राफेल मुद्दे को लेकर PM पर राहुल का हमला, कहा- मोदी जी ने डील में सौदेबाजी की

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे पास आ रहा है ।। वैसे ही नेताओं की बयानबाजी ने भी तेजी पकड़ ली है। पिछले कुछ समय से कांग्रेस राफेल मुद्दे को लेकर बीजेपी को जमकर घेर रही। राफेल डील को लेकर देश में जारी विवाद अभी थमा नहीं है। राफेल डील पर एक अंग्रेजी अखबार के खुलासे के बाद बीजेपी की परेशानियां साफ बढ़ती नजर आ रही है।

वहीं दूसरी ओर इस खुलासे को कांग्रेस हथियार के रूप में इस्तेमाल करने लगी है। शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को जमकर घेरा। अंग्रेजी अखबार का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे का विरोध किया था। राहुल ने कहा कि पीएम ने सीधे तौर पर डील में हस्तक्षेप किया था। मोदी ने भारतीय वायुसेना के 30 हजार करोड़ का नुकसान कराया। पीएम ने चोरी कर पैसे अनिल अंबानी को दिए। उन्होंने एचएएल की जगह अनिल अंबानी की कंपनी को डील दिलवाई।

राहुल गांधी ने आगे कहा कहा कि ये साबित हो गया कि चौकीदार चोर है। डील पर प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने झूठ बोला था। राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने झूठ बोला। ये रक्षा मंत्रालय और कॉरपोरेट के बीच की लड़ाई है वहीं रॉबर्ट वाड्रा पर पिछले 2 दिन से मनी लॉन्ड्रिंग पर प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों की पूछताछ और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के सवाल पर राहुल ने कहा कि जितनी मर्जी हो उतनी जांच कराइए, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री को राफेल मामले पर कुछ बोलना चाहिए।

आपको बता दें, अंग्रेजी अखबार The Hindu ने खुलासा किया है कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से की जा रही डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल का फायदा फ्रांस को मिला था। पीएमओ की इस दखल का रक्षा मंत्रालय ने विरोध भी किया था। अब इसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर इसमें हस्तक्षेप किया था।

अंग्रेजी अखबार का कहना है कि 7।87 बिलियन डॉलर के विवादित राफेल डील पर दोनों देशों की ओर से शीर्ष स्तर पर हो रही बातचीत में पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ का भारतीय रक्षा मंत्रालय ने जमकर विरोध किया था। पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ के कारण रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की टीम सौदे को लेकर बातचीत कमजोर पड़ गई। 24 नवंबर, 2015 को इसे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के संज्ञान में लाया गया।