विश्व एड्स दिवस: कैंसर से भी खतरनाक है एड्स, असुरक्षित संबंध बन रहे मौत का कारण

नई दिल्ली। विश्व एड्स दिवस आज पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। ये तो सभी जानते हैं कि एड्स की बीमारी फैलने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध हें। लेकिन, एड्स की बीमारी पर लोग खुलकर बात नहीं करते। लोग असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं और एड्स की बीमारी मोल ले लेते हैं। एक तरह से देखा जाए तो एड्स कैंसर से भी भयंकर बीमारी है। कैंसर के लिए अब कई दवाएं मार्केट में उपलब्ध हैं, लेकिन एड्स का कोई इलाज नहीं है।

समाज में एड्स के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण से होने वाला संक्रामक रोग है। विश्व एड्स दिवस पर भारत में सरकारी संगठन, गैर सरकारी संगठन, नागरिक समाज और अन्य स्वास्थ्य अधिकारी लोगों को एड्स के बारे में जागरुक करते हैं।

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क्यों खतरनाक है एड्स

एड्स यानि एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जो एक रोगी से दूसरे रोगी में फैलकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता खत्म कर देती है। एचआईवी वायरस मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद कई सालों तक निष्क्रिय रहता है।

हालांकि, इस दौरान वायरस शरीर के अंदर अपनी संख्या बढ़ाता रहता है और व्हाइट ब्लड सेल्स को नष्ट कर देता है। एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद भी 15-20 सालों तक मरीज स्वस्थ्य दिखता है, लेकिन उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है।

एचआईवी टेस्ट के बिना इसका पता लगाना संभव नहीं है। बीमारी के लक्षण तब दिखते हैं, जब उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो चुकी होती है। कोई भी एंटीबॉयोटिक दवा इस वायरस को नष्ट नहीं कर पाती, इस वजह से एचआईवी वायरस लाइलाज है। हालांकि, एचआईवी वायरस का समय से पता लगने पर इसे बढ़ने से रोका जा सकता है।

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विश्व एड्स दिवस का इतिहास

विश्व एड्स दिवस की पहली बार कल्पना 1987 में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न ने की थी। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न दोनों विश्व स्वास्थ्य संगठन के एड्स वैश्विक कार्यक्रम में बतौर सूचना अधिकारी कार्य कर रहे थे।

उन्होंने एड्स दिवस का अपना विचार एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के निदेशक डॉ. जोनाथन मन्न के साथ साझा किया। डॉ. जोनाथन मन्न ने इस विचार को स्वीकृति दे दी और वर्ष 1988 से 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाना शुरु कर दिया। इससे पहले व्हाइट हाउस ने 2007 में विश्व एड्स दिवस का ऐलान कर दिया था और रेड रिबन के रूप में एक प्रतिष्ठित प्रतीक दुनिया के सामने रखा।

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यूएन एड्स की शुरुआत

अमेरिका से शुरू हुई यह बीमारी धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गई। संयुक्त राष्ट्र ने पाया कि एड्स फैलने की एक बड़ी वजह इस बीमारी के बारे में जानकारी न होना भी है। 1996 में पहली बार यूनाइटेड नेशन्स प्रोग्राम ऑन एचआईवी/एड्स (यूएन एड्स) की शुरुआत हुई। यूनीएड्स ने 1997 में विश्व एड्स कैंपेन शुरू किया।

एक मोटे अनुमान के मुताबिक, 1981-2007 में करीब 25 लाख लोगों की मौत एचआईवी संक्रमण की वजह से हुई। यहां तक कि कई स्थानों पर एंटीरेट्रोवायरल उपचार का उपयोग करने के बाद भी, 2007 तक लगभग 2 लाख लोग इस महामारी रोग से संक्रमित थे।

शुरु के सालों में, विश्व एड्स दिवस के विषयों का ध्यान बच्चों के साथ साथ युवाओं पर केन्द्रित था, जो बाद में परिवारों पर केंद्रित होने लगा। दरअसल, एड्स ऐसी बीमारी है, जिससे किसी भी आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है।