उदास या वजन में अचानक हो रहा है बदलाव तो ना करें नजरअंदाज, इस भयंकर बीमारी के हो सकते हो शिकार
सेहत

उदास या वजन में अचानक हो रहा है बदलाव तो ना करें नजरअंदाज, इस भयंकर बीमारी के हो सकते हो शिकार

नई दिल्ली: कई बार हम मौसमों के हिसाब से अपने आप को ढालने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम असफल हो जाते हैं। अक्सर ऐसी समस्याएं सर्दियों में देखने को मिलती है जब सूर्य की रौशनी धरती तक बहुत ही मुश्किल से पहुंच पाती है। साथ ही अगर कभी बहुत गर्मी होती है तब भी सूर्य के बढ़ते तापमान के वजह से हमारे मस्तिष्क में इसका प्रभाव पड़ने लगता है।

यह समस्या खासकर मौसम और जलवायु के प्रभाव के कारण होती है। विज्ञान की भाषा में इस विकार को “मौसम उत्तेजित विकार ” (seasonal affective disorder)कहते हैं। आमतौर पर यह बीमारी सर्दियों मे होती है, लेकिन बदलते मौसम के प्रकोप के कारण गर्मियों में भी लोगों को इस विकार का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आप भी ऐसी परेशानियों का सामना कर रहें हैं तो आपको ज़रूरत है एक मार्गदर्शन की जो आपको इन परेशानियों से दूर रहने मे मदद करे, क्योंकि कभी कभी ये मामूली लगने वाली समस्याएं आत्महत्या जैसे खतरनाक रूप भी ले लेती हैं। आज हम आपको इस seasonal affective disorder नामक विकार की समस्या का समाधान बतायेंगे जिससे आपको लाभ हो।

seasonal affective disorder के लक्षण क्या हैं?

  • चिड़चिड़ापन
  • उदास रहना
  • नकारात्मक सोच
  • अक्सर थकान महसूस करना
  • नींद संबंधी समस्या
  • वजन में अचानक बदलाव
  • एकाग्रता नहीं होना

यह बीमारी ख़ासकर मानसिक गतिविधियों से दर्शित होते हैं, इसका सीधा असर शरीर पर जल्दी देखने को मिलता है। इसलिए यह विकार आपके मानसिक संतुलन को खराब कर सकता है।

किन कारणों से होती है यह बीमारी?

सिरेटोनिन की कमी- इंसान के शरीर में सिरेटिन नामक एक न्यूरोट्रांसमीटर होता है। अगर आपके शरीर इस न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर कम हो जाता है तब यह आपको सचेत रहने की जरुरत है क्योंकि यह न्यूरोट्रांसमीटर आपके मूड बदलाव को नियंत्रित्र करता है।

मेलोटोनिन-आपके शरीर में मेलोटिन नींद और मूड संबंधी कार्य करने वाला हार्मोन है। इसका स्तर कम होने से आपकी नींद प्रभावित हो सकती है, जिस कारण आपकी मानसिक स्थिति बिगड़ने की ज्यादा संभावना होती।

हाइपोथेलेमस- यह इंसान के दिमाग एक ऐसा हिस्सा होता है जो मूड, भूख और नींद को नियंत्रित करता है। हाइपोथेलेमस के विकास में धूप की आवश्यकता होती है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक ?

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बीमारी से बचने के लिए सर्दियों में आप सूर्य की रौशनी में अधिक समय बिताएं। डॉक्टर्स का मानना यह भी है की जो लोग अक्सर अकेले रहते है। उनमें यह बीमारी अधिक पायी जाती है। कई शोधों में यह पाया गया है की महिलाओं और युवाओं में यह समस्या ज्यादा पायी जाती है। डॉक्टर्स का कहना है कि विटामिन डी इस बीमारी से बचने का सबसे बेहतर उपाय है।

क्या हैं इस बीमारी के इलाज?

एन्टीडिप्रेसन (Anti Depression)- ऐसी स्थिति में डॉक्टर्स मरीज को एंटीडीप्रेशन की दवाइयां देते हैं। इन दवाईयों का प्रयोग शुरूआती समय से ही शुरू कर देने से आपकी समस्या कम हो सकती है।

विटामिन डी (Vitemin D) –सर्दियों में अक्सर धूप नहीं मिलने की वजह से लोगों को यह बीमारी होती है , इसलिए डॉक्टर्स मरीजों को सर्दियों में अधिक धूप में रहने को कहते हैं। विटामिन डी आपके शरीर और मूड दोनों को ही नियंत्रित करती है।

कॉगनेटिव थेरेपी (Cognitive therapy) डॉक्टर्स ऐसी बीमारियों में कॉगनेटिवे थेरेपी का भी प्रयोग करते है। यह थेरपी में डॉक्टर्स मरीज के नकारात्मक विचार जानने की कोशिश करते है, साथ ही उनके समाधान भी करते हैं।

लाइट थेरेपी (Light therapy) -लाइट थेरेपी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मरीजों को कृत्रिम रौशनी दी जाती है। यह थेरेपी अक्सर सर्दियों में होने वाले मौसम उत्तेजित विकार के दौरान की जाती है।

क्या हैं इस विकार से बचने के प्राकृतिक तरीके ?

विषेशज्ञों का मानना है की यदि आप चाहें तो प्राकृतिक उपाय अपना कर भी इन समस्याओं से बच सकते हैं। बाहर घूमना , व्यायाम करना, योग करना और दोस्तों से बातचीत करके भी समाधान पा सकते हैं। मेडिटेशन, डाइट्री और कुछ घरेलू नुख्सों को भी इस समस्या के लिए कारगर माना गया है। खुश रहना लोगों से बोलचाल रखना एवं सामाजिक बनें रहने की कोशिश करें। ख़ासकर अपने खानपान का भी ध्यान रखें।

13 May, 2019

About Author

[email protected]