धरती पुत्र मुलायम सिंह : खेत-खलियानों से लेकर ऐसा रहा राजनीतिक सफर, इन 2 विवादों ने मचाया तूफान
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धरती पुत्र मुलायम सिंह : खेत-खलियानों से लेकर ऐसा रहा राजनीतिक सफर, इन 2 विवादों ने मचाया तूफान

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुलायम सिंह का आज जन्मदिन है। यूपी की राजनीति को नई दिशा देने वाले मुलायम ने अपनी छवि सेकुलर बनाने की हमेशा से ही कोशिश की, जिसमें वो काफी हद तक सफल भी रहे। खुद किसान परिवार में जन्में मुलायम हमेशा किसानों के हक की बात उठाने रहे। इसी वजह से उन्हें धरती पुत्र भी कहा जाता है। हालांकि, मुलायम के कुछ फैसलों पर विवाद भी हुआ और उन्हें, आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी।

एक कार्यक्रम के दौरान मुलायम सिंह यादव की पुरानी तस्वीर (साभार: गूगल)

21 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में जन्मे मुलायम एक किसान परिवार से आते हैं। कहा जाता है कि मुलायम के पिता उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे। मुलायम अखाड़े में उतरे और कई कुश्तियां भी लड़ी। इसी दौरान उनकी मुलाकात नत्थूसिंह से हुई, जिनकी मदद से उनका राजनैतिक सफर शुरू हुआ। मुलायम ने जसवंत नगर विधानसभा सीट से अपना राजनैतिक सफर शुरू किया और नत्थू सिंह को अपना राजनीतिक गुरू माना।

आगरा विश्वविद्यालय से मुलायम सिंह पोस्ट ग्रैजुएशन कर चुके हैं और काफी समय तक उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दी। 1967 में पहली बार मुलायम विधायक बने और यहां से शुरू हुआ उनका राजनैतिक सफर। देखते ही देखते मुलायम की लोकप्रियता यूपी में बढ़ने लगी और उत्तर प्रदेश की राजनीति को बदलने वाली शख्सियत अपनी पहचान बनाने लगी।

मुलायम सिंह यादव और पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की एक पुरानी तस्वीर (साभार: गूगल/इंडियन एक्सप्रेस)

1975 में जब इंदिरा सरकार ने आपातकाल लगाया तो मुलायम को जेल भी जाना पड़ा। 1977 में मुलायम पहली बार मंत्री बने और 1980 में उन्हें चौधरी चरण सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल का अध्यक्ष बनाया गया। 1989 में पहली बार मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। साल 1992 में मुलायम ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की। पार्टी की स्थापना के एक साल बाद ही मुलायम फिर से यूपी के मुख्यमंत्री बने।

तीन सालों तक यूपी में शासन करने के बाद मुलायम ने 1996 में यूपी की मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। मैनपुरी सीट से लोकसभा सांसद बने मुलायम को एचडी देवेगौड़ा व आई.के गुजराल की सरकार में रक्षा मंत्री रहे।

2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को भारी बहुमत से जीत मिली। पार्टी में सभी लोग चाहते थे कि ‘नेताजी’ यानि मुलायम सिंह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभाएं। लेकिन, मुलायम ने अपने बेटे अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर सबको चौंका दिया।

पारिवारिक जीवन

मुलायम सिंह यादव ने दो शादी की हैं। उनकी पहली पत्नी मालती देवी का 2003 में निधन हो गया था। अखिलेश यादव, मालती और मुलायम की ही संतान हैं। अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद मुलायम सिंह ने 2007 में साधना के साथ अपना रिश्ता स्वीकार किया। प्रतीक यादव साधना और मुलायम सिंह की संतान हैं।

मुलायम सिंह यादव की हाल ही के सालों में खींची गई एक तस्वीर (साभार: गूगल)

विवाद

मुलायम सिंह अपनी सेक्युलर छवि के लिए जाने जाते हैं। कई मौकों पर वह हिंदुवादी संगठनों की भी आलोचना कर चुके हैं। लेकिन, इसका सबसे बड़ा खामियाजा मुलायम को बाबरी मस्जिद के दौरान चुकाना पड़ा। 2 नवंबर, 1990 को मुलायम ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने की कोशिश करने वाले कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश पुलिस को दे दिया। पुलिस की गोली से 16 कारसेवकों की मौत हो गई।

अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाना मुलायम सिंह को भारी पड़ा। इसका खामियाजा उन्हें 1991 विधानसभा चुनाव में चुकाना पड़ा। समाजवादी पार्टी इस चुनाव में बुरी तरह हारी और पहली बार भगवा पार्टी यानी भाजपा ने प्रदेश की 221 सीटों पर जीत हासिल की।

अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने का आदेश मुलायम सिंह यादव को भारी पड़ गया था क्योंकि इस घटना के बाद 1991 में हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की बुरी तरह हार हुई थी और पहली बार उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाई थी।

इन सबके अलावा मुलायम सिंह की किरकिरी उस वक्त हुई जब उन्होंने बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को लेकर विवादित बयान दे डाला। मुलायम ने कहा था, ‘रेप पर फांसी क्यों, लड़कों से गलती हो जाती है’। उन्होंने एक रैली के दौरान ये भी वादा कर दिया कि जब केंद्र में हमारी सरकार बनेगी तो ऐसा कानून बनाएंगे जिससे रेप से जुड़े कानून का दुरुपयोग न हो।

21 November, 2018

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