बेटी को कमरे में बंद करोगे तो अभी संभल जाओ, क्या पता बड़ी होकर वो सानिया मिर्जा बन जाए?

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(साभार: गूगल)

नई दिल्ली। भारत में लड़कियों को गृहलक्ष्मी का रूप माना जाता है। लेकिन, उन्हें किसी शोपीस की तरह घर के एक कोने तक सीमित कर दिया जाता है। हार न मानने का जज्बा और कुछ कर दिखाने की ललक आज बेटियों को आगे बढ़ा रही है। इन्हीं में से एक नाम है सानिया मिर्जा का जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन की वजह से पूरे देश का मान बढ़ाया है।

सानिया मिर्जा की एक फाइल फोटो (साभार: गूगल)

सानिया मिर्जा सिर्फ एक टेनिस खिलाड़ी ही नहीं बल्कि भारत का गौरव… स्टाइल आइकन… वूमेंस डबल की नंबर वन खिलाड़ी और अब एक मां भी हैं। सानिया मिर्जा की इतनी खूबियां हैं, जिन्हें गिनना भी आसान नहीं। सानिया मिर्जा की बात यहां इसलिए हो रही है, क्योंकि आज उनका जन्मदिन है।

15 नवंबर, 1986 को मुंबई में खेल पत्रकार इमरान मिर्जा के घर बेटी का जन्म हुआ। पिता इमरान मिर्जा और मां नसीमा मिर्जा ने अपनी बेटी का नाम सानिया रखा। सानिया के पिता एक खेल पत्रकार थे, इस वजह से उनका ध्यान खेल की तरफ आकर्षित हुआ। सानिया अपने पिता की तरह एक पत्रकार बनना चाहती थी। लेकिन, सानिया के पिता ने छोटी उम्र में हुनर पहचान लिया और कलम की जगह हाथों में रैकेट थमा दिया।

साभार: गूगल

कुछ ही समय बाद सानिया और उनके परिवार को हैदराबाद वापस लौटना पड़ा। वहां के शिया खानदान में सानिया का बचपन बीता। सानिया मिर्जा ने 6 साल की उम्र से ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। हैदराबाद के निजाम क्लब में सानिया प्रैक्टिस किया करती थी। बेटी की टेनिस के प्रति रुची देखकर पिता भी उनका भरपूर साथ दिया करते थे।

छोटी उम्र में ही सानिया मिर्जा को महेश भूपति के पिता और भारत के सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक सीके भूपति से काफी कुछ सीखने को मिला। कहते हैं कि मजबूत नींव सफलता की पहली निशानी है। यही बात सानिया पर भी लागू हुई। देश के सबसे बेहतरीन टेनिस खिलाड़ियों में से एक सीके भूपति से सानिया मिर्जा ने शुरुआत कोचिंग ली।

उस वक्त सानिया के पिता इमरान मिर्जा के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो सानिया को प्रोफेशनल ट्रेनिंग करवा सकें। खेल पत्रकार होने की वजह से उन्होंने सानिया मिर्जा के लिए कुछ बड़े ब्रांड्स से स्पांसरशिप का जुगाड़ करवाया। जीवीके इंडस्ट्रीज और एडीडास सानिया मिर्जा के स्पांसर बनने को तैयार हो गए। मात्र 12 साल की उम्र में सानिया मिर्जा को स्पांसरशिप मिल गई।

महेश भूपति लेने लगे थे सानिया के जरूरी फैसले (साभार: गूगल)

1999 में सानिया मिर्जा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ल्ड जूनियर टेनिस चैम्पियनशिप में हिस्सा लेकर की। इस चैम्पियनशिप के बाद सानिया मिर्जा ने कई इंटरनेशनल मैच खेले और जीत भी हासिल की, लेकिन फिर भी आधा हिन्दुस्तान सानिया मिर्जा के नाम से अनजान था। सानिया मिर्जा के जीवन का सबसे रोचक मोड़ उस वक्त आया, जब 2003 विम्बलडन के डबल्स मुकाबले में वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई। अपनी पहली ही विम्बलडन चैंपियनशिप में खिताब जीतकर सानिया मिर्जा टेनिस जगत की सनसनी बन गई। विम्बलडन डबल्स चैंपियन बनने के बाद सानिया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

2004 में सानिया मिर्जा ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया और अगले ही साल उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2005 के अंत तक सानिया मिर्जा अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 32वें स्थान पर पहुंच चुकी थी। मात्र 5 साल के करियर में सानिया मिर्जा ने वो मुकाम हासिल कर लिया था, जो अभी तक कोई भी भारतीय खिलाड़ी टेनिस में हासिल नहीं कर पाया। साल 2006 में सानिया मिर्जा को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। 2009 में सानिया मिर्जा भारत की तरफ से ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं।

साभार: गूगल

साल 2007 सानिया मिर्जा के करियर का सबसे अच्छा समय रहा। इसी साल उन्होंने अपनी सर्वश्रेष्ठ 27वीं रैंकिंग हासिल की। इसी साल सानिया ने 4 युगल टेनिस खिताब भी जीते। लिएंडर पेस के साथ 2007 एशियाई खेलों में सानिया ने ब्रांज मेडल जीता। 2008 में एक मैच के दौरान सानिया मिर्जा की कलाई में चोट आ गई और पूरा साल काफी परेशानियों में गुजरा। कलाई की चोट के कारण सानिया मिर्जा को बीजिंग ओलंपिक खेलों से भी पीछे हटना पड़ा।

2009 में सानिया मिर्जा ने आस्ट्रेलियन ओपन टूर्नामेंट के जरिए टेनिस में वापसी की। महेश भूपति के साथ सानिया मिर्जा ने पहली बार मिक्सड डबल्स का ग्रैंड स्लैम जीता। हालांकि, ये साल सानिया के लिए उतार-चढ़ाव भरा भी रहा। आस्ट्रेलिया ओपन टूर्नामेंट के दरमियान सानिया मिर्जा और शोएब मलिक की पहली बार मुलाकात हुई। भारत वापस लौटने के बाद सानिया मिर्जा ने बचपन के दोस्त सोहराब मलिक से सगाई कर ली। हालांकि ये रिश्ता ज्यादा कुछ ही दिनों में टूट गया।

2009 के आखिरी महीनों में पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक के साथ सानिया के अफेयर की खबरें उड़ने लगीं। 12 अप्रैल 2010 को शोएब मलिक और सानिया मिर्जा ने हैदराबाद में शादी कर ली। उनकी शादी को लेकर भी बहुत विवाद हुआ। शादी की भनक लगते ही बातों का बतंगड़ बनाने के लिए मीडिया की टीमें सानिया के घर के बाहर 24 घंटे तैनात हो गईं। तेलंगाना के एक नेता ने तो सानिया को पाकिस्तानी बहू तक कह डाला।

सानिया और शोएब मलिक की शादी के बाद खत्म हुई कांट्रोवर्सी (साभार: गूगल)

शादी के बाद भी सानिया मिर्जा ने टेनिस खेलना नहीं छोड़ा। पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी करने के बाद भी सानिया सिर्फ भारत के लिए टेनिस खेलती हैं। कलाई की चोट और शादी के कारण तीन सालों तक सानिया मिर्जा को कोई बड़ा खिताब हासिल नहीं हुआ। साल 2014 में सानिया ने वापसी करते हुए यूएस ओपन का मिश्रित युगल खिताब जीता।

2014 से सानिया का करियर फिर शिखर पर पहुंचने लगा। मार्टिना हिंगिस के साथ सानिया की जोड़ी सफल साबित हुई और एक के बाद एक चैंपियनशिप जीतते गए। 2015 में सानिया और हिंगिस की जोड़ी ने महिला युगल की पहली ग्रैंड स्लैम चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया। 2016 में भी सानिया और हिंगिस की जोड़ी ने ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब अपने नाम किया, लेकिन 2017 में इस जोड़ी को हार का सामना करना पड़ा।

2018 में सानिया मिर्जा घुटने की चोट के कारण टेनिस से खेलने में असमर्थ हो गई। इसी बीच सानिया गर्भवती भी हुई और उन्होंने हैदराबाद में बेटे को जन्म दिया। इस मुश्किल दौर में पति शोएब मलिक और उनका परिवार हमेशा उनके साथ खड़े नजर आए।

सानिया मिर्जा का वैसे विवादों से भी गहरा नाता रहा है, लेकिन हिम्मत, मेहनत और कभी न टूटने वाला हौसला ही उन्हें भारत की सबसे सशक्त महिलाओं में से एक बनाता है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि टाइम मैगजीन ने सानिया मिर्जा को दुनिया के 50 हीरोज की लिस्ट में शामिल किया था।