राफेल पर राहुल के आरोपों का रक्षामंत्री ने दिया जवाब, लोकसभा में कहा- अखबार की खबर में सच्चाई नहीं

नई दिल्ली: राफेल मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। लोकसभा चुनाव के पास आते ही ये मुद्दा फिर से गर्माता जा रहा है। अंग्रेजी अखबार के खुलासे के बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जो आरोप लगाए हैं, उसका जवाब खुद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दिया है। लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगर अखबार सच को सामना लाना चाहता तो तब और आज के रक्षा मंत्री की बात को भी इसमें लाना चाहिए था।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि अखबार ने पूरी सच्चाई सामने नहीं रखी है।सदन में दिए अपने जवाब में मैंने सभी बिंदुओं के बारे में बताया है। एनएसी में सोनिया गांधी की दखल के बारे में पूरा देश जानता है। एक अखबार की कटिंग से क्या साबित करना चाहते हैं। राफेल पर हर सवाल का जवाब दिया जा चुका है और अब यह मुद्दा खत्म हो चुका है।

इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को जमकर घेरा। अंग्रेजी अखबार का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे का विरोध किया था। राहुल ने कहा कि पीएम ने सीधे तौर पर डील में हस्तक्षेप किया था। मोदी ने भारतीय वायुसेना के 30 हजार करोड़ का नुकसान कराया। पीएम ने चोरी कर पैसे अनिल अंबानी को दिए। उन्होंने एचएएल की जगह अनिल अंबानी की कंपनी को डील दिलवाई।

राहुल गांधी ने आगे कहा कहा कि ये साबित हो गया कि चौकीदार चोर है। डील पर प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने झूठ बोला था। राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने झूठ बोला। ये रक्षा मंत्रालय और कॉरपोरेट के बीच की लड़ाई है वहीं रॉबर्ट वाड्रा पर पिछले 2 दिन से मनी लॉन्ड्रिंग पर प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों की पूछताछ और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के सवाल पर राहुल ने कहा कि जितनी मर्जी हो उतनी जांच कराइए, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री को राफेल मामले पर कुछ बोलना चाहिए।

आपको बता दें, अंग्रेजी अखबार The Hindu ने खुलासा किया है कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से की जा रही डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल का फायदा फ्रांस को मिला था। पीएमओ की इस दखल का रक्षा मंत्रालय ने विरोध भी किया था। अब इसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर इसमें हस्तक्षेप किया था।

अंग्रेजी अखबार का कहना है कि 7.87 बिलियन डॉलर के विवादित राफेल डील पर दोनों देशों की ओर से शीर्ष स्तर पर हो रही बातचीत में पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ का भारतीय रक्षा मंत्रालय ने जमकर विरोध किया था। पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ के कारण रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की टीम सौदे को लेकर बातचीत कमजोर पड़ गई। 24 नवंबर, 2015 को इसे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के संज्ञान में लाया गया।