गणपति बाप्पा मोरया: मिलिए 70 किलो सोने से सजे बप्पा से, सुरक्षा में लगे हैं ड्रोन
श्रद्धा के भाव

गणपति बाप्पा मोरया: मिलिए 70 किलो सोने से सजे बप्पा से, सुरक्षा में लगे हैं ड्रोन

नई दिल्ली: 13 सितंबर यानी आज पूरा देश गणेश चतुर्थी मना रहा है। आज हर घर मंदिरों में भगवान गणेश की स्थापना हो चुकी है। अगले 10 दिनों तक भगवान गणेश की पूजा होगी, 23 सितंबर को इन मूर्तियों को विसर्जित किया जाएगा। भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्यकाल में हुआ था। हर दिन इसी दिन गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। देश में हर जगह गणेश पंडाल लगाए गए हैं। चारों ओर गणपति बाप्पा मोरया की गूंज है।

साल भर के बाद बप्पा वापस आए हैं और लोगों ने उनके स्वागत में मोदक-फूलों से लेकर सोना-चांदी तक लगा दिया है। मुंबई के सायन पूर्व में जीएसबी सेवामंडल ने भगवान गणेश को सोने से सजाया है। जीएसबी सेवामंडल में प्रतिस्थापित गणपति की प्रतिमा को 70 किलोग्राम 23 कैरेट सोने से सजाया गया है। गणपति की सुरक्षा में भी कोई कमी नहीं रखी गई है। सुरक्षा की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सावधानी के लिए भक्तों और भगवान की मूर्ति के बीच दूरी बनाई गई है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। भीड़ से बचने के लिए बैरिगेट लगाए गए हैं। ताकी लोग लाइन में लगकर अच्छे से दर्शन कर सकें। भगवान गजानन के दर्शन के लिए मुंबई के लालबाग राजा, नागपुर के टेकड़ी गणेश मंदिर और पुणे के दडगूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। सड़कों पर रंग और संगीत में डूबे भक्त जोश के साथ बप्पा का स्वागत कर रहे हैं। वहीं, प्रशासन भी सुरक्षा को लेकर मुस्तैद है। महाराष्ट्र में 50,000 से भी अधिक पुलिस अफसर तैनात किए गए हैं।

आखिर क्यों मनाया जाता है गणेश चतुर्थी ?

दरअसल, एक दिन स्नान करने के लिए भगवान शंकर कैलाश पर्वत से भोगावती जगह गए थे। कहा जाता है कि उनके जाने के बाद मां पार्वती ने घर में स्नान करते समय अपने शरीर के मैल से एक पुतला बनाया था। उस पुतले को मां पार्वती ने सतीव कर उसका नाम गणेश रखा। मां पार्वती ने गणेश से मुद्गर लेकर दरवाजे पर पहरा देने के लिए कहा। पार्वती जी ने कहा था कि जब तक मैं स्नान करके बाहर ना आ जाऊं किसी को भी भीतर मत आने देना।

भोगावती में स्नान करने के बाद जब भगवान शिव जी वापस घर आए तो वे घर के अंदर जाने लगे, लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें वहीं रोक दिया। जब भगवान शंकर ने कहा कि आखिर वो ऐसा क्यों करने रहे हैं, तो गणेश ने जवाब में कहा कि ये मां पार्वती की आज्ञा है और वो आज्ञा का पालन कर रहे हैं। इसे शिवजी ने अपना अपमान समझा और भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया और घर के अंदर चले गए।

शिवजी जब अंदर पहुंचे वे बहुत क्रोधित थे। पार्वती ने सोचा कि भोजन में देरी के कारण भगवान शंकर क्रुद्ध हैं। इसलिए उन्होंने तुरंत 2 थालियों में भोजन परोसकर शिवजी को बुलाया और भोजन करने का आग्रह किया। दूसरी थाली देखकर शिवजी ने पार्वती से पूछा यह दूसरी थाली किस के लिए लगाई है? इस पर पार्वती जी ने कहा कि पुत्र गणेश के लिए, जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है। यह सुनकर भगवान शिव चौंक गए और उन्होंने पार्वती जी को बताया कि जो बालक बाहर पहरा दे रहा था, मैने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया है।

यह सुनकर पार्वती जी बहुत दुखी हुईं और विलाप करने लगीं। उन्होंने भगवान शिव से पुत्र को दोबारा जीवित करने का आग्रह किया। तब पार्वती जी को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर उस बालक के धड़ से जोड़ दिया। पुत्र गणेश को दोबारा जीवित पाकर पार्वती जी बहुत प्रसन्न हुईं। आपको बता दें ये घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को घटित हुई थी। तब से इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 13 सितंबर को है।

13 September, 2018

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