IAS अधिकारी छाया शर्मा को मिला ‘करेज एंड लीडरशिप’ सम्‍मान, निर्भया केस में निभा चुकी हैं अहम रोल

नई दिल्ली: नारी का सम्मान एवं उसके हितों की रक्षा करना हमारे देश की सदियों पुरानी परंपरा है। जो आज तक चलती आ रही है। अगर हम अपने देश के इतिहास में नारी की बात करें, तो बहुत ऐसी दिल दहला देने वाली घटनाएं घटी है, जिसे बस सुनने मात्र से ही खून-खौल उठता है। तो वहीं दूसरी तरफ ऐसी भी घटनाएं घटी है जिसे सुनकर हमारे अंदर एक नए ऊर्जा का संचार होता है।

जहां हम एक तरफ़ रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले एवं रानी पद्मावती की बात करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ हम पी.टी.उषा, कल्पना चावला जैसे साहसी स्त्रियों की भी बात करते हैं। अब इस अध्याय में एक नया नाम भी जुड़ गया है, जी हां हम बात कर रहें है 1999 बैच की IPS अधिकारी छाया शर्मा की जिन्हें 04 मई 2019 को इंटरनेशनल लीडरशिप के लिए अमेरिका में स्थित मैकॉन इंस्टीट्यूट द्वारा “करेज एंड लीडरशिप” पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

छाया ने अपने करियर के 19 वर्षों में कई संवेदनशील आपराधिक मामलों की जांच की। जिसमें से एक निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड मामला भी है। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। आइए जानते है इस नृशंस घटना के बारे में जिसने दिल्ली को बदनाम करने के साथ-साथ पूरे मानवता को शर्मसार कर दिया।

निर्भया हत्याकांड

यह बात है 16 दिसंबर 2012 की, निर्भया (बदला हुआ नाम) अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर लौट रही थी। दोनों एक निज़ी बस में सवार हुए थे, लेकिन उन्हें इस बात का थोड़ा भी अंदाजा नहीं था कि उनके साथ ऐसा भी कुछ हो सकता है। बस में इनके अलावा 6 और भी लोग थे, उन लोगों ने इन्हें परेशान करना शुरु किया और जब निर्भया के दोस्त ने विरोध किया किया तो उसे पीट-पीटकर बेहोश कर दिया और फिर अकेली पड़ी निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जिसके बाद निर्भया का कई दिनों तक इलाज चला। 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर में ईलाज़ के दौरान उसकी मौत हो गई।

उस वक्त छाया दक्षिणी दिल्ली में DCP के पद पर थी, उसने इस मामलें में तेज़ी से कार्रवाई की और 5 दिनों के भीतर सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कोर्ट ने भी इस पर जल्दी सुनवाई करके आरोपियों को मौत की सजा दी थी। छाया के इस साहसिक कार्य ने इस मामले को जल्दी ही खत्म कर दिया था। छाया ने अपने पुलिस के करियर में कई अभियानों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया जिसमें बेबी फॉल्क का मामला, डिफेंस कॉलोनी में बैंक का उत्तराधिकारी और पोंटी चढ्ढा भी शामिल है। अभी वह वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के महानिरीक्षक के रुप में तैनात है।

किसे मिलता है यह पुरस्कार?

इसका पूरा नाम “करेज एंड लीडरशिप” पुरस्कार है। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष किसी ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है जो मौलिक मूल्यों के लिए अटूट रुप से खड़ा हो और जिसने साहस और अपने निस्वार्थ कामों के माध्यम से दुनिया को प्रेरित किया हो। मानवाधिकार, मानवीय करुणा, न्याय स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा की ओर से व्यक्तिगत साहस और कामों के आधार पर प्राप्तकर्ता का चयन किया जाता है। इसके पहले यह पुरस्कार पाकिस्तान के मलाला युसुफ़जाई को साल 2015 में दिया गया था जिन्हें 2014 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार भी दिया गया था।