Karwachauth 2019 Special: व्रत, पूजा, मुहूर्त और कब होंगे चांद के दीदार
श्रद्धा के भाव

Karwachauth 2019 Special: व्रत, पूजा, मुहूर्त और कब होंगे चांद के दीदार

करवाचौथ (karwachauth 2019) का व्रत हिन्दुओं के लिए बहुत ही ज़्यादा पवित्र त्योहार है। यह कार्तिक मास (Kartik) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियां मनाती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब 4 बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा ( karwachauth Moon) दर्शन के बाद संपूर्ण होता है। हर साल की तरह इस बार भी करवाचौथ (karwachauth 2019) की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस बार करवाचौथ पर पूरे 70 साल बाद मंगल योग बन रहा है, ज्‍योतिषियों का कहना है कि साल 2019 के करवाचौथ में रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग है, जिसे बेहद फलदाई माना जाता है।

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12 से 16 सााल का उपवास

कार्तिक (Kartik) मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवाचौथ व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन यदि सुहागिन स्त्रियां उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखद होने लगता है। हालांकि पूरे भारतवर्ष में हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूम-धाम से इस त्योहार को मनाते हैं। सामान्यत: विवाह के बाद 12 या 16 साल तक लगातार इस उपवास को किया जाता है लेकिन इच्छानुसार जीवनभर भी शादीशुदा महिलाएं इस व्रत को रख सकती हैं। इस दिन स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चांद और पति को देखती हैं और पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं।

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करवाचौथ की तिथि और शुभ मुहूर्त (Karwachauth Muharat)

करवाचौथ तारीख (Karwachauth Date) : 17 अक्‍टूबर (गुरुवार) को सुबह 06 बजकर 48 मिनट से चतुर्थी तिथ‍ि खत्म: 18 अक्‍टूबर को सुबह 07 बजकर 29 मिनट तक करवाचौथ व्रत का समय: 17 अक्‍टूबर को सुबह 06:27 बजे से रात 08: 16 बजे तक कुल अवधि: 13 घंटे 50 मिनट पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक कुल अवधि: 1 घंटे 16 मिनट।

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करवाचौथ की पूजन सामग्री (Karwachauth Pooja)

करवाचौथ के व्रत से एक-दो दिन पहले ही सारी पूजन सामग्री को इकट्ठा करके घर के मंदिर में रख दें। पूजन सामग्री इस प्रकार है- मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्‍कन, पानी का लोटा, गंगाजल, दीपक, रूई, अगरबत्ती, चंदन, कुमकुम, रोली, अक्षत, फूल, कच्‍चा दूध, दही, देसी घी, शहद, चीनी,  हल्‍दी, चावल, मिठाई, चीनी का बूरा, मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा के पैसे।

करवाचौथ पूजा की विधि (Karwachauth Vidhi)

  • करवाचौथ वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्‍नान कर लें। मंत्र का उच्‍चारण करें।
  • सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें और फिर दिन भर निर्जला व्रत रखें।
  • दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और भीगे हुए चावलों को पीसकर घोल तैयार कर लें, इस घोल से फलक पर करवा का चित्र बनाएं। वैसे बाजार में आजकर रेडीमेड फोटो भी मिल जाती हैं. इन्‍हें वर कहा जाता है. चित्रित करने की कला को करवा धरना का जाता है।
  • जल से भर हुआ लोट रखें।
  • करवा में गेहूं और ढक्‍कन में शक्‍कर का बूरा भर दें।
  • रोली से करवा पर स्‍वास्तिक बनाएं।
  • अब गौरी-गणेश और चित्रित करवा की पूजा करें।
  • करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।
  • कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपने सभी बड़ों का आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।
  • पानी का लोटा और 13 दाने गेहूं के अलग रख लें।
  • चंद्रमा के निकलने के बाद छलनी की ओट से पति को देखें और चन्द्रमा को अर्घ्‍य दें।
  • चंद्रमा को अर्घ्‍य देते वक्‍त पति की लंबी उम्र और जिंदगी भर आपका साथ बना रहे इसकी कामना करें।
  • अब पति को प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लें और उनके हाथ से जल पीएं. अब पति के साथ बैठकर भोजन करें।
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करवाचौथ की व्रत कथा (Karwachauth Katha)

करवाचौथ व्रत को लेकर कथा इस प्रकार है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार एक साहूकार के सात लड़के व एक लड़की थी। सेठानी समेत उसकी बहुओं और बेटी ने करवा चौथ व्रत रखा था। रात्रि को साहूकार के लड़के भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन से भोजन के लिए कहा। इस पर बहन ने जवाब दिया- ‘भाई! अभी चांद नहीं निकला है, उसके निकलने के बाद ही अर्घ्‍य देकर भोजन करूंगी।’ बहन की बात सुनकर भाइयों ने क्या काम किया कि नगर से बाहर जाकर अग्नि जला दी और छलनी ले जाकर उसमें से प्रकाश दिखाते हुए उन्‍होंने बहन से कहा- ‘बहन! चांद निकल आया। अर्घ्‍य देकर भोजन कर लो।’

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यह सुन उसने अपने भाभियों से कहा, ‘आओ तुम भी चांद को अर्घ्‍य दे दो। परन्तु वे इस कांड को जानती थीं, उन्होंने कहा- “बाई जी! अभी चांद नहीं निकला है, तेरे भाई तेरे से धोखा करते हुए अग्नि का प्रकाश छलनी से दिखा रहे हैं।’ भाभियों की बात सुनकर भी उसने कुछ ध्यान न दिया और भाइयों द्वारा दिखाए गए प्रकाश को ही अर्घ्‍य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार व्रत भंग करने से गणेश जी नाराज हो गए। इसके बाद उसका पति सख्त बीमार हो गया और घर का पूरा धन उसकी बीमारी में लग गया।

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जब उसने अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसने पश्चाताप किया गणेश जी की प्रार्थना करते हुए विधि विधान से पुनः चतुर्थी का व्रत करना आरम्भ कर दिया। श्रद्धानुसार सबका आदर करते हुए सबसे आशीर्वाद ग्रहण करने में ही मन को लगा दिया। इस प्रकार उसकी श्रद्धा भक्ति सहित कर्म को देखकर भगवान गणेश उस पर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवन दान दे कर उसे आरोग्य करने के पश्चात धन-संपत्ति से युक्त कर दिया। इस प्रकार जो कोई छल-कपट को त्याग कर श्रद्धा-भक्ति से चतुर्थी का व्रत करेंगे उन्‍हें सभी प्रकार का सुख मिलेगा।

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कब होंगे चांद के दीदार (karwachauth Moon)

करवाचौथ का त्योहार शादीशुदा स्त्रियां चांद देकर खोलती है करवाचौथ के दिन यानी 17 अक्टूबर को दिल्ली में चांद रात को 8 बजकर 16 मिनट पर निकलेगा।

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16 October, 2019

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Ashish Jain