जानिए कैसे ? निर्जला एकादशी का व्रत रख भीम ने किया अपनी समस्या का समाधान,
श्रद्धा के भाव

जानिए कैसे ? निर्जला एकादशी का व्रत रख भीम ने किया अपनी समस्या का समाधान,

नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं। सभी एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान विष्णु की पूजा करते हैं व उपवास रखते हैं। अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर कुल 26 एकादशियां होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, पूजा और दान करने से व्रती जीवन में सुख-समृद्धि का भोग करते हुए अंत समय में मोक्ष को प्राप्त होता है।

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लेकिन इन सभी एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी है जिसमें व्रत रखकर साल भर की एकादशियों जितना पुण्य कमाया जा सकता है। यह है ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी। इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। निर्जला एकादशी भगवान विष्णु का व्रत है। इस व्रत में भक्त विधिवत भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

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आइये जानते हैं कैसे अन्य एकादशियों से अलग हैं निर्जला एकादशी?

क्या है निर्जला एकादशी (nirjala Ekadashi) की पौराणिक कथा


ऐसी मान्यता है की पांडवों ने अर्थ, धर्म ,काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए महर्षि वेद व्यास के सुझाव से निर्जला व्रत करने की शुरुआत की।लेकिन परिवार में भीम जो अपनी ताकत के साथ साथ खाने पिने के लिए भी भी बहुत ही प्रचलित थें जिसके कारण उनके लिए यह व्रत रख पाना बहुत ही मुश्किल होता था। ऐसे में भीम के लिए यह एक समस्या बन गयी थी जिसके लिए उन्होंने महर्षि वेद वेद व्यासकी शरण ली अथवा उनसे अपनी समस्या का समाधान करने के लिए आवेदन किया।

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भीम ने वेद व्यास से कहा की आप कोई यूपी बताएं जिससे मैं अपना व्रत भी सम्पन कर सकूं और मेरी भूख का भी कोई समाधान हो जाये। इसके बाद महर्षि वेद व्यास भीम को एक उपाय बताया और बोला की वत्स यह उपाय सरल तो हैं परन्तु बहुत ही कठिन भी हैं। तुम ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करो। यह भगवान विष्णु के लिए रखा जाना वाला व्रत है जो तुम्हे मोक्ष और स्वर्ग का रास्ता दिखायेगा। यह एक व्रत 24 व्रतों से आजादी दिलाएगा,लेकिन तुम्हे यह एक व्रत बिना कुछ खाये पिए यानि की निर्जला करना होगा। यह व्रत करने से तुम सभी एकादशी व्रतों के पुण्य प्राप्त कर सकते हो।

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इसके बाद भीम ने हर महीने 2 दिन के व्रत से बेहतर वर्ष में एक बार निर्जला व्रत रखना सही समझा और व्रत करना शुरू कर दिया। इसी कारण से इस व्रत को निर्जला एकादशी भी कहा जाता है। चूकि इस व्रत को पांडवों ने भी किया था इसलिए इसे पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही भीम ने इस व्रत की शुरुआत की थी जिस कारण इसे भीम एकादशी भी कहा जाता है।

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nirjala Ekadashi की पूजन विधि


nirjala Ekadashi को सभी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है इसलिये पूरी आस्था और सम्मान के साथ इस व्रत को करना चाहिये। व्रत करने से पहले भगवान से प्रार्थना करें मेरे समस्त पाप नष्ट हों।इस दिन पर आप “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं। निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक अन्न व जल का त्याग करें।

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क्या करें इस शुभ मुहूर्त के अवसर पर

  • अन्न, वस्त्र, जूती आदि का दान कर सकते हैं।
  • जल से भरे घड़े को भी दान किया जाता है।
  • इस शुभ दिन पर आप नमक एवं तिल का दान कर सकते हैं, जो आपके बुरे समय को दूर करने में सहायक होता है।
  • ब्राह्मणों अथवा किसी गरीब व जरुरतमंद को भोजन और दक्षिणा भी देनी चाहिये।
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  • इस दिन पर आप “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का उच्चारण भी कर सकते हैं।
  • निर्जला एकादशी की कथा भी पढ़नी या सुननी चाहिये।
  • द्वादशी के सूर्योदय के बाद विधिपूर्वक ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद अन्न व जल ग्रहण करें।
  • व्रती को ध्यान रखना चाहिये कि गलती से भी स्नान व आचमन के अलावा जल ग्रहण न हों।
13 June, 2019

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