fbpx

आतंकी मसूद पर कुछ ही देर में आएगा फैसला, चीन ने फिर मांगे जैश प्रमुख के आतंकी होने के सबूत

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुछ ही देर के बाद आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने पर फैसला आने वाला है। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा पेश किए जाने वाले इस प्रस्ताव पर यदि चीन अड़ंगा नहीं लगाता तो मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया जाएगा।

हालांकि, सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले चीन ने मसूद अजहर को बचाने के लिए फिर से नया पैंतरा चला है। बताया जा रहा है कि चीन ने भारत से मसूद अजहर के खिलाफ सबूत मांगे हैं। भारत पहले ही मसूद अजहर के आतंकी होने संबंधी डोजियर चीन और दुनिया के दूसरे बड़े देशों को दे चुका है। अब सबकी निगाहें चीन के अगले कदम पर है। इससे पहले 2017 में भी चीन ने अड़ंगा लगाकर जैश सरगना मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा लिया था।

गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े ट्रेनिंग कैंप पर बम गिराए थे। बालाकोट में आतंकियों की ट्रेनिंग मसूद अजहर की देखरेख में होती थी। बताया जाता है कि मसूद अजहर इस जगह का अक्सर आता-जाता रहता था। मसूद के साथ ही जैश के कुख्यात आतंकी मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर और मौलाना उमर भी इस जगह देखे जाते रहे हैं। पुलवामा आतंकी हमले का आत्मघाती हमलावर भी बालाकोट ट्रेनिंग कैंप में ट्रेंड हुआ था।

2015 से 2017 के बीच जैश के जिन 4 आतंकियों से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ की, उन्होंने ही यह सारी जानकारी साझा की। मोहम्मद सादिक, अब्दुल रहमान मुगल, नासिर महमूद अवैन और वकास मंजूर ने जांच एजेंसियों से पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि उन्हें भी बालाकोट ट्रेनिंग कैंप में ही आतंक की ट्रेनिंग दी गई थी।

गिरफ्तार आतंकियों ने जांच एजेंसियों को बताया कि बालाकोट में लंबे बैरक जैसी जगह को तीन हॉल में बांटा जाता है। इनमें से एक सेंटर हॉल सिर्फ फिदायीन हमलावरों के लिए बनाया गया था। बाकी 2 हॉल को शाहीन महल और मशकीन महल कहा जाता है। चारों आतंकियों ने कबूल किया कि कैंप में नियमित सुविधाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही एक मस्जिद और मदरसा, हॉल और कुछ लोगों के लिए क्वॉर्टर भी हैं। आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए जगंल में एक किलोमीटर आगे हथियार चलाने की जगह है।