किसने रखा तूफान का नाम ‘फोनी’, जानें तूफानों के नामकरण की दिलचस्प कहानी

नई दिल्ली: चक्रवाती तूफान ‘फोनी’ सुबह करीब 8 बजे ओडिशा के पुरी तट से टकरा गया है। इस समय पुरी में तेज हवाओं के साथ भयंकर बारिश हो रही है। हैदराबाद के मौसम विभाग के मुताबिक पुरी में 245 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही है। ओडिशा, आंध्रप्रदेश और बंगाल में पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

जानें क्या है फोनी का मतलब, किस देश ने रखा ये नाम ?

इस समय सोशल मीडिया में भी ‘फोनी’ तूफान जमकर ट्रेंड कर रहा है। लेकिन कई लोग ये नहीं जानते होंगे कि इन तूफानों का ये नाम आखिर पड़ा क्यों ? और कैसे इन तूफानों को नाम दिया जाता है। NewsUp2Date आपको बताएगा कि आखिर तूफानों का नाम किस तरह से निर्धारित किया जाता है। इन सबसे पहले आपके लिए ये जानना जरूरी है कि कि आखिर फोनी का मतलब क्या होता है और इसे किस देश ने नाम दिया है।

1953 में हुई थी तूफानों के नाम रखने की शुरूआत

आधिकारिक तौर पर तूफानों के नाम रखने की शुरुआत 1953 से शुरू हुई। ये बात अलग है कि सभी तूफानों का नामकरण नहीं किया जाता है। किसी भी तूफान का नामकरण तब किया जाता है। जब उसकी स्पीड कम से कम 63 किमी प्रति घंटा हो। इसके साथ ही अगर तूफान की रफ्तार 118 किमी प्रति घंटा होता है तो उसे गंभीर तूफान माना जाता है। इसके अलावा अगर तूफान की रफ्तार 200 किमी प्रति घंटे से ज्यादा होता है तो उसे सुपर साइक्लोन की श्रेणी में रखते हैं।

कौन सा देश रखता है तूफानों के नाम

  • इससे पहले हमने नीलोफर, तितली, बिजली जल आदि तूफानों का नाम सुना है। लेकिन ‘फोनी’ का नाम पहली बार सुना होगा।
  • दरअसल, फोनी का नाम बांग्लादेश ने दिया है, जिसका मतलब फन वाला सांप होता है। फोनी उष्णकटिबंधीय तूफान है।
  • दुनिया के अलग अलग हिस्सों में उष्णकटिबंधीय तूफानों को अलग अलग नाम से जाना जाता है।
  • फोनी तूफान का जन्म हिंद महासागर के उत्तरी इलाके में हुआ है ऐसे में तूफान के नाम का रखने की जिम्मेदारी उस क्षेत्र में आने वाले देशों की होती है।
  • इस दफा इस सुपर साइक्लोन का नाम बांग्लादेश ने दिया है जिसका अर्थ सांप है।

अब आपको बताते हैं कि आखिर तूफान का जेंडर क्या होता है। वैसे तूफान का जेंडर मेल में आता है, हालांकि पहले तूफान को सिर्फ महिलाओं के नाम पर मिलता था। अमेरिकी मौसम विभाग ने 1953 में तय किया कि अंग्रेजी वर्णमाला के A से लेकर W तक जितने भी नाम महिलाओं के नाम हो सकते हैं> उसी आधार पर तूफान का नामकरण किया जाए। लेकिन महिला संगठनों के विरोध के बाद तूफान का नाम पुरुषों के नाम पर भी किया जाने लगा।

अब वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल संगठन रखता है तूफानों का नाम

भारतीय उपमहाद्वीप के साथ साथ हिंद महासागर के करीब वाले देशों में तूफान का नामकरण साल 2000 के बाद शुरू हुआ जिसमें बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार शामिल हैं। तूफानों का नाम देने का सिलसिला अब वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल संगठन करता है। इसके हिसाब से जिस इलाके में तूफान आएगा उसका नाम वहां की क्षेत्रीय एजेंसिया करेंगी। इसके मुताबिक किसी भी वर्ष की शुरुआत में आने वाले पहले तूफान को ए और फिर अगले तूफान को बी नाम दिया जाएगा। ईवन नंबर वाले वर्षों जैसे 2016 को पुरुष और ऑड वर्षों जैसे 2017 को महिला नाम दिया जाएगा।