विश्व बालश्रम निषेध दिवस: दो घूंट खुशी के पी लेने दो, बच्चे हैं हम हमें जी लेने दो
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विश्व बालश्रम निषेध दिवस: दो घूंट खुशी के पी लेने दो, बच्चे हैं हम हमें जी लेने दो

नई दिल्ली: बचपन जिंदगी का सबसे अनमोल पल होता है, सब लोग इसे बहुत ही बेहतर तरीके से जीते है। लेकिन इस दुनिया में वैसे भी कुछ लोग होते हैं, जिन्हें अपना बचपन भी नसीब नहीं होता है। उनकी मजबूरी उनके बचपन पर हावी हो जाती है और वे बच्चे मजदूरी करने(World day against child labour 2019) पर विवश हो जाते है।

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अगर हम भारत की बात करें तो पाएंगे कि बाल मजदूरी (anti child labour in india) हमारे देश की बहुत पुरानी एवं सबसे बड़ी समस्या रही है। जहां एक तरफ हमारे देश में बच्चों को भगवान का रुप माना जाता है तो वहीं दूसरी तरफ उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मजदूरी कराई जाती है। बच्चें पढ़ने लिखने और खेलने कूदने के उम्र में ही मजदूर(World day against child labour 2019) बन जाते हैं। सीधे लफ्जों में कहें तो कुछ लोग उनकी मजबूरी को हथियार बनाकर उनके भविष्य के साथ जबरदस्ती खिलवाड़ करते है।

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बाल मजदूरी करने वाले बच्चों का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास नहीं हो पाता है और वे इस दलदल में धंसते चले जाते हैं। बता दें कि हमारे संविधान में भी बालश्रम के विषय को लेकर कई कानून बनाए गए है। भारत सरकार ने सन् 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित किया था।

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इस अधिनियम के आधार पर एक तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई, जिनके निर्णय के बाद संविधान में संशोधन करके खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगा दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 23 एवं अनुच्छेद 24 के अनुसार शोषण एवं अन्याय के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान है।

आखिर क्या हैं बाल मजदूरी के कारण

  • आर्थिक रुप से कमजोर (गरीबी)
  • शिक्षा का अभाव
  • संवैधानिक कानूनों का दुरुपयोग
  • लोगों का अपना स्वार्थ

बाल मजदूरी है कानूनी अपराध

अनुच्छेद 24 में कहा गया है कि 14 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी भी फैक्ट्री या फिर खादान में काम करने के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा। इस अनुच्छेद में 14 साल से 18 साल के बच्चों के लिए प्रतिदिन साढ़े चार घंटे की कार्य अवधि तय की गई।

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लेकिन इतने कानून होने के बावजूद भी होटलों, दुकानों, फैक्ट्रियों के साथ-साथ और भी ऐसे अनेक जगह है जहां आपको बालश्रमिक मिल जाएंगे। अभी के समय में विश्व की तुलना में भारत में बालश्रमिकों की संख्या सबसे ज्यादा है। सरकारी आकड़ों की माने तो भारत में 2 करोड़ से ज्यादा बालमजदूर है, जिनका भविष्य दिन-प्रतिदिन अंधेरे में जा रहा है।

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तो आईए आज विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर हम संकल्प लें कि इस अभिशाप को हम जड़ से उखाड़ फेकेंगे। इसके खात्मे के लिए हम कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे और साथ ही साथ हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि बाल मजदूरी पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए एवं उन बच्चों के विकास के लिए नए योजनाओं को शुरु किया जाए। जिससे बच्चों के भविष्य को समय रहते ही बचाया जा सके।

बालश्रम पर प्रतिबंध लगाओ, बच्चों का जीवन बचाओ

12 June, 2019

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