55 साल बाद भी अनसुलझी है दुनिया की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री, जॉन कैनेडी को मारी थी सड़क पर गोली
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55 साल बाद भी अनसुलझी है दुनिया की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री, जॉन कैनेडी को मारी थी सड़क पर गोली

नई दिल्ली। अमेरिका के 35वें और सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की आज 55वीं बरसी है। 22 नवंबर का दिन दुनिया के इतिहास में उस वक्त काले अक्षरों से लिख दिया गया, जब दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति की खुलेआम गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। दुनिया की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री पर आज भी कई सवाल बरकरार हैं।

क्या हुआ था उस दिन

शुक्रवार का दिन था और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी टेक्सास राज्य में चुनाव प्रचार के लिए पहुंच चुके थे। कैनेडी एयरपोर्ट से ही खुली लिमोजिन में सवार हुए। टेक्सास के गर्वनर जॉन कॉनली और उनकी पत्नी नेली भी उनके साथ इसी गाड़ी में बैठे हुए थे। कैनेडी का काफिला धीरे-धीरे डलास की सड़कों पर आ गया।

कैनेडी के काफिले संग चल रहे थे सीक्रेट सर्विस के एजेंट। फोटो साभार: गूगल

अपने लोकप्रिय राष्ट्रपति को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ जमा थी। कुछ लोग कैनेडी को देखकर हाथ हिला रहे थे, तो कुछ कैनेडी के वहां आने से काफी जोश में थे। कैनेडी खुली लिमोजिन में पिछली सीट पर अपनी पत्नी के साथ बैठे थे और लोगों का हाथ हिलाकर गर्मजोशी से अभिवादन भी कर रहे थे। उनके दाईं और बाईं तरफ सीक्रेट सर्विस के कुछ जवान मोटरसाइकिल पर जबकि कुछ उनके पीछे चल रही दूसरी लिमोजिन पर सवार थे। कैनेडी का दौरा कवर करने के लिए मीडिया भी वहां बड़ी संख्या में मौजूद थी।

कैनेडी की हत्या से चंद मिनट पहले ली गई एक तस्वीर जिसमें टेक्सास के गर्वनर जॉन कॉनली और उनकी पत्नी दिख रहे हैं। जबकि कैनेडी अपनी पतनी के साथ पिछली सीट पर बैइे हैं। फोटो साभार: गूगल

मीडिया के कैमरे जगह-जगह लगे हुए थे। दोपहर के 12.31 मिनट पर जॉन एफ. कैनेडी की लिमोजिन ने जैसे ही एक मोड़ लिया वैसे ही एक गोली उनके सीने में जा लगी। कैनेडी की पत्नी जैकलिन जैसे ही उनकी तरफ मुड़ी, तभी एक और गोली ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सिर को भेद दिया। अचानक हुए हमले से जैकलिन उछल कर लिमोजिन की डिग्गी पर चढ़ गई। पीछे से सीक्रेट सर्विस का एक जवान उनकी मदद करता दिखा। इसके बाद तेजी से लिमोजिन वहां से निकल गई।

जॉन कैनेडी को गोली लगने के बाद प्रथम महिला जैकलीन को बचाने की कोशिश करता सीक्रेट सर्विस का एजेंट। साभार: गूगल

इस हमले में कैनेडी के अलावा कॉनली भी बुरी तरह घायल हुए। जो कुछ हुआ वो कैमरों के सामने हुआ, इंटरनेट पर आज भी कैनेडी की हत्या से जुड़ा वीडियो आपको आसानी से मिल जाएगा। कुल कितनी गोलियां चली, इस पर भी संशय बरकरार है। वैसे जांच रिपोर्ट में 35 गोलियां चलने की बात सामने आई है, लेकिन इस रिपोर्ट पर पहले ही दिन से सवालिया निशान उठ चुके हैं।

गोलियों से छलनी कैनेडी को जब पार्कलैंड मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया और उस वक्त उनका दिल धड़क रहा था। डॉक्टरों ने तमाम कोशिशें की, लेकिन सब नाकाम साबित हुईं। 46 साल की उम्र में ही कैनेडी इस दुनिया से चल बसे।

हत्या की जांच पर विवाद

जॉन एफ. कैनेडी की हत्या के बाद उनका शव एयरफोर्स वन में रखकर वाशिंगटन के लिए रवाना किया गया। एयरफोर्स वन के अंदर ही तत्कालीन उपराष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। कैनेडी की हत्या के 4 दिन बाद उन्होंने जांच का ऐलान करते हुए वॉरेन कमीशन बनाया । कमिशन ने जो परिणाम जारी किए उनपर शुरू से ही विवाद रहा।

इसी शख्स पर लगा था कैनेडी की हत्या का आरोप : साभार-गूगल

किसने की हत्या

कैनेडी की हत्या के लगभग डेढ़ घंटे बाद ली हार्वे ऑसवाल्ड नाम के एक शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया। संदेह था कि ऑसवाल्ड ने ही कैनेडी को गोली मारी है, क्योंकि बंदूक उसी के नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालांकि, ऑस्वाल्ड ने राष्ट्रपति की हत्या से इंकार कर दिया।

… और यूं बनकर रह गई मर्डर मिस्ट्री

24 नवंबर को ऑस्वाल्ड को दूसरी जेल में शिफ्ट किया जा रहा था। पूरी घटना को कवर करने के लिए एक चैनल की कैमरा टीम भी साथ मौजूद थी। तभी एक नाइट क्लब का मालिक जैक रूबी, हमलावर ऑस्वाल्ड सामने आया और सबके सामने उसे गोली मार दी। टीवी पर लाखों लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के संदिग्ध की हत्या का लाइव वीडियो देखा। कैनेडी की हत्या का राज इसके बाद हमेशा के लिए मर्डर मिस्ट्री बनकर रह गया। हालांकि, ट्रम्प सरकार ने इसी साल कैनेडी की हत्या से जुड़े कुछ दस्तावेज जारी किए हैं, लेकिन इस हत्याकांड की वजह से आज भी पर्दा नहीं उठ पाया है।

25 नवंबर को कैनेडी की अंतिम यात्रा निकाली गई। लाखों लोगों ने अपने प्रिय नेता को नम आंखों से विदाई दी। सिर्फ 2 साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहने वाले कैनेडी का निधन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया भी छाया रहा। कैनेडी के निधन से अमेरिका के बाद सबसे बड़ा झटका जर्मनी की जनता को लगा। खासकर पश्चिमी बर्लिन के लोग इस हत्याकांड पर यकीन नहीं कर पा रहे थे।

1963 में कैनेडी जब पश्चिम बर्लिन का दौरे पर थे, तो उन्होंने यहां अपने भाषण में खुद को ‘इश बिन बर्लिनर’ कहा था। इसका अर्थ है, ‘मैं एक बर्लिन वासी हूं’। कैनेडी के यही शब्द जर्मन जनता के दिल में घर बना गए। कैनेडी की हत्या के बाद बर्लिन की दीवार पर लाखों जर्मनों ने फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

22 November, 2018

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