Happy Birthday M. Bhaktavatsalam: इन्होंने तीनों भाषाओं के फॉर्मूले को समझाया
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Happy Birthday M. Bhaktavatsalam: इन्होंने तीनों भाषाओं के फॉर्मूले को समझाया

मिंजूर तमिलनाडु राज्य के एक वकील, नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। इन्होने 2 अक्टूबर 1963 से 6 मार्च 1967 तक मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। वे तमिलनाडु के अंतिम कांग्रेस मुख्यमंत्री और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले अंतिम थे। वह आराकोट मुदलियार समुदाय से है।

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मिंजूर भक्तवत्सलम का जीवन

भक्तवत्सलम का जन्म (M. Bhaktavatsalam Birthday) 9 अक्टूबर 1897 को मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था। उन्होने अपनी स्कूली शिक्षा मद्रास में पूरी की और मद्रास लॉ कॉलेज में एडमिशन लिया। साल 1923 में इन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय में वकील के रूप में अभ्यास शुरू किया। भक्तवत्सल की पत्नी का नाम मल्लिका था। वह कम उम्र से ही राजनीती और स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। ये नमक सत्याग्रह और भारत छोडो आंदोलन के दौरान जेल में बंद भी रहे।

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करियर की शुरुवात (M. Bhaktavatsalam Career)

M. Bhaktavatsalam Career: भक्तवत्सलम अपनी ग्रजुऐक्शन के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए, और साल 1922 में मद्रास में कांग्रेस समिति के सदस्य बने। साल 1926 में वे कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य बने। 40 साल में भक्तवत्सलम ने 1937 के चुनाव में तिरुवल्लुर सीट पर जीत हासिल की और मद्रास विधानसभा में प्रवेश किया। भक्तवत्सल ने राजाजी सरकार में स्थानीय स्व-शासन मंत्री के संसदीय सचिव के रूप में काम किया।

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 भक्तवत्सल 1946 में मद्रास विधानसभा चुनाव में खड़े हुए। उन्होंने रामास्वामी रेड्डियार कैबिनेट में लोक निर्माण और सूचना मंत्री के रूप में कार्य किया। साल 1957 में उन्होंने श्रीपेरंबुदूर सीट जीती और विधानसभा में प्रवेश किया। उन्हें कामराज के मंत्रिमंडल में ग्रह मंत्री नियक्त किया गया।

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कैसे बने मुख्यमंत्री

1962  में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीता और 25 वर्षों में पांचवी बार राज्य में सरकार बनाई। श्रीपेरंबुदूर सीट को फिर से जीतते हुए भक्तवत्सल ने गाँधी जयंती के दिन 1963 को विधानसभा में प्रवेश किया। जब कामराज ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया तब भक्तवत्सलने मद्रास के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला। ये कांग्रेस से मद्रास के अंतिम मुख्यमंत्री हैं।

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मुख्यमंत्री के रूप में भक्तवत्सल के कार्यकाल में मद्रास राज्य में हिंदी विरोधी आंदोलन हुए। भक्तवत्सल ने हिंदी को अनिवार्य भाषा के रूप में  पेश करने के केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया और 7 मार्च 1964 को, मद्रास विधानसभा के एक सत्र में इन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और तमिल तीनो भाषाओं के फॉर्मूले को लागू करने की सिफारिश की।

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भक्तवत्सल की किताबें(M.Bhaktavatsalam Books)

  • भक्तवत्सल ने दो किताबें लिखी हैं जिनके नाम
  • निरपेक्षता की हिंदी विरोधी नीति
  • पश्चिम एशिया: समस्याएं और समभावनाएं

जीवन का अंत

भक्तवत्सल का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनका मकबरा गुइंद्य में कामराज मकबरे के बगल में है।

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9 October, 2019

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Ashish Jain