अलविदा 2018: अटल, श्रीदेवी समेत इन 7 सेलिब्रिटिज ने दुनिया को कहा अलविदा

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साभार-गूगल

नई दिल्ली। भारत के लिए साल 2018 जहां उपलब्धियों से भरा रही, वहीं दूसरी तरफ कई जानी-मानी हस्तियां इस दुनिया को अलविदा कह गई। राजनीति, कला, फिल्म आदि क्षेत्रों में इस साल कई बड़ी हस्तियों का निधन हुआ।

अटल बिहारी वाजपेयी

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 16 अगस्त 2018 को इस दुनिया से विदा हो गए। भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन भारतीय राजनीति के लिए बड़ी क्षति रहा। अपने सौम्य व्यवहार और भाषण शैली के लिए प्रसिद्ध वाजपेयी पिछले काफी समय से बीमार थे।

1957 में पहली बार भारतीय जनसंघ के टिकट पर अटल बिहारी वाजपेयी संसद पहुंचे थे। साल 1996 में वह पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि, यह सरकार सिर्फ 13 दिन ही चल पाई। 1998  से 1999 के बीच दूसरी बार वापजेयी 13 महीने के लिए प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1999 से लेकर 2004 तक तीसरी बार वाजपेयी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला।

बतौर प्रधानमंत्री वाजपेयी की प्रमुख उपलब्धि 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण करना रहा। वे पाकिस्तान के साथ संबंधों को सुधारने की वकालत करने के लिए भी जाने जाते थे। 2005 में सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद वाजपेयी अपने घर में ही रहने लगे थे।

सोमनाथ चटर्जी

13 अगस्त 2018 को लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का निधन हुआ। असम के तेजपुर में जन्में सोमनाथ चटर्जी 1973 से 2008 तक सीपीआई (एम) से सांसद रहे। सोमनाथ चटर्जी 9 बार सांसद रह चुके थे। 2004 लोकसभा चुनाव के बाद यूपीए सरकार के कार्यकाल में वह लोकसभा स्पीकर चुने गए।

जीवी मावलंकर के बाद सोमनाथ चटर्जी ऐसे दूसरे प्रोटेम स्पीकर थे, जिन्होंने स्पीकर की कुर्सी संभाली। अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में चटर्जी ने सरकारी खजाने से चाय व प्रसाधन के लिए भुगतान करने की प्रथा को बंद की। वर्ष 2008 में यूपीए सरकार से समर्थन वापसी के बाद सोमनाथ चटर्जी द्वारा पद से इस्तीफा नहीं देने के कारण उन्हें सीपीआई (एम) से निष्कासित कर दिया गया था।

एम करुणानिधि

तमिलनाडु की राजनीति में 6 दशकों तक अपनी गहरी छाप छोड़ने वाले एम. करुणानिधि भी इस साल अपने समर्थकों को अकेला छोड़कर चले गए। इसी साल अगस्त में एम. करुणानिधि का निधन हुआ।

तमिल फिल्मों में बतौर लेखक अपना करियर शुरू करने वाले एम करुणानिधि पहली बार 33 साल की उम्र में तमिलनाडु विधानसभा पहुंचे थे। 1967 में द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के सत्ता में आने पर वे लोक कार्य मंत्री बने। 1969 में अन्नादुरै की मृत्यु के बाद वे पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और तकरीबन तीन वर्ष तक इस पद पर रहे।

मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी

1971 में लोंगेवाला की लड़ाई के हीरो रहे मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी भी इस साल दुनिया को अलविदा कह गए। लोंगेवाला पोस्ट पर मात्र 120 सैनिकों के साथ पाकिस्तान की पूरी टैंक रेजिमेंट और 2000 सैनिकों को धूल चटाने वाले मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी 1971 की लड़ाई में नायक बनकर उभरे। उनकी बहादुरी को फिल्म निर्देशक जेपी दत्ता ने बड़े पर्दे पर अपनी फिल्म बॉर्डर के जरिए बड़े पर्दे पर उतारा। इस फिल्म में मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का किरदार अभिनेता सनी देओल ने निभाया था।

दुबई के होटल में मृत मिली श्रीदेवी

मिस हवा-हवाई और चांदनी के नाम से बॉलीवुड में मशहूर श्रीदेवी भी इस साल दुनिया को अलविदा कह गई। 90 के दशक में सबसे ज्यादा चर्चित और सफल अभिनेत्री श्रीदेवी 24 फरवरी को दुबई के होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं। मौत से चंद घंटे पहले श्रीदेवी अपने भतीजे की शादी में शिरकत करती दिखी थीं।

हिम्मतवाला, नगीना, मिस्टर इंडिया, चांदनी और खुदा गवाह समेत 200 हिंदी फिल्मों में काम कर चुकी श्रीदेवी के निधन से पूरे बॉलीवुड जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके कई फैंस इस सदमे से लंबे समय तक उबर नहीं पाए। श्रीदेवी की मौत कैसे हुई, इसपर पुलिस थ्योरी आज भी सवालों के घेरे में है।

प्यारेलाल वडाली

विश्व-प्रसिद्ध संगीतकार-गायकों की जोड़ी ‘वडाली ब्रदर्स’ में से एक उस्ताद प्यारेलाल वडाली का इस साल निधन हो गया। 75 सल के प्यारेलाल वडाली और उनके भाई पूरी दुनिया में वडाली ब्रदर्स के नाम से मशहूर हैं। अपनी गायिकी से समां बांधने वाली यह जोड़ी टूट भले ही गई, लेकिन अब उनकी अगली पीढ़ी इस विरासत को संभाल रही है। वडाली ब्रदर्स ने फिल्मों के लिए ‘ऐ रंगरेज मेरे’, ‘एक तू ही तू ही’ जैसे गाने भी गाये। इनका सबसे प्रसिद्ध गाना ‘तू माने या ना माने’ रहा।

क्रिकेटर अजीत वाडेकर

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर भी इस साल दुनिया को अलविदा कह गए। 70 के दशक में टीम इंडिया की कमान संभालने वाले अजीत वाडेकर की गिनती भारत के सबसे सफल कप्तानों में होती है।  वाडेकर ने 1966 से 1974 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। साल 1971 में अजीत वाडेकर के नेतृत्व में भारत ने इंग्लैंड में अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती थी। वह बायें हाथ के बल्लेबाज व कुशल फील्डर भी माने जाते थे।