चीन-PAK को अमेरिका की दो टूक, कहा-मिशन शक्ति कोई स्पेस वार नहीं.. ये भारत का हक है

  • पाकिस्तान और चीन ने भारत के मिशन शक्ति को बताया था गंभीर खतरा
  • पेंटागन ने किया भारत का बचाव, कहा-भारत कोई स्पेस वार शुरू नहीं कर रहा

नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान द्वारा भारत के मिशन शक्ति पर सवाल उठाए जाने पर अमेरिका ने दो टूक शब्दों में इसे भारत का हक बताया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा है कि भारत ने अंतरिक्ष में खतरों के प्रति चिंतित होकर मिशन शक्ति के तहत एंटी सेटेलाइट परीक्षण किया था।

अमेरिकी कमांडर ने सीनेट के सामने रखी राय

  • अमेरिकी स्ट्रैटेजिक कमांड कमांडर जनरल जॉन ई हयटन ने गुरुवार को कहा, भारत की ASAT परीक्षण पर सबसे पहला सवाल उठता है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया? इसका जवाब है कि वे अंतरिक्ष में अपने देश के लिए भावी खतरे को लेकर चिंतित थे।
  • जनरल हेटन ने सीनेट ऑर्म्डे सर्विस कमिटी के समक्ष कहा, अंतरिक्ष में उन्हें खुद को सुरक्षित रखने की क्षमता प्रदर्शित करने की भारत को जरूरत महसूस हुई।

US सीनेट में चल रही है मिशन शक्ति पर बहस

  • सीनेटर्स ने उनसे भारत को एंटी सेटेलाइट मिसाइल परीक्षण की जरूरत पर सवाल पूछा था। नासा द्वारा परीक्षण के बाद अंतरिक्ष में 400 टुकड़े फैलने के खतरों पर जनरल हेटन ने अंतरिक्ष में गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय नियमों को लाने की वकालत की।
  • पेंटागन कमांडर ने कहा कि मेरी राय में सबसे पहले अंतरिक्ष में कचरे को लेकर नियम बनाए जाने चाहिए। मैं अंतरिक्ष में और कचरा नहीं चाहता हूं।

सीनेटर टिम केन ने पूछे सवाल

  1. सीनेटर टिम केन ने कहा कि भारत ने पिछले महीने एंटी सेटेलाइट मिसाइल सिस्टम का परीक्षण करने का ऐलान किया है। सैटेलाइट मार गिराने से अंतरिक्ष में 400 टुकडों का मलबा पैदा हो गया है और इस कचरे के 24 टुकड़े इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।
  2. सीनेटर ने कहा कि पहले भी ऐसे कई मामले में सामने आए हैं। चीन ने 2007 में ऐसा ही परीक्षण कर अंतरिक्ष में 1 लाख टुकड़ों का मलबा पैदा कर दिया था। 2009 में अमेरिकी सैटेलाइट और सोवियत युग की एक बेकार सैटेलाइट के बीच टक्कर में भी कचरा पैदा हुआ था।
  3. सीनेटर केन ने पूछा, अगर हमें लगता है कि अंतरिक्ष में ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति होने जा रही है और हमारे कई तरह के सेटेलाइट वहां मौजूद हैं तो ऐसी स्थिति में हमें किन नियमों के बारे में सोचना चाहिए। किस तरह के नियमों को बनाना होगा और हम किस तरह के नियमों को प्रोत्साहित करने की बात कर रहे हैं।
  4. केन ने आगे कहा, ‘भारत एक सहयोगी देश है। हम उसके खिलाफ कोई कदम उठाने की बात नहीं कर रहे हैं। हम उनके परीक्षण के बारे में बात कर रहे हैं जिससे अंतरिक्ष में हर तरह के प्रयोग के लिए चुनौती पैदा हो सकती है। हम इस तरह से समस्याएं कैसे सुलझा पाएंगे?

गौरतलब है कि 27 मार्च को भारत ने लो ऑर्बिट में मिसाइल से एक लाइव सेटेलाइट को मार गिराकर अंतरिक्ष में इतिहास रचा था। अमेरिका यूएस, रूस और चीन के बाद यह परीक्षण करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है।