माल्या पर बीजेपी ही नहीं कांग्रेस भी रही थी मेहरबान, तभी आज आजाद घूम रहा था
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माल्या पर बीजेपी ही नहीं कांग्रेस भी रही थी मेहरबान, तभी आज आजाद घूम रहा था

नई दिल्ली: भारतीय उद्योगपतियों की सूची में सबसे ऊपर जिस शख्स का नाम आता था वो था विजय माल्या.. जी हां वही विजय माल्या जो आज भगोड़ों की लिस्ट में शामिल है। भारत में माल्या की साख साल 2012 में आर्थिक स्कैंडल के बाद पहले की तरह नहीं रह पाई। धीरे-धीरे माल्या के चमकते सितारे अचानक फीके पड़ने लगे। वजह थी बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये का कर्ज। जिसे लेकर आज भी बैंक माल्या को ढूंढ रहे हैं और वो आजाद परिंदा सा लंदन में उड़ रहा है। बता दें माल्या यूनाइटेड स्पिरिट लिमिटेड के चेयरमैन रह चुके हैं। जो की भारत की सबसे बड़ी शराब की कंपनी है। हालाकि मौजूदा समय में माल्या यूबी ग्रुप के चेयरमैन भी हैं।

माल्या को कैसे मिला करोड़ों का कर्ज ?

आपको बता दें कि आखिर माल्या ने अपने एयरलाइंस किंगफिशर की शुरूआत कैसे की। कैसे उसे पॉलिटीकल सपोर्ट के साथ-साथ कर्ज मिला। जानकारी के मुताबिक साल 2004 यूपीए सरकार के समय सबसे पहली बार सितंबर को विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर को एयरलाइंस शुरू करने के लिए लोन मिला। दूसरी बार ये लोन साल 2008 को मिला था। दोनों बार मिलाकर करीब 8040 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया, लेकिन एयरलाइंस फिर भी ना चल सकी। इसके पीछे कई कारण थे। साल 2009 में कंपनी को एनपीए यानी ‘नॉन परफॉर्मिंग असेट’ घोषित कर दिया गया। ‘नॉन परफॉर्मिंग असेट’ मतलब ऐसी कंपनी जिसको दिए गए कर्ज की उगाही मुश्किल थी। लेकिन एनपीए होने के बावजूद यूपीए-2 के समय 2010 में सारे कर्ज को दोबारा व्यवस्थित किया गया। लेकिन इसके बाद भी किंगफिशर के बुरे दिन दूर नहीं हुए।

तत्कालीन प्रधानमंत्री से कई बार माल्या ने की थी मुलाकात

साल 2011 में खुद विजय माल्या ने उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 4 अक्टूबर को पत्र लिखा और डूबती कंपनी को सहारा देने का जिक्र किया। जिसमें लिखा गया कि ‘8 सितंबर को मुझसे मिलने के लिए अपका शुक्रिया, मैंने आपको किंगफिशर एयरलाइंस की मुश्किलों के बारे में बताया है। मैंने आपको ये भी बताया कि SBI की अगुवाई में बैंकों के एक समूह के पास गया था, ताकि किंगफिशर एयरलाइंस को अतिरिक्त आर्थिक मदद मुहैया कराई जाए़।

आपको बता दें कांग्रेस की ओर से काफी दिक्कतों के बावजूद किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज को रिस्ट्रक्चर किया गया था। इसी दौरान 2010 में किंगफिशर की बजट एयरलाइंस बंद हो गई और बैंकों के समूह ने 2000 करोड़ रुपये के लोन को रिस्ट्रक्चर किया। मगर यह तमाम मदद किंगफिशर को नहीं बचा सकी। जिसका नतीजा ये हुआ दिसंबर 2012 में एयरलाइंस पूरी तरह से बंद हो गई। लेकिन अच्छी किस्मत के साथ पैदा हुए माल्या का राजनीतिक सितारा चमकता रहा। वे बीजेपी और जेडीएस की मदद से 2012 में दोबारा राज्यसभा में आए। इससे पहले 6 साल की राज्यसभा की पारी कांग्रेस और जेडीएस की मदद से खेल चुके थे। उनके सांसद रहते हुए उन पर हितों के टकराव का आरोप लगता रहा क्योंकि वे नागरिक उड्डयन संबंधी संसदीय समिति के सदस्य भी रहे।

साल 2014 में सरकार बदलने के बाद एनपीए का मुद्दा जोर शोर से उठा। सवाल उठा कि ऐसा आदमी जिसके ऊपर बैंकों का नौ हजार करोड़ रुपया बकाया है और जो अपने कर्मचारियों की डेढ़ साल की तनख्वाह खा गया वह आईपीएल में टीम कैसे खरीद रहा है और चार्टर विमानों में कैसे उड़ रहा है। माल्या एनपीए घोटालों के प्रतीक पुरुष बन गए। लेकिन हैरानी की बात तो ये थी कि किसी भी बैंक ने जांच एजेंसी से संपर्क करने की नहीं सोची।

5 से भी ज्यादा बार भारत आ चुका था माल्या

एयरलाइंस के बंद होने के 3 साल बाद यानी 29 जुलाई 2015 को सीबीआई ने सूत्रों से जानकारी के आधार पर केस दर्ज किया, फिर बैंकों से शिकायत दर्ज कराने को कहा। पहली बार 10 अक्टूबर 2015 को सीबीआई ने कई जगहों पर छापे मारे और 16 अक्टूबर को पहला सर्कुलर जारी हुआ। हिरासत के लिए लुक आउट नोटिस जारी किया गया। उस वक्त माल्या लंदन में था।

24 नवंबर को दूसरा सर्कुलर जारी किया गया जिसमें कहा गया था कि अगर वह भारत आए तो सीबीआई को सूचना दी जाए। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान माल्या आराम से भारत आता-जाता रहा। 24 नवंबर को ही भारत वापस आया और एक दिसंबर को दोबारा देश छोड़कर चला गया। 7 दिसंबर को वापसी हुई और 23 को फिर विदेश यात्रा पर निकल गया। इस बीच 9, 10 और 12 दिसंबर को माल्या से पूछताछ हुई। सीबीआई को भरोसा हुआ कि माल्या भागेगा नहीं। दो फरवरी 2016 को माल्या फिर भारत आया और 8 फरवरी को फिर विदेश के लिए रवाना हो गया। फरवरी में फिर भारत लौटा और उसके बाद संसद में नजर आया। उसी दौरान उसने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने की कोशिश की जिसे लेकर इन दिनों सियासत गर्म है।

इस बीच सवाल यह भी उठा कि क्या किसी ने माल्या को भागने में मदद की? क्या किसी ने माल्या को इशारा कर दिया था कि 17 बैंक सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर उसके देश छोड़कर जाने पर पाबंदी की बात करने वाले हैं? क्योंकि माल्या ने जेटली से 1 मार्च को संसद सत्र के दौरान मिलने की कोशिश की थी और उसके अगले ही दिन वह भारत छोड़कर भाग गया। माल्या की काली करतूतों की इस कहानी से ये तो साफ है कि कांग्रेस ने माल्या को जमकर कर्ज दिया, वहीं बीजेपी ने भी कभी माल्या से पूछताछ करने की नहीं सोची। यहां तक की शिकायत दर्ज होने के बाद भी माल्या भारत आता जाता रहा… हद तो तब हो गई जब वो वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने के एक दिन बाद देश से फुर्र हो गया और आजतक वापस नहीं आया।

15 September, 2018

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