अपने वर्कप्लेस पर न करें ये सात चींजे, नहीं तो…
लाइफस्टाइल

अपने वर्कप्लेस पर न करें ये सात चींजे, नहीं तो…

“हुनर” एक ऐसी चीज है, जो आज के समय में सड़क पर भी देखने को मिल जाती है। हुनरमंद लोग हमेशा ही आपके आसपास रहते हैं। वो आपके दोस्त, पड़ोसी, भाई-बहन या कोई और हो सकते हैं, बस उन सबमें एक बात कॉमन होती है कि वो सब अपने अपने काम में माहिर होते हैं। आप भी होंगे, लेकिन आप में ऐसा क्या खास है कि आप सड़क से ऑफिस का रास्ता तय कर लेते हैं। और दूसरे वो नहीं कर पाते… ऐसे में कुछ लोग वो होते हैं जो ऑफिस तक तो पहुंच जाते हैं मगर ऑफिस में दिल से काम नहीं कर पाते या टिक नहीं पाते हैं, तो आज हम आपको कुछ सात बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप अपने वर्कप्लेस पर करें नहीं तो आपको बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।

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“काम ही कर्म है”

काम ही कर्म है… ये कहावत तो आपने जरुर सुनी होगी। लेकिन क्या आपने कभी इसे फॉलो किया हैै। अगर नहीं तो आज से करना शुरु कर दें। क्योंकि यही सोच आपको वर्काहोलिक बनाएगा। यही आपको बुलंदियों तक लेकर जाएगा।

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मौका सबको मिलता है, मगर…

मौका जितना छोटा शब्द है, उससे कही कम वक्त के लिए आता है… ये कहावात उन लोगों के लिए एक कदम सटीक बैठती है, जो लोग नौकरियां करते हैं क्योंकि नौकरी करते वक्त हमारे पास रोजाना एक न एक ऐसा टास्क आता ही है, जो या तो हमें आता नहीं है या फिर जिसे हम करना नहीं चाहते हैं। ऐसे में अगर आप उस काम को करने से इनकार कर दें तो ये आपके लिए एक निगेटिव पाइंट बनता है। इसलिए कभी भी किसी काम को मना न करें, क्योंकि एक मौका आपको या तो आसामान तक पहुंचा सकता है या फिर आपको कुछ सिखा सकता है। लेकिन पास आए मौके को इनकार कर देना आपको बर्बाद कर सकता है।

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चुगलियां करना या गपशप करना

हम अपनी जिंदगी का आधे से ज्यादा समय ऑफिस में गुजारते हैं। ताकि हम काम कर सकें, अपने काम को सुधार सकें और आगे बढ़ सकें। लेकिन ऐसे में कुछ लोग चुगलियां करने या फिर अपने सह-कर्मचारी (Co-worker) के साथ गपशप करने लगते हैं। इससे होता तो कुछ नहीं है, लेकिन इस तरह के लोग अपने समय के साथ दूसरों का समय भी बर्बाद कर देते हैं।

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दखलअंदाजी

जब दो बड़े लोग आपस में बातचीत करें, तो बीच में नहीं बोला करते हैं… और अगर कोई ऐसा करता है तो उसे दखलअंदाजी कहते हैं। वैसे तो ये शब्द एक ऐसा शब्द है जो आपके अंदर कब आ जाए इसके बारे में आपको खुद पता नहीं चल पाता है। दखलअंदाजी करने के भी दो तरीके होते हैं। पहला अगर आप कभी कभी और सही बात पर दखलअंदाजी करते हैं, तो ठीक है। लेकिन अगर आप बात-बात पर और हर किसी के बीच में दखलअंदाजी करने लगते हैं तो आप खुद के लिए ही गढ्डा खोद लेते हैं।

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अधिक कम्फर्टेबल होना

आज के समय में आपने ये डायलॉग तो सुना ही होगा कि “मैं कम्फर्टेबल नहीं हूं, इसलिए मैं नहीं आ सकती” लेकिन क्या आपको पता है कि ऑफिस में भी आपका एक जोन होता है। और वो जोन न केवल आपके काम बल्कि आपके व्यवाहर में भी होता है। अगर आप ऑफिस में अधिक कम्फर्टेबल फील करने लगते हैं तो सबसे पहले आप इस बात को भूल जाते हैं कि आप किससे बात कर रहे हैं उदाहरण के तौर पर- आप अपने बॉस से, अपने सीनियर से बात कर रहे हैं। ऐसे में आपको नहीं पता चल पाता है कि आप अपनी मर्यादा कब पार कर जाते हैं। इसलिए ऑफिस में अधिक कम्फर्टेबल होना भी खतरे का निशान होता है।

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आप सही हैं

मैं सही हूं, आपको ये मानना होगा… जी हां, आप सही हैं, ये हम मानते हैं लेकिन हर बार आप ही सही हैं, ये भी नहीं हो सकता है। इसलिए आप कुछ भी बोलने से पहले या किसी से बातचीत करने से पहले एक बार अपने तथ्यों पर विचार कर लें, फिर किसी दूसरे से कुछ कहें।

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साज़िश करना

आपने एक कहावत तो सुनी ही होगी कि खुद तो डूबेंगे सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे… ये कहावत उन लोगों पर एक दम सटीक बैठती है, जो ऑफिस में खुद को चाणक्य समझते हैं। इतना ही नहीं, समय समय पर अपनी साज़िशें भी चलते रहते हैं। इस तरह के लोग काफी हानिकारक होते हैं। क्योंकि ये लोग खुद कभी भी सामने नहीं आते बल्कि दूसरों को ढाल बनाते हैं और पकड़े जाने पर अपनी ढाल को ही कूर्बान कर देते हैं। तो ये वो सात कारण हैं, जो ऑफिस में हमें नहीं करने चाहिए साथ ही इन लोगों से दूर रहना चाहिए।

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5 November, 2019

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Ashish Jain