आपकी त्वचा के लिए खतरनाक है धूम्रपान, दोगुना बढ़ जाता है सोराइसिस का खतरा

  • सिर्फ फेफड़े और दिल ही नहीं आपकी त्वचा के लिए भी खतरनाक है धूम्रपान
  • सोराइसिस की वजह से त्वचा लाल पड़ जाती है और उसमें सफेद धब्बे उभर आते हैं

नई दिल्ली। धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक होता है, ये तो सभी जानते हैं। लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट ने हालिया अध्ययन में दावा किया है कि धूम्रपान करने वालों में सोराइसिस का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। दरअसल, निकोटिन के चलते स्किन की निचली परत में रक्त संचार बाधित होता है और स्किन में आक्सिजन की कमी से सोराइसिस के निशान पड़ने लगते हैं।

अध्ययन में हुए अहम खुलासे

  • हाल ही में हुए एक अध्ययन के बाद पता चला है कि भारत में करीब चार से पांच फीसदी लोग सोराइसिस से पीड़ित हैं।
  • हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि सोराइसिस का कोई एक कारण नहीं है, लेकिन यदि आपके परिवार के किसी सदस्य को सोराइसिस है, तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है।
  • इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट वेनेरीयोलॉजिस्ट्स लेप्रोलॉजिस्ट्स (आईएडीवीएल) इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अबीर सारस्वत ने बताया कि निकोटिन खून को स्किन की निचली परत में जाने से रोकता है, इसलिए स्किन को कम ऑक्सीजन मिलता है।
  • कम ऑक्सीजन की वजह से कोशिका उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे सोराइसिस जैसे रोग होते हैं।

क्या है सोराइसिस

  1. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सोराइसिस में शरीर की ऊपरी त्वचा लाल हो जाती है और सफेद दाग उभर आते हैं।
  2. यह बीमारी सिर, कोहनी, घुटने और पेट की त्वचा पर होती है। स्किन बायोप्सी या स्क्रैपिंग से इसका पता लगाया जा सकता है।
  3. सोराइसिस की स्थिति और शरीर के कितने हिस्से पर इसका प्रभाव है, इसे देखते हुए कई प्रकार के उपचार उपलब्ध हैं।

इन लोगों को सोराइसिस का सबसे ज्यादा खतरा

  • डॉक्टरों का कहना है कि तनाव से सोराइसिस नहीं होता है, लेकिन स्थिति गंभीर हो सकती है। हालांकि, सोराइसिस की वजह से तनाव हो सकता है।
  • स्टडी में पाया गया कि मोटापे और सोराइसिस के बीच गहरा संबंध है। ज्यादा वजन वाले लोगों की त्वचा में पसीने से घाव होने से सोराइसिस हो सकता है। वहीं, जिन्हें पहले से सोराइसिस है, उनकी त्वचा कटने या छिलने से स्थिति बिगड़ सकती है।
  • हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि सोराइसिस का कोई भी सटीक उपचार नहीं है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव करने और प्रभावी उपचार लेने से रोगी की स्थिति में सुधार हो सकता है।