बांके बिहारी मंदिर के चमत्कार, और उनके मंदिरों की विशेषताएं
श्रद्धा के भाव

बांके बिहारी मंदिर के चमत्कार, और उनके मंदिरों की विशेषताएं

‘राधे-राधे जपों चले आएंगे बिहारी’ ये लाइन अपने आप में राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी बयां करती है। कृष्‍ण की भक्‍ति से सराबोर लोग कान्हा मंदिर में जाते है। वैसे तो कान्हा मंदिर में भक्ति-अर्चना-पूजा होती है लेकिन कान्हा मंदिर एक ओर बात के लिए मशहूर है वो कृष्ण चमत्कार है। वृंदावन में आज भी कृष्ण जी निवास करते है और रोज़ रात को निधि वन में रासलीला करते है। अक्सर ऐसा सुना जाता है कि कृष्णा ने ये चमत्कार किए, कृष्ण ने वो चमत्कार किए। लेकिन आज हम आपको कृष्ण के ऐसे मंदिरों के बारे में बताएंगे जहां सच में कृष्ण चमत्कार होते है।

Source-google

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका, गुजरात

ये गुजरात का बहुत ही मशहूर मंदिर है। इसे जगत मंदिर भी कहा जाता है। चार धाम यात्रा करते वक़्त इस मंदिर में भी दर्शन करते है। 43 मीटर की ऊंचाई पर ये मंदिर गोमती क्रीक पर स्थित है। ये भी मंदिर अपने चमत्कार के लिए मशहूर है। ये मंदिर महाभारत के वक़्त में बना था। जन्माष्टमी के मौके पर ये मंदिर बहुत ही भव्य सजाया जाता है।

Source-google

बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन

भगवान श्री कृष्ण ने अपने बचपन का समय वृंदवन में ही बिताया था। ये मंदिर बहुत ही प्राचीन और बहुत ज़्यादा मशहूर है। इस मंदिर का नाम भी श्री बांके बिहारी के नाम पर रखा गया है। यहां पर जन्माष्टमी के दिन मंगला आरती होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए द्वार खुल जाते है। इस मंदिर की बहुत कहानियां प्रचलित है जैसे कि श्री कृष्ण का अपने भक्त के लिए गवाही देने के लिए मंदिर से गायब हो जाना या फिर रात में निधि वन में जाकर रास करना।

Source-google

द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा

ये मंदिर मथुरा का दूसरा सबसे मशहूर मंदिर है। यहां पर कृष्ण की मूर्ति काळा रंग की है और राधा की मूर्ति सफ़ेद रंग की है। इस मंदिर में चमत्कार होते है और इस मंदिर में काफी सुकून मिलता है। मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर 1814 में सेठ गोकुल दास पारीख ने बनवाया था उनकी मौत 1930 में सेवा पूजन के लिए यह मन्दिर पुष्टिमार्ग के आचार्य गिरधरलाल जी कांकरौली वालों को भेंट किया गया। भगवान श्री कृष्ण को ‘द्वारका के राजा’ भी कहा जाता है।

Source-google

जगन्नाथ पुरी, उड़ीसा

ये मंदिर उड़ीसा में स्थित है। इस मंदिर में कृष्ण बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। इस मंदिर में हर साल रथ यात्रा होती है। इसमें भाग लेने और भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए पुरे विश्व से लोग आते है। सबसे आगे बलराम जी का रथ रहता है, फिर बहन सुभद्रा का रथ रहता है उसके बाद कृष्ण जी का रथ होता है।

Source-google

सांवलिया सेठ मंदिर, राजस्‍थान

गिरिधर गोपाल का ये मंदिर बहुत ही मशहूर है। जिन लोगो को व्‍यापार में कठिनाई होती है वो लोग इस मंदिर में पूजा करने आते है। यहां मीरा के गिरिधर गोपाल को बिजनस पार्टनर होने के कारण प्यार से सांवलिया सेठ मंदिर भी कहा जाता है। सांवलिया सेठ का मंदिर करीब 450 साल पुराना है। मेवाड़ राजपरिवार की ओर से इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था। हर माह अमावस्या के 1 दिन पहले चतुर्दशी को मंदिर का भंडारा होता है।

Source-google

13 November, 2019

About Author

Rachna