Madai festival: ‘हंसने-खुशियां सांझा करने का एक अनोखा त्योहार’
श्रद्धा के भाव

Madai festival: ‘हंसने-खुशियां सांझा करने का एक अनोखा त्योहार’

भारत में हर तरीके के त्यौहार मनाए जाते है, ये कहना गलत नहीं होगा की भारत त्यौहार और मेलों का देश है। भारत में हर तरीके के संस्कृति से जुड़े लोगो को देखा जा सकता है। भारत में हर एक राज्य में विभिन्न तरह का कल्चर है और सभी लोग अपने कल्चर को किसी ना किसी रूप में ज़िंदा रखते है। जैसे की राजस्थान का पुष्कर मेला ये मेला अपने आप में ही सबसे अनोखा है क्योकि यहां पर ऊंटो की रेस होती है। इसी तरह पुरे भारत में तरीके तरीके के मेले लगता है आज हम बात करेंगे मड़ई त्यौहार (Madai festival) के बारे में जो की छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है।

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मड़ई त्यौहार कैसे मानते है

त्यौहार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हमेशा एक बड़े मैदान में मनाया जाता है, जहां एक बड़ी सभा होना संभव है। आखिरकार यह मड़ई त्यौहार (Madai festival) के अवसर पर है कि दूर-दूर से रिश्तेदार हंसने, मीरा बनाने और खुशियां सांझा करने आते हैं। ढोल और घंटियों की थाप के बीच पूरे गांव में बकरे को ले जाया जाता है।  आदिवासी देवताओं के सम्मान में बकरे की बलि देते है। यह अनुष्ठान एक पवित्र वृक्ष के नीचे होता है। स्थानीय देवताओं का एक जुलूस जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी लोग भाग लेते हैं, उत्सव का दीक्षा समारोह होता है। वे श्रद्धापूर्वक अपनी प्रार्थना करते हैं और फिर सभी मौज-मस्ती शुरू करते हैं।

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मड़ई त्यौहार क्यों मानते है

मड़ई त्यौहार (Madai festival) छत्तीसगढ़ का एक बहुत ही मशहूर और लोकप्रिय त्यौहार है। ये त्यौहार राज्य की समृद्ध संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है। मडई महोत्सव गोंड जनजाति के लोगों द्वारा बहुत उत्साह और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिसंबर से मार्च के महीने में मनाया जाता है और राज्य के लोगो द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमा जाता है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोग एक खुले मैदान में एक जुलूस का शुभारंभ करते हैं जहां बड़ी संख्या में भक्त और सामान्य पर्यटक अनुष्ठान देखने जाते हैं।

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छत्तीसगढ़ में मड़ई त्यौहार मनाने का समय

मड़ई त्यौहार (Madai festival) अलग-अलग समय पर अलग-अलग स्थानों पर मनाया जाता है। बस्तर के लोग मड़ई को दिसंबर के महीने में मनाते हैं और यहां आप मड़ई त्यौहार (Madai festival) के समारोहों को देख सकते हैं। कांकेर, चारामा और कुर्ना के लोग इसे अगले महीने जनवरी में मनाते हैं। फरवरी के महीने की शुरुआत में यह त्यौहार एक बार फिर बस्तर जिले में मनाया जाता है। मार्च के महीने में आखिरी बार यह कोंडागांव, केशकाल और भोपालपट्टनम में मनाया जाता है।

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मड़ई त्यौहार में रात खुशगवार

बड़े मैदानों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। हवा आदिवासी संगीत की आवाज़ से गूंजती है और उनमें से कई लय की धुन पर नृत्य करती हैं। रात में पुरुष नशीले पेय का सेवन करते हैं और आदिवासी धुनों पर नृत्य करते हैं। वास्तव में माहौल बहुत खुशगवार है। मड़ई त्यौहार (Madai festival) के अवसर पर बड़ी संख्या में दुकानें और भोजनालय स्थापित किए जाते हैं, ताकि लोग आराम से खाना खा सके। आदिवासियों के शिल्प कौशल के उल्लेखनीय उदहारण भी यहां देखने को मिलते है। 

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12 November, 2019

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Rachna