‘Ranjan Gogoi’: के एतिहासिक फैसले, जिनसे डाला कई लोगों के मुंह पर ताला!
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‘Ranjan Gogoi’: के एतिहासिक फैसले, जिनसे डाला कई लोगों के मुंह पर ताला!

Ranjan Gogoi भारत के ऐसे चीफ जस्टिस रहे हैं। जिन्होंने कई सालों से अटके हुए मुद्दों पर सुनवाई की और उसका फैसला पूरी देश की जनता के सामने लाए। रंजन गोगोई ने भारत के 46वें चीफ जस्टिस के रूप में कार्य किया। इन्होंने 3 अक्टूबर 2018 में चीफ जस्टिस (Chief Justice of India) का पद संभाला। जिसके बाद 17 नवंबर 2019 में अपने पद से रिटायरमेंट ले रहे हैं। रंजन गोगोई का कार्यकाल लगभग 13 महीने का रहा हैं। जिसमें इन्होनें उन केस पर सुनवाई की जिसकी वजह से कुछ लोग खुश हुए तो वही कुछ नाखुश नज़र आए।

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Ranjan Gogoi के जजमेंट

रंजन गोगोई ने अपने रिटारयमेंट से पहले एक ऐसे केस पर अपना फैसला दिया। जिसको ऐतिहासिक फैसला कहा गया है। रंजन गोगोई में 70 साल से चल रहे अयोध्या मामले पर 9 नवंबर को पांच जजों की पीठ के साथ सुनवाई की और उसका पूर्ण फैसला भी देश के सामने आ गया है।रंजन गोगोई में अपने कार्यकाल में कई बड़े फैसले लिए हैं। आइए एक नज़र डालते है उनके फैसलों पर।

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अयोध्या मामला (Ayodhya Case)

जैसा कि आप सभी को पता है कि ये केस बेहद पुराना और पेचीदा था। जितने भी शख्स चीफ जस्टिस की कुर्सी पर बैठे थे। कोई भी इस मामले को नहीं सुलझा पाया। लेकिन अपने साढ़े 13 महीने के कार्यकाल में रंजन गोगोई ने 70 साल से चल रहे इस पर अपना फैसला देकर इस केस को खत्म कर दिया है।

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सबरीमाला मंदिर (Sabrimala Temple)

सबरीमाला मंदिर केरल का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। लेकिन इस मंदिर में महिलाओं का जाना सख्त माना था। ये केस कोर्ट में काफी समय से फसा हुआ था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस केस पर पांच जजों की पीठ के साथ पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की। साथ ही मामले को सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ के पास भी भेजा गया था। जिसके बाद साल 2018 में सुप्रीमकोर्ट ने अपना फैसला दिया कि केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश जारी रहेगा।

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RTI (Right to Information Act)

CJI रंजन गोगोई ने चीफ जस्टिस के ऑफिस को RTI के दायरे में आने को लेकर फैसला सुनाया। इसमें कोर्ट ने कहा कि चीफ जस्टिस का ऑफिस भी पब्लिक अथॉरिटी है। जिसके तहत RTI चीफ जस्टिस के ऑफिस से कोई भी जानकारी मांग सकता है। इससे पहले RTI चीफ जस्टिस के ऑफिस से कोई भी इनफार्मेशन नहीं ले सकता था।

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पोस्टर पर नेताओं की पबंदी

CJI और पी. सी. घोष की पीठ ने सरकारी विज्ञापनों में नेताओं की तस्वीर लगाने पर पाबंदी लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बताया कि सरकारी विज्ञापन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस, संबंधित विभाग के केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, संबंधित विभाग के मंत्री की फोटो लगा सकते हैं।

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7 भाषाओं में आएगा फैसला

सुप्रीमकोर्ट के फैसले अब 7 भाषाओं में प्रकाशित होंगे ये फैसला भी CJI रंजन गोगोई ने ही किया है। इससे पहले तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले सिर्फ अंग्रेजी में ही प्रकाशित होते थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले अंग्रेजी और हिंदी समेत 7 भाषाओं में आएंगे। कई बार किसी मामले के पक्षकार अंग्रेजी भाषा को समझ नहीं पाते थे और उनकी मांग होती थी कि उनको उस भाषा में फैसले की कॉपी दी जाए।

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राफेल केस (Rafale Case)

राफेल एक ऐसा मामला रहा है जो काफी समय से गरमाया हुआ था। इस मामले को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर राफेल विमान सौदे की प्रक्रिया और दामों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे। जिसके बाद 14 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कमजोर दलीलों के चलते याचिकाओं का खारिज कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme court verdict on Rafale) ने कहा कि उन्हें नहीं लगता हैै कि इस मामले में किसी FIR या जांच किए जाने की जरुरत है।

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16 November, 2019

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