Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा में क्यों खाते है रात की बनी हुई खीर
श्रद्धा के भाव

Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा में क्यों खाते है रात की बनी हुई खीर

Sharad purnima 2019: शरद पूर्णिमा जिसे ‘कोजागरी पूर्णिमा’ या ‘रास पूर्णिमा’ भी कहते है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को आता है। ज्योतिष के अनुसार पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है। तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है।

source-google

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा(Sharad purnima 2019) का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कहा जाता है कि जो विवाहित स्त्रियां इसका व्रत करती हैं उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। जो माताएं इस व्रत को रखती हैं उनके बच्चे दीर्घायु होते हैं। वहीं अगर कुंवारी कन्याएं यह व्रत रखें तो उन्हें मनवांछित पति मिलता है। शरद पूर्णिमा का चमकीला चांद और साफ आसमान मॉनसून के पूरी तरह चले जाने का प्रतीक है। इस दिन चंद्रमा के प्रकाश में औषधिय गुण मौजूद रहते हैं जिनमें कई असाध्य रोगों को दूर करने की शक्ति होती है।

यह भी पढ़े: Khambhalida Caves Rajkot: राजकोट के खंभालिदा की गुफा

source-google

Sharad Purnima Pooja Vidhi: पूजा की विधि

(Sharad Purnima Pooja Vidhi) इस दिन विधिपूर्वक स्नान करके भाव से उपवास रखे। धनवान व्यक्ति तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढंकी हुई स्वर्णमयी लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करके भिन्न-भिन्न उपचारों से उनकी पूजा करें, तदनंतर सायंकाल में चन्द्रमा निकलने पर सोने, चाँदी अथवा मिट्टी के घी से भरे हुए 100 दीपक जलाए। इसके बाद घी मिलाकर खीर तैयार करे और बहुत-से पात्रों में डालकर उसे चन्द्रमा की चाँदनी में रखें। जब एक पहर यानी 3 घंटे ना बीत जाएं उसके बाद तब लक्ष्मीजी को सारी खीर अर्पण करें।

source-google


इस प्रकार प्रतिवर्ष किया जाने वाला यह कोजागर व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है। इससे प्रसन्न हुईं मां लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि देती ही हैं और शरीर का अंत होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।

शरद पूर्णिमा का महत्‍व

हिन्‍दू धर्म में कोजागर पूर्णिमा का विशेष महत्‍व है। मान्‍यता है कि इस दिन धन की देवी लक्ष्‍मी रात के समय आकाश में विचरण करते हुए कहती हैं- ‘को जाग्रति’. संस्‍कृत में ‘को जाग्रति’ का मतलब है कि ‘कौन जगा हुआ है?’ कहा जाता है कि जो भी व्‍यक्ति शरद पूर्णिमा के दिन रात में जगा होता है मां लक्ष्‍मी उन्‍हें उपहार देती है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही मां लक्ष्‍मी का जन्‍म हुआ था। इस वजह से देश के कई हिस्‍सों में इस दिन मां लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है, जिसे ‘कोजागरी लक्ष्‍मी पूजा’ के नाम से जाना जाता है।

source-google


मान्‍यता है कि कोजागर पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से सभी दुखों का नाश होता है और घर-गृहस्‍थी सुख-संपन्‍न हो जाती है। इस दिन शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है। यही पूर्णिमा कार्तिक स्नान के साथ, राधा-दामोदर पूजन व्रत धारण करने का भी दिन है। इस रात्रि में भ्रमण और चंद्रकिरणों का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है। प्रति पूर्णिमा को व्रत करने वाले इस दिन भी चंद्रमा का पूजन करके भोजन करते हैं।

source-google

शरद पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त

  • कोजागर पूर्णिमा तिथि: रविवार, 13 अक्‍टूबर 2019
  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक
  • चंद्रोदय का समय: 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

हार्वेस्ट फेस्टिवल

शरद पूर्णिमा आश्विन के हिंदू चंद्र माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला एक फसल उत्सव है। जो मानसून के मौसम के अंत का प्रतीक है। ओडिशा में इस दिन अविवाहित महिलाएं अपने योग्य वर पाने की लोकप्रिय धारणा के साथ उपवास रखती हैं। ये फसल उत्सव एक वार्षिक उत्सव है जो किसी दिए गए क्षेत्र की मुख्य फसल के समय के आसपास होता है। दुनिया भर में जलवायु और फसलों में अंतर को देखते हुए, फसल त्योहारों को विभिन्न स्थानों पर कई बार पाया जा सकता है।

source-google
12 October, 2019

About Author

Ashish Jain