समलैंगिकता के खिलाफ उतरे मुस्लिम धर्मगुरू, कहा- अगर पुरुष ही महिलाओं का काम करेंगे.. तो पुरुष का क्या काम ?
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समलैंगिकता के खिलाफ उतरे मुस्लिम धर्मगुरू, कहा- अगर पुरुष ही महिलाओं का काम करेंगे.. तो पुरुष का क्या काम ?

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने धारा-377 को खत्म करने का जो ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, उससे देशभर में समलैंगिक जश्न मना रहे हैं। कई कट्टर हिंदू औऱ मुस्लिम लोगों को ये फैसला रास नहीं आया है। कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम धर्मगुरूओं ने इसका विरोध किया है। मुस्लिम धर्मगुरु ने समलैंगिक संबंधों को धर्म और मानवता के खिलाफ बताया है।

जमियत उलमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि कोर्ट का ये फैसला देश में यौन अपराध को बढ़ाने में मदद करेगा। कोर्ट ने साल 2013 में इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे अपराध ठहराया होता तो अच्छा होता। महमूद मदनी ने कहा है कि समलैंगिक संबंध प्रकृति के नियमों के खिलाफ है।

वहीं शिया धर्मगुरु ने कहा कि अगर आदमी किसी आदत का शिकार हो जाता है और वह उसकी जरूरत बन जाती है तो यह जरूरी नहीं है कि इसे पूरी मानवता के लिए जरूरी कर दिया जाए। अगर पुरुष महिलाओं का काम करेंगे तो महिलाएं क्या करेंगी। जबतक भारतीय संस्कृति जिंदा है समलैंगिकता ना सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि जघन्य अपराध है।

आपको बता दें कि साल 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध करार दिया था। गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धारा 377 को खत्म कर दिया था। कोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से दो लोगों के बीच बनाए गए संबंध अपराध नहीं है।

7 September, 2018

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