जानिए क्यों मनाते हैं अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस
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जानिए क्यों मनाते हैं अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस

एक अक्टूबर एक ऐसा दिन है जिसका शायद हर कोई बेसब्री से इंतजार करता होगा क्योंकि इस तारीक से दिवाली की रोनक और छुट्टियों की उम्मीद होनी शुरु हो जाती है, तो वहीं एक अक्टूबर को एक ऐसे दिवस के रुप में मनाया जाता है, जिनके बिना हम सबका कोई बजूद ही नहीं होता, जी हां, आज अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस है। ये वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान हेतु मनाया जाता है।

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वहीं अगर हम समाज की बात करें तो युवा आज के समय में वरिष्ठ नागरिकों को कुछ हद तक नजरअंदाज़ करते हैं। उन्हें घर से बेघर कर देते हैं, ऐसे में अगर आप सोचें कि एक इंसान पूरी जिंदगी मेहनत करके घर बनाका है और उसके बच्चे उस बुजुर्ग इंसान को उसी के घर से बेघर कर देता है तो उस बुजुर्ग इंसान पर क्या बीतती होगी। वो बुजुर्ग कहां जाएगा, इन घटनाओं को कम करने के लिए एक अक्टूबर को वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाया जाता है। ताकि लोगों के बीच बुजुर्गों की इज्जत के प्रति जागरुक किया जा सके। और कोई भी बुजुर्ग वृद्धा आश्रम में न जाए।

अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान के लिए मनाया जाता है, ताकि हम उनका सम्मान, आदर, और प्रेम की भवना रख सकें।

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कैसे हुई इस दिवस की शुरुआत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पूरे विश्व में बुजुर्गों के प्रति हो रहे बुरे व्यवहार और अन्याय को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस की शुरुआत की गई। साथ ही लोगों को इस के प्रति जागरूक किया गया। 14 दिसंबर ,1990 को वरिष्ठ नागरिकों के हित में इस दिवस की स्थापना की गई। जिसे एक अक्टूबर को व्यापक स्तर पर शुरु किया गया था।

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वरिष्ठ नागरिक दिवस पर चलाए गए अभियान

‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ के बुजुर्गों की परेशानी को लेकर सबसे पहले अर्जेंटीना ने पुरे विश्व का ध्यान इसकी और आकर्षित किया था। इसी कड़ी में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 1982 में “वृद्धावस्था को सुखी बनाइए” नारा दिया था। जिसके तहत एक अभियान “सबके लिए स्वास्थ्य” शुरू किया गया था। संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के तहत एक अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस घोषित किया गया। जिससे पुरे विश्व भर में इसकी शुरुआत हुई।

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बूढ़ा होने पर आदमी को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां तक की एक बूढ़ा व्यक्ति ठीक से चल भी नहीं पाता है। ऐसे में कुछ लोग उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। जिसमें से कुछ बुजुर्ग जीवन जीने के लिए मंदिरों की सीढ़ियों पर भीख मांगते हुए दिखाई देते हैं तो कुछ वृद्धा आश्रम पहुंच जाते हैं। वैसे को हमारे मन में बुजुर्गों के प्रति सम्मान होगा चाहिए, लेकिन शर्मिंदा करने वाली बात ये है कि कुछ लोगों को ये सम्मान केवल सोशल मीडिया या फिर एक अक्टूबर को ही याद आता है। तो कृपया करके अपने घर के बड़ों की इज्जत करें, और आर्शीवाद पाएं।

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30 September, 2019

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Ashish Jain