत्र मार्कण्डेय व्याकुल होने लगे और उनके बार बार पूछने पर जब उनके माता-पिता ने उन्हे सारी बात बताई तो उन्होंने घर में भगवान शिव का शिवलिंग लाकर पूजा करनी शुरु कर दी। और महामृत्युंजय मंत्र का निर्माण किया।

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अब जब उनका व़क्त पूरा होने आया तो यमलोक से यवराज के दो दूत आए, जिन्होंने देखा के मार्कण्डेय अभी शिवभक्ति में लीन है तो वो दूत वापस यमलोक गए और यमराज को सारी बात बताई। जिसके बात यमलोक से प्राण हरने के लिए खुद यमराज धरती पर आए। और जैसे ही मार्कण्डेय ने यमराज को देखा वे तुरन्त शिवलिंग से चिपक गए और जोर जोर से मृत्युंजय मंत्र का जाप करने लगे।

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ऐसा होता देख यमराज ने मार्कण्डेय को शिवलिंग से खींचकर अलग कर दिया। लेकिन जैसे ही यमराज ने मार्कण्डेय को शिवलिंग से अगल किया तभी मंदिर में एक तेज रोशनी हुई जिससे यमराज चुंधिया गए। उस रोशनी में से भगवान शिव निकले और उनके हाथ में त्रिशुल था, आंखों में अंगारे थे, जिसके बाद भगवान शिव ने यमराज को सावधान किया। और कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी भक्ति में लीन भक्त को खींचने की।

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महादेव के इस रुप को देखकर यमराज भी थर-थर कांपने लगे। फिर आगे भगवान शिव ने कहा कि मैं अपने भक्त की भक्ति से प्रसन्न हूं, और मैने इसे दीर्घायु होने का वरदान दिया है, यानि के लंबी आयु का वरदान दिया है। तुम इसे नहीं ले जा सकते। महादेव की ये बात सूनकर डरे हुए यमराज ने तुरन्त कहा कि जैसा आप कहे प्रभु ! मार्कण्डेय द्वारा रचित महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने वाले भक्त को कभी भी त्रास नहीं करूंगा।

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जिसके बाद यमराज को भी खाली हाथ धरती पर से लौटना पड़ा। और मार्कण्डेय द्वारा रचित महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से काल भी परास्त हो जाता है। और इसका जाप देने वाला व्यक्ति सदा के लिए खुश रहता है।

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6 September, 2019

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Ashish Jain