अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस: जिंदा रहने के लिए जरूरी हैं पर्वत, प्रकृति से छेड़खानी पड़ेगी महंगी

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साभार-गूगल

नई दिल्ली। पहाड़ों का नाम सामने आते ही सीढ़ीनुमा खेत और लहराती-बलखाती सड़कों की तस्वीर हमारे सामने आ जाती है। पहाड़ों का संरक्षण करने के लिए ही आज पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का मुख्य उद्देश्य पर्वतों में रहने वाले मनुष्यों के जीवन में सुधार लाना है। साथ ही साथ पर्यावरण सरंक्षण भी इसके उद्देश्य में शामिल है।

बेरोजगारी और पलायन चिंता का विषय

11 दिसंबर को हर साल अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का पूरे विश्व में आयोजन होता है। पहाड़ों में बढ़ रही बेरोजगारी और पलायन इस वक्त पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रकृति के इस अनूठे उपहार को बचाने के लिए इस दिन विशेष तौर पर प्रयास करती है।

उत्तर भारत का एक बड़ा हिस्सा पहाड़ों से घिरा हुआ है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मैदानी जमीन से ज्यादा पहाड़ मौजूद हैं। बेरोजगारी के कारण आज भी बड़ी संख्या में इन पर्वतीय क्षेत्रों से लोग मैदानों की तरफ पलायन कर रहे हैं।

व्यवसायिक उद्योग बन रहे विनाश का कारण

पहाड़ों में बढ़ रहे व्यवसायिक उद्योग भी विनाश का कारण बन रहे हैं। केदारनाथ त्रासदी के बाद आई रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि पहाड़ों में जगह-जगह बेतरतीब ढंग से बन रहे होटल और लॉज पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मुनाफे के लिए खोले गए इन होटलों से प्रकृति को नुकसान हो रहा है और ये ग्लोबल वार्मिंग के लिए भी जिम्मेदार हैं।

वैज्ञानिक दे चुके हैं चेतावनी

हिमालयी क्षेत्र ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों का भी यही हाल है। 2015 में भारत के बड़े वैज्ञानिकों और भूगर्भ शास्त्रियों ने सरकार को चेताया था कि मानवीय हस्तक्षेप से पहाड़ों में जलवायु परिवर्तन का असर तेज हो रहा है। भविष्य में चेन्नई और केदारनाथ जैसी भयानक बाढ़ से बचना है तो पहाड़ों को बचाना जरूरी है।

वैज्ञानिकों का कहना था कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। अगर सरकार पहले से सख्त कदम नहीं उठाती तो आने वाले भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ने का अनुमान है।

पहाड़ों पर बसती है 13 प्रतिशत आबादी

पर्यावरण और धरती को बचाने के लिए पहाड़ों को बचाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि धरती का 23 प्रतिशत हिस्सा पर्वतीय है। इन पहाड़ों पर 915 मिलियन लोग बसते हैं, जो विश्व की कुल जनसंख्या का 13 प्रतिशत हिस्सा है। सही समय पर यदि पहाड़ों को बचाने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो इन प्राकृतिक आपदाओं में हर साल लाखों लोगों के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी मौत के मुंह में समाते रहेंगे।

सरकार को तय करने चाहिए मानक

पहाड़ों को बचाने के लिए सबसे पहले सरकार को नीति और मानक तय करने चाहिए। इन तय मानकों और नीतियों के आधार पर ही नए निर्माण की व्यवस्था होनी चाहिए। पहाड़ों से लोगों का पलायन रोकने के लिए वहां ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा किए जाने चाहिए। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्र में पेड़ों के कटान को लेकर भी सख्त नियम बनने चाहिए।