अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस: महिला हिंसा के ये आंकडे देख आपका सिर शर्म से झुक जाएगा
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अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस: महिला हिंसा के ये आंकडे देख आपका सिर शर्म से झुक जाएगा

नई दिल्ली। आधी आबादी यानी महिलाएं… हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा, जिनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। फिर भी उनपर हर दिन न जाने कितने अत्याचार होते हैं, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है। महिलाओं के प्रति हिंसा खत्म करने के लिए पूरी दुनिया में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जा रहा है।

क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस

भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले कम नहीं हो रहे हैं। घर हो या ऑफिस, हर जगह महिलाओं के लिए दहलीज तय कर दी गई है। उन्हें समाज ने ऐसे बंधनों में बांध दिया गया है, जिसे न चाहते हुए भी निभाना उनकी मजबूरी बन गई है। घरेलू हिंसा, के साथ-साथ महिलाओं को बाहर भी कई बार शारीरिक और मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ती हैं। इसी भेदभाव को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 2009 में हर महीने की 25 तारीख को ‘Orange Day’ और 25 नवंबर का दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप में घोषित किया था। इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस की थीम ‘Orange the World: #HearMeToo’ रखी गई है।

साभार – गूगल

अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस का इतिहास

25 नवंबर 1960 के दिन डोमिनिकन शासन के राजनैतिक कार्यकर्ता राफेल ट्रुजिलो के आदेश पर 3 बहनों – पैट्रिया मर्सिडीज मिराबैल, मारिया अर्जेंटीना मिनेर्वा मिराबैल तथा एंटोनिया मारिया टेरेसा मिराबैल की बेहद क्रूर तरीके से हत्या कर दी गई थी। दरअसल, इन तीनों बहनों ने ट्रुजिलो की तानाशाही का विरोध किया था। 1981 से तीनों बहनों की मौत के बाद हर साल महिला अधिकारों के समर्थक इस दिन को श्रृद्धांजलि दिवस के रूप में मनाने लगे। 17 नवंबर 1999 को संयुक्त राष्ट्र ने 25 नवंबर का दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप में घोषित कर दिया। वर्ष 2000 से हर साल  25 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जाने लगा।

मामला है बेहद गंभीर

महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हिंसा मौजदूा समय में लगातार बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं, वो दिल दहलाने वाले हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, हर 3 में से एक महिला अपने पूरे जीवनकाल में कभी न कभी यौन या फिर मानसिक हिंसा की शिकार हुई है। इसी तरह हर साल सड़क हादसों और मलेरिया की वजह से जितनी जान जाती हैं, उतनी ही महिलाएं पूरे विश्व में हिंसा की शिकार होती हैं।

साभार – गूगल

भारत में ये क्या हो रहा है?

भारत को दुनिया उसकी संस्कृति और शालीनता के कारण पहचानती है। लेकिन, जिस भारत में कन्या को देवी के रूप में पूजा जाता है, वहीं उनके खिलाफ अपराध के आंकड़े गंभीर स्थिति में पहुंच चुके हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा 2007 से लेकर 2016 के बीच 10 सालों के जो आंकड़े जारी किए गए है, उन्हें देखकर पूरे देश का सिर शर्म से झुक गया है।

एनसीआरबी यानि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा 2007-2016 के बीच महिला अपराध संबंधी जारी आंकड़े के मुताबिक, भारत में महिलाओं के खिलाफ क्राइम के मामले 83 प्रतिशत बढ़े हैं। शील भंग करने के प्रयास का मामला 119 प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं, बलात्कार के मामलों की संख्या भी 83 प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा पारिवारिक हिंसा और उत्पीड़न के मामले भी 45 प्रतिशत बढ़े हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में महिलाओं की स्थिति किस हद तक खराब हो चुकी है।

खतरे की घंटे बजाते ये आंकड़े

  • पूरे विश्व की हर 3 में 1 महिला यौन या मानसिक उत्पीड़न की शिकार है। यौन हिंसा के ज्यादातर मामलों में पार्टनर ही दोषी पाया गया।
  • दुनिया में सिर्फ 52 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं आतंरिक संबंध, गर्भ निरोध और महिला स्वास्थ्य से जुड़े फैसले लेने में सक्षम हैं हैं।
  • विश्वभर में 75 करोड़ महिलाएं ऐसी है, जिनका विवाह 18 वर्ष की उम्र से पहले ही कर दिया गया। जबकि 20 करोड़ महिलाएं खतने का दर्द भी झेल चुकी हैं।
  • साल 2012 के दौरान विश्वभर में कुल जितनी महिलाओं की हत्या हुई, उनमें हर 2 महिला में से 1 महिला की हत्या उनके साथी या परिवार द्वारा की गई। जबकि, इसी वर्ष 20 में से 1 पुरुष की हत्या के पीछे साथी या परिवार का हाथ था।
  • मानव तस्करी की शिकार 71% महिलाएं हैं। इन्हीं महिलाओं में हर 4 में से 3 महिला या लड़की मानव तस्करी के कारण यौन उत्पीड़न से भी गुजर चुकी है।
  • सड़क हादसों और मलेरिया की वजह से हर साल कुल जितनी जानें जाती हैं, विश्वभर में उससे ज्यादा महिलाएं किसी न किसी तरह हिंसा की शिकार होती हैं।
सभी आंकड़े संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट से प्राप्त किए गए हैं
25 November, 2018

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