जानिए ‘Bhutan’ में शरीर के किस अंग की होती है पूजा!
श्रद्धा के भाव

जानिए ‘Bhutan’ में शरीर के किस अंग की होती है पूजा!

अगर लोग अपने घरों के बाहर पुरुष (Men) के लिंग (Phallus) की तस्वीर बना ले तो क्या होगा, हर आता-जाता व्यक्ति उसे देखेगा अश्लील कहेगा। लेकिन एक ऐसा भी देश है जहां पुरुषो के इस लिंग (Phallus) की पूजा की जाती है। उस देश का नाम है भूटान (Bhutan)। जी हां दुनिया के एक कोने में भूटान (Bhutan) का प्राचीन भूमिगत साम्राज्य निहित है। शक्तिशाली हिमालय से घिरा हुआ और भारत और चीन के किनारे इस बौद्ध देश को अक्सर (Land of the Thunder Dragon) की भूमि कहा जाता है। अब जानते है Phallus की पूजा क्यों और कैसे होती है।

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Phallus की पूजा करने से क्या होता है

भूटान (Bhutan) में कई सालों से यह परंपरा है कि वहां दीवारों पर बड़े, छोटे पुरुष के लिंग की तस्वीरें बनाई जाती है| ये पेंटिंग्स प्राचीन बौद्ध परंपरा की साक्षी हैं| भूटान (Bhutan) में यह फैलस( phallus) पेंटिंग के नाम से जाने जाते हैं| भूटान (Bhutan) में ऐसा माना जाता है कि लिंग की प्रतिमा बुरी आत्माओं को दूर रखती है और बुरी भावनाओं से हमें बचाती है| और इन बुरी भावनाओं में कामुकता भी शामिल है| लोग घरों की दीवारों पर भी लिंगों की तस्वीरें या पेंटिंग बनवा लेते हैं|

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Phallus की क्यों होती है पूजा  

पुरानी कहानियों की माने तो इस संस्कृति के जनक दृक्पा कुंले ( Drukpa Kunley) थे| यह भूटान (Bhutan) में आया हुआ एक विचित्र बौद्ध भिक्षु था जो कि अपना पूरा समय मदिरापान, महिलाओं के साथ यौन संबंध और कामुकता में व्यतीत करता | वो अपने अनुचरों को शिक्षा देता था कि मनुष्य को सांसारिक लफड़ों और टीम टामरों से दूर रहना चाहिए और सादा जीवन व्यतीत करने का अनुसरण करना चाहिए| जिसमें सादे जीवन से उसका मतलब था कि आध्यात्म की खोज और कामुकता की उदारता| भूटान (Bhutan) में इस भिक्षु का भी एक मंदिर है जो इन पेटिंग्स से सजा धजा हुआ है|

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उस मंदिर में कामुकता की पूजा होती है और भूटान  (Bhutan) के पश्चिमी भाग के लोग इस परंपरा को मानते हुए हर साल इस मंदिर में संतान प्राप्ति के लिए आते हैं| इसके अलावा इस महान भिक्षु के बारे में यह भी कथा है कि कभी कभार यह अपने गले में रस्सी बांध कर घुमते थे | आपको जानकार हैरानी होगी कि यह रस्सी उसके लिंग से लपेटते हुए बंधी होती थी जिसे वो गर्दन तक पहुंचाकर अपने गले में लपेट लेता था| उसका मानना था कि इससे जब भी वो औरतों के साथ होगा तो उसे सौभाग्य की प्राप्ति होगी|

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कैसे होती है Phallus की पूजा

पूर्वी भूटान (Eastern Bhutan) में साल के किसी विशेष समय पर पुरुष के लिंग की पूजा की जाती है ,उसे दूध चढ़ाया जाता है और लकड़ी से बने हुए प्रतीकात्मक लिंग मेहमानों के गिलास में डालकर उनकी चाय ,दूध, शरबत और शराब से खातिरदारी की जाती है| इतना ही नहीं हमारे आपके यहां जो नए घर में घरवास की पूजा होती है तो भूटान (Bhutan) में नए घरों में घरवास की पूजा के दौरान घर के चारों कोनों पर लकड़ी से बनाए पुरुष के लिंगों की पूजा करने और टांगने की परंपरा है | इस पूजा के दौरान लोग चार अलग अलग डलियों में लकड़ी से बने लिंगो को डालकर पूजा करते हैं।

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उन डलियों को घर के मर्द रस्सी से बांधकर ऊपर यानी घर के छत की ओर खींचते हैं तो उसी डलिए को घर की औरतें नीचे से रस्सी बांध कर जमीन की ओर खींचती हैं| इस तरह अंत में चारों कोनों पर चार अलग अलग रंग के छोटे बड़े लकड़ी से बने पुरुष के लिंगो को बांध दिया जाता है और ईश्वर से प्रार्थना की जाती है कि यह लिंग घर को बुरी बलाओं से बचाए| घर में सदा सुख, शांति और भाईचारा बना रहे |

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जिसे आप और हम समभोग की वस्तु समझते हैं वो किसी के घर का वास्तु शास्त्र ठीक करने का टोटका है तो किसी बौद्ध भिक्षु के लिए समभोग में भी सौभाग्य ढूढ़ने का तरीका।

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18 October, 2019

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Ashish Jain