अलविदा 2018: गोपाल दास नीरज समेत इन 5 साहित्यकारों ने इस साल दुनिया को कहा अलविदा
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अलविदा 2018: गोपाल दास नीरज समेत इन 5 साहित्यकारों ने इस साल दुनिया को कहा अलविदा

नई दिल्ली। साहित्य जगत के लिए साल 2018 गम लेकर आया। जाने माने साहित्यकार गोपालदास नीरज और केदारनाथ साहनी समेत साहित्य जगत को इस साल 5 प्रसिद्ध साहित्यकार दुनिया को अलविदा कह गए। अपनी काव्य रचनाओं के लिए मशहूर रहे गोपालदास नीरज और केदारनाथ साहनी का निधन हिंदी साहित्य जगत के लिए बड़ी क्षति रहा।

गोपाल दास नीरज

भारत के सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवियों की सूची में शामिल गोपाल दास नीरज का 19 जुलाई को निधन हो गया।  उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘दर्द दिया है’, ‘आसावरी’, ‘मुक्तकी’, ‘कारवां गुजर गया’, ‘लिख-लिख भेजत पाती’ (पत्र संकलन), पंत-कला, काव्य और दर्शन (आलोचना) शामिल रहे।

गोपाल दास नीरज ने फिल्मों के लिए भी गीत लिखे। साल 1991 में उन्हें पद्मश्री, साल 1994 में यश भारती, 2007 में पद्मभूषण सम्मान से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा 1970 के दशक में लगातार तीन वर्षों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

केदारनाथ सिंह

समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि और आलोचक डॉ. केदारनाथ सिंह भी इस साल दुनिया से रुखसत हो गए। 19 मार्च को 84 साल की उम्र में मशहूर केदारनाथ सिंह का निधन हो गया। सरल और सहज भाषा में लिखी अपनी कविताओं के जरिए केदारनाथ सिंह ने हिंदी साहित्य को नई धार दी।

केदारनाथ सिंह ने ‘अभी बिल्कुल अभी’, ‘जमीन पक रही है’, ‘यहां से देखो’, ‘बाघ’, ‘अकाल में सारस’ और ‘उत्तर कबीर’ सहित आठ कविता संग्रह लिखे थे और आलोचना संग्रहों में ‘कल्पना और छायावाद’, ‘मेरे समय के शब्द’ प्रमुख माने जाते हैं। साल 2013 में केदारनाथ सिंह को साहित्य के सबसे बड़े सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वे साहित्य अकादमी पुरस्कार और व्यास सम्मान जैसे सम्मानों से भी नवाजे गये थे।

दूधनाथ सिंह

हिंदी साहित्य जगत की एक और महत्वपूर्ण हस्ती दूधनाथ सिंह भी इस साल साहित्य जगत को बड़ा सदमा दे गए। 12 जनवरी 2018 को 82 साल की उम्र में हिंदी साहित्य जगत के महत्वपूर्ण कथाकार दूधनाथ सिंह का निधन हो गया।

मूल रूप से बलिया के रहने वाले दूधनाथ सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी के प्राध्यापक भी रह चुके थे। दूधनाथ सिंह की प्रमुख रचनाएं ‘सपाट चेहरे वाला आदमी’, ‘यमगाथा’, ‘धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे’ ‘लौट आओ घर’ थीं। उन्हें उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान भारत भारती व मध्य प्रदेश सरकार के शिखर सम्मान मैथिलीशरण गुप्त से भी सम्मानित किया गया था।

विष्णु खरे

मशहूर कवि और आलोचक विष्णु खरे भी इस साल दुनिया को अलविदा कह गए। साहित्य जगत में कविता व आलोचना की नई जमीन तैयार करने वाले विष्णु खरे अपनी बेबाकी के लिए प्रसिद्ध थे। विष्णु खरे विश्व साहित्य और सिनेमा में भी अपनी पहचान रखते थे। 19 सितंबर को 78 साल की उम्र में विष्णु खरे का निधन हो गया।

चंद्रशेखर रथ

उड़िया साहित्य के मशहूर साहित्यकार चंद्रशेखर रथ 89 साल की उम्र में इस साल दुनिया को अलविदा कह गए। चंद्रशेखर रथ भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण लेखकों में माने जाते थे। साहित्य में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड, ओड़िशा साहित्य अकादमी व साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

31 दिसम्बर, 2018

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