दशहरा पर होती है अश्न पूजा
श्रद्धा के भाव

दशहरा पर होती है अश्न पूजा

विजयदशमी यानी दशहरा इस दिन राम के द्वारा रावण का अंत हुआ था जिसको नाटकीय रूप से लोग हर साल मानते रहे हैं और हर साल रामलीला की जाती है। नवरात्रि समाप्त होने के अगले दिन दशहरा मनाया जाता है, जिस दिन भगवान राम की पूजा करने के बाद रावण का पुतला जला दिया जाता है। समाज इसको बुराई के अंत के रूप में अपनाता है और इसके द्वारा अच्छाई की जीत को महत्व देता है। रावण की पूजा इसलिए की जाती हैं क्योंकि रावण एक महान पंडित भी था जिसके ऊपर शिव जी का आशीर्वाद भी था। बता दें कि इसी दिन अश्व पूजन का भी एक महत्व होता है।

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दशहरे पर होता है अश्व पूजा

दशहरे पर अश्व पूजन भी होता है। नवरात्रि खत्म होने के बाद अश्व पूजन किया जाता है। अश्व पूजन ज्यादातर राजस्थान में किया जाता है यहां पर अश्व पूजन की प्रथा बरसों से चली आ रही है। मेवाड़ रियासत उदयपुर में यह पूजन काफी प्रसिद्ध है।

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कैसे किया जाता है ये पूजन

यह पूजन ढोल-नगाड़ों के साथ किया जाता है। जिसमें घोड़े यानी अश्व की पूजा होती है। राजस्थान के अश्व पूजन में दूर दूर के लोगों को आमंत्रित किया जाता है। साथ ही अश्व पूजन में राजस्थानी रागिनी और राजपुताना कल्चर भी देखने को मिलता है। इसमें अश्व को बहुमूल्य कपड़ों और आभूषणों के द्वारा पूजा के लिए तैयार किया जाता है। यह पूजा पंडित द्वारा करवाई जाती है। अश्व पूजन में अश्व के लिए फल ,फूल और भोजन के साथ और भी वस्तुएं रखी जाती हैं । इसके  बाद अश्व  पूजन अनुष्ठान शुरू किया जाता है। समस्त पूजन के बाद भोजन का आयोजन रखा गया होता है जिसमे राजस्थानी राजपूत अपनी फैमिली के साथ भोजन करते हैं।

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7 October, 2019

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Ashish Jain