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Loksabha Election: RSLP को ज्यादा सीट मिलने से नाराज हुए मांझी, दिल्ली से तुरंत लौटे बिहार

नई दिल्ली: इस बार बीजेपी के विजय रथ को हराने के लिए विपक्ष एक जुट हो गया है। जिसे नाम दिया गया है ‘महागठबंधन’।।। ‘महागठबंधन’ बन गया लेकिन राजनीति का लालच अभी भी ‘महागठबंधन’ के सदस्यों के अंदर कूट-कूट के भरा है। इनका मकसद भले ही बीजेपी को हराने का हो, लेकिन बैठक के बाद जब नेता बाहर निकल रहे हैं तो उनके चेहरे का भाव कुछ और ही बयां कर रहा है।

दरअसल, हम बात कर रहे हैं बिहार के पूर्व सीएम और हिंदुस्तानी अवाम मोर्ट-सेकुलर के प्रमुख जीतन राम मांझी की। बता दें, बिहार में महागठबंधन के दलों के बीच सीट बंटवारे पर गुरुवार को नई दिल्ली में बैठक हुई। सियासी रणनीति बनाने के लिए दिल्ली आए मांझी खफा होकर वापस लौट गए। वजह सम्मानजनकर सीट ना मिलना है। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मांझी ने कहा कि महागठबंधन में उनकी पार्टी की हैसियत कांग्रेस और आरजेडी के बाद की है, इसलिए उनकी पार्टी को सीट बंटवारे में तवज्जो मिलनी चाहिए। मांझी ने उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को ज्यादा सीट मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरएलएसपी के बराबर सीटों की मांग की है।

मांझी का कहना है कि हम अपने स्टैंड पर कायम हैं। कांग्रेस और आरजेडी के बाद हमें ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। अभी सीट बंटवारे को लेकर 78-80 फीसदी काम हुआ है। 20 फीसदी अब भी बाकी है। हमने 16 मार्च को पार्टी की बैठक बुलाई है। वहीं, हम (एस) के नेता अजीत ने भी मांझी की बात का समर्थन किया है। उनका कहना है कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो चुनाव नहीं लड़ेंगे सिर्फ महागठबंधन के लिए प्रचार करेंगे। महागठबंधन में हमारी पार्टी की हैसियत तीसरे नंबर की है, हमें उसी के अनुसार सीट मिले।

बता दें कि बिहार में महागठबंधन में कांग्रेस, आरजेडी, आरएलएसली, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा-सेकुलर (हम-एस) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) हैं। बिहार में 40 लोक सभा सीट हैं, जिनके लिए सात चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण की वोटिंग 11 अप्रैल को है। वोटों की गिनती 23 मई को होगी।