जानिए बिहार के गया में कैसे की जाती है सीधा पितृपक्ष की प्राप्ति
श्रद्धा के भाव

जानिए बिहार के गया में कैसे की जाती है सीधा पितृपक्ष की प्राप्ति

“गया” जो बिहार का सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल माना जाता हैं। कहा जाता है कि प्राचीन व पौराणिक समय से वहां पितृ पक्ष की पूजा की जाती हैं। गया में स्थित जो सुर सरिता गंगा नदी बहती हैं उधर पितरों के लिए तर्पण और मृत आत्माओं की शांति के लिए पूजा पाठ की जाती है। गया में जाकर अगर कोई भी मृत आत्मा का तर्पण या पिंड दान करता है। तो कहा जाता है आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। लेकिन गया अक्सर लोग अपने परिजनों की आत्मशांति को पूजा कराने भी आते हैं।

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शास्त्रों में कहा गया है “प्रयाग मुुंडे गया पिंडे”

शास्त्रों के अनुसार कहा गया कि प्रयागराज “इलाहाबाद” में मुंडन और गया में पिंडदान करना बहुत ही फायदेमंद साबित होता हैं। यह दोनों जगह सबसे ज्यादा पवित्र मानी जाती हैं। जहां पर पूजा पाठ से जुड़े अक्सर यह काम किये जाते हैं। भगवान विष्णु खुद साक्षात प्राणी को मुक्ति देने के लिए गया में विराजमान होते हैं इसलिए गया में पिंडदान की प्राप्ति बहुत ज्यादा अहम मानी जाती हैं।

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भगवान विष्णु ने खुद कहा था कि गया में किया हुआ यज्ञ, श्राद्ध, पिंडदान तथा स्नानादि सीधा मृत आत्माओं को स्वर्गलोक या ब्रह्मलोक ले जाएगा। पुराणों के अनुसार कहा गया है कि गया बिहार में किया हुआ तीर्थ पितरों को काफी प्रिय माना जाता हैं। जो लोग तीर्थ के लिए आते है और रात गया में ही बिताते है उनको कहा जाता है कि उनकी सात पीढ़ियों का उद्धार हो जाता हैं। गया की गंगा नदी में स्नान करके ,मनुष्य सारे पापों से मुक्त हो जाते हैं। लेकिन मकर संक्रांति, चंद्रग्रहण तथा सूर्यग्रहण के दिन गया जाकर पिंडदान करना अशुभ माना जाता हैं।

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16 September, 2019

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