‘Ranjan Gogoi’ का चीफ जस्टिस का सफर!
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‘Ranjan Gogoi’ का चीफ जस्टिस का सफर!

भारत की एक ऐसी शख्सियत जिसने कई सारे बड़े फैसले लिए हैं। जिन फैसलों की वजह से पूरा भारत देश को भौचक्का रह गया। ये वो शख्सियत है जिसने कई लोगों के मुंह पर ताले लगा दिए। ये वो शख्स है जिन्होंने 70 साल से चल रहे अयोध्या मामले पर भी सुनवाई को पूरा किया और उसका पूर्ण फैसला पूरी देश की जनता के सामने रख दिया। हम बात कर रहे है “चीफ जस्टिस रंजन गोगोई” (Chief Justice Ranjan Gogoi) की।

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Ranjan Gogoi का प्रारंभिक जीवन

रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को एक ताई-अहोम परिवार में में हुआ था। उनके पिता केसब चंद्र गोगोई एक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ हैं। जिन्होंने 1982 में दो महीने के लिए असम के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। रंजन गोगोई डिब्रूगढ़ के डॉन बॉस्को स्कूल में पढ़े। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज (St. Stephen’s College) में इतिहास में सम्मान के साथ स्नातक की पढ़ाई की, जहां उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की। ​​

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Ranjan Gogoi का लॉ करियर

रंजन गोगोई ने साल 1978 में बार में दाखिला लिया और गौहाटी हाई कोर्ट में प्रैक्टिस की । जहां उन्हें 28 फरवरी 2001 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। 9 सितंबर 2010 को उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में ट्रांसफर किया गया। जो 12 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश बने। 23 अप्रैल 2012 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पद पर नियुक्त किया गया।

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3 अक्टूबर 2018 को रंजन गोगोई ‘भारत के चीफ जस्टिस’ के रूप में नियुक्त किया गया।

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लिए कई बड़े फैसले

रंजन गोगोई देश के एक मात्र ऐसे चीफ जस्टिस है। जिन्होंने करीब 13 महीनों में 47 मामलों को सुलझाया है। इन्होने अपने कार्यकाल में कई ऐसे भी मामले निपटाए है जो काफी समय से कोर्ट में फसे हुए थे या जिनपर कोई भी फैसला नहीं देना चाहता था। रंजन गोगोई ने तीन तलाक, सबरीमाला मंदिर, राफेल और RTI जैसे मामलों अपना फैसला सुनकर देश की जनता को खुश किया है।

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निपटाया 70 साल से फसा मामला

रंजन गोगोई की आज फेयरवेल पार्टी थी। क्योंकि 17 नवंबर को रंजन गोगोई अपने चीफ जस्टिस के पद से रिटारयमेंट ले रहे हैं। अपने रिटारयमेंट से पहले रंजन गोगोई ने 70 साल से चल रहे अयोध्या मामले को निपटा दिया है। जिसका फैसला 9 नवंबर को पूरी देश की जनता के सामने आ गया है। ये फैसला अब तक का सबसे ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।

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15 November, 2019

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