Khambhalida Caves Rajkot: राजकोट के खंभालिदा की गुफा
श्रद्धा के भाव

Khambhalida Caves Rajkot: राजकोट के खंभालिदा की गुफा

सौराष्ट्र का एक प्रतिष्ठित क्षेत्र राजकोट भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। गुजरात के दूसरा प्रगतिशील शहरों होने के नाते, राजकोट के दर्शनीय स्थल और राजकोट के पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए जाना जाता है। हमारे देश में कई तरह की गुफाएं है। खंभालिदा (Khambhalida Caves) उन्हीं गुफाओं की तरह है लेकिन इस गुफा की वास्‍तुकला किसी को भी आश्‍चर्यचकित कर देती है। गुफाएं (Khambhalida Caves) वसंत के तट पर छोटे पहाड़ियों के पैर पर स्थित हैं।

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इन गुफाओं (Khambhalida Caves) का रखरखाव गुजरात राज्य के पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाता है। यह गुफा 4 – 5 वीं शताब्‍दी में बनाई गई थी।

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यहां हैं पूरे कद की विशाल शिल्प

जयाबेन फाउंडेशन-राजकोट के प्रबंध निदेशक परेशभाई पंड्या के अनुसार गुजरात में इस प्रकार की पूरे कद की विशाल शिल्प वाली शायह यह पहली गुफा है। इस गुफा में बौद्धधर्मियों के तपस्या-प्रार्थना स्थल हैं।गुफा के प्रवेश द्वार पर दोनों किनारों पर बोधिसत्व हैं, जिनके मस्तक पर मुकुट व कान में कुंडल और कमरबंद दर्शाए गए हैं और ऊपर यक्ष-यक्षिणियों की शिल्प हैं। इसके अलावा, उपासक एवं वादकों के शिल्प हैं। अन्य गुफाओं के प्रवेश भाग पर व नीचे के भाग भी सुन्दर शिल्पों एवं फूल-बेल की नक्काशी से अलंकित हैं।

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दायीं ओर, एक अशोक जैसे वृक्ष के नीचे लोगो के साथ वज्रपाणि की मूर्ति है, और बायीं ओर, एक महिला और पांच परिचारिकाओं के साथ अशोक जैसे वृक्ष के नीचे पद्मपाणि है। पद्मपाणि की बाईं ओर हाथ में एक टोकरी लिए यक्ष जैसे दिखने वाले एक बौने की मूर्ति है।दायीं ओर की आकृति संभवत वज्रपाणी के समान अशोक के समान वृक्ष के नीचे है। जूनागढ़ की उपरकोट गुफाओं में मादा की व्यापक बेल्ट आंकड़े के समान हैं।

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वे स्वर्गीय कुषाण-क्षात्र काल की मूर्तियों के साथ-साथ कहीं न कहीं आंध्र के कुछ प्रकारों की तुलना करते हैं। कहा जाता है कि भिक्षुओं ने ध्यान करने के लिए इसका इस्तेमाल किया होगा।। इन गुफाओं की खोज 1958 में प्रमुख पुरातत्वविद् पी.पी.पंड्या ने की थी। इन गुफाओं का रखरखाव अब गुजरात पुरातत्व विभाग के हाथों में है। बाईं ओर एक और गुफ़ा है जो गहरी और विशाल है तथा सामने की तरफ से खुली है। कहा जाता है कि भिक्षुओं ने ध्यान करने के लिए इसका इस्तेमाल किया होगा।

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1958 में की थी खोज

इस एतिहासिक बौद्ध गुफा की खोज राजकोट के पुरातत्ववेत्ता पी. पी. पांड्या ने 1958 में की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने इसे सुरक्षित स्मारकों में शामिल किया। फिलहाल यह गुफा पुरातत्व विभाग की देखरेख में है, लेकिन देखरेख व प्रचार के अभाव में इसकी हालत जर्जर हो रही है। करीब 1800 वर्ष प्राचीन यह शिल्प कला आज जर्जर हो रही है।

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प्रचार के लिए लगाए हाईवे पर बोर्ड

अद्भुत शिल्प कला की प्राचीन विरासत को बनाए रखने की आवश्यकता है। यह गुफा भले ही पुरातत्व विभाग की देखरेख में हैं, लेकिन संबंधित समय में देखरेख व प्रचार के अभाव में इसकी हालत जर्जर हो रही है। ऐसे में वर्ष 2003 से इस गुफा के प्रचार के लिए हाई-वे पर साइन बोर्ड, पोस्टर, बैनर आदि लगाकर पर्यटकों को गुफा का मार्ग बताने का प्रयास किया जा रहा है। इस गुफा को मरम्मत की आवश्यकता है।

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राजकोट. जिले की गोंडल तहसील में खंभालिडा गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित बौद्ध गुफा शिल्प कला की उत्कृष्ट विरासत है। राजकोट से 66 किलोमीटर दूर स्थित यह गुफा तीसरी सदी के अंत में या चौथी सदी के प्रारंभ में अस्तित्व में आने का उल्लेख है।

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11 October, 2019

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Ashish Jain