Budhanilkantha Temple- इकलौता ऐसा मंदिर जहां पर लेटे हुए हैं नारायण जी !
श्रद्धा के भाव

Budhanilkantha Temple- इकलौता ऐसा मंदिर जहां पर लेटे हुए हैं नारायण जी !

हमने कई मंदिरों के बारे में पढ़ा और सुना है। भारत में ऐसे कई मंदिर है जो कि हमारी सोच से अलग है, इन मंदिरों को देखने के बाद ये लगता है कि ऐसी नक्काशी और ऐसी मूर्तियां अद्भुत है। अगर हम साउथ की तरफ जाते हैं तो हमे बहुत ही अलग अलग और सुन्दर मंदिर देखने को मिलते है। आज हम भी एक ऐसे मंदिर की बात करेंगे जो कि बहुत ही अद्भुत है, जिसमें भगवन शिव और नारायण के अद्भुत रूप को देखने को मिलता है। आज हम बात कर रहे हैं बुढानिलकण्ठ मन्दिर की… सुनने में ऐसा लगता है कि ये शिव का मंदिर है लेकिन ये भगवन नारायण का मंदिर है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान के रूप में माना जाता है, लेकिन बुद्ध धर्म के श्रद्धालुओं द्वारा ये वंदनीय है।

Source-google

बुढानिलकण्ठ मन्दिर का इतिहास

बुढानिलकण्ठ मन्दिर(Budhanilkantha Temple) भगवन शिव के नीलकंठेश्वर अवतार से सम्बंधित नारायण का मंदिर है। ये मंदिर नेपाल के काठमांडू के उतरी छोर पर शिवपूरी पहाड़ी पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि जिस वक़्त समुंद्र मंथन हो रहा था उस वक़्त भगवन शिव ने सारा विष पी लिया था लेकिन वो विष को बरदाश नहीं कर पा रहे थे तो वो इस विष के साथ गोसाइकुंड में छलांग लगा दी जिससे इस सरोवर की धारा बनी। मूर्ति को सातवीं शताब्दी के सम्राट विष्णु गुप्ता के शासनकाल के दौरान काठमांडू में लाया गया था। ये भी कहा जाता है एक किसान एक दिन अपने खेत में काम कर रहा था जब उसकी हल ज़मीन से टकराकर पत्थर से लग गया और उसमें से खून बहने लगा। विशाल शिलाखंड के चारों ओर खुदाई करने पर, उन्होंने विष्णु की उस भव्य मूर्ति का पता लगाया, जो जमीन में दबी हुई थी।

Source-google

बुढानिलकण्ठ मन्दिर की प्रतिमा

बुढानिलकण्ठ मन्दिर(Budhanilkantha Temple) के नारायण की प्रतिमा करीब 1400 वर्ष पुराणी मूर्ति है। ये मूर्ति 5 मीटर ऊंची (लगभग 16.4 फीट) और 13 मीटर (42.65 फीट) लंबी है। प्रतिमा एक काले पत्थर पर बनाई गयी है जो काले बेसाल्ट से खुदी हुई है। इस मूर्ति के चारों तरफ ब्रह्माण्डीय सर्प(Cosmic Snake) को दिखाया गया है ये मूर्ति पानी के बीच में तैरती हुई मूर्ति है। उन्होंने अपने चार हाथों में सुदर्शन चक्र, क्लब, एक शंख और एक रत्न धारण किया हुआ है।

Source-google

कौन से होते है समारोह

बुढानिलकण्ठ मन्दिर(Budhanilkantha Temple) वह स्थान बन गया है जहां कार्तिक में हरिभोंदिनी एकादशी मेला(Haribhondini Ekadashi Fair) हिंदू महीने के 11 वें दिन अक्टूबर-नवंबर को लगता है। हजारों तीर्थयात्रियों इसमें भाग लेते है। यह भगवान विष्णु की लंबी नींद के जागरण के उपलक्ष्य में मंदिर का प्रमुख त्योहार है। एक पौराणिक कथा में कहा गया है कि राजा प्रताप मल्ल (1641-1674) के लिए भविष्यवाणीकी गई थी कि अगर वे बुढानिलकण्ठ मन्दिर(Budhanilkantha Temple) गए तो वे मर जाएंगे। राजा प्रताप मल्ल के बाद के नेपाली नरेशों ने भविष्यवाणी के डर से कभी मंदिर का दौरा नहीं किया।

Source-google
5 November, 2019

About Author

Rachna