मालिश से होते है शरीर में चमत्कारी लाभ, कई बीमारियों का है रामबाण इलाज

  • रक्तवाहिनियों को दुरुस्त करती है मालिश
  • आयुर्वेद में मालिश को दिया गया है महत्व

नई दिल्ली। मालिश(Massage) वास्तव में मांसपेशियों की कसरत है। मालिश का उद्देश्य होता है मांसपेशियों में गति उत्पन्न करना। हमारे शरीर का भाग अनगिनत मांसपेशियों से मिलकर बना है। मांसपेशियों के फूलने पर उसमे गति का अनुभव होता है और उनके नरम व कोमल पड़ जाने से उसमे एक प्रकार की शक्ति व शिथिलता आ जाती है। मांसपेशियां हरकत चाहती है जिनसे उनको जीवनी शक्ति प्राप्त होती है।

मांसपेशियों और रक्त प्रवाह को करता है दुरुस्त

  • मानव शरीर में मांसपेशियों (Muscles) और रक्त प्रवाह का चोली दामन का साथ है। दूसरे शब्दों में, रक्त धारा रक्तवाहनी नाड़ियों में बिना रूकावट के प्रवाहित होते रहना शारीरिक मांसपेशियों की स्वस्थ अवस्था पर ही निर्भर करता है।
  • यही दो कार्य मांसपेशियों की गतिशीलता तथा नाड़ियों में उचित रक्तप्रवाह हमारे स्वस्थ और सुखमय जीवन की आधारशिलाएं है। क्योंकि पहली दादा में शरीर का अंग प्रतंग लचीला होकर  जाता है और दूसरी में, शरीर के अंदर स्वभाविक रूप से रक्त प्रवाह होते रहने से शरीर की पाचन क्रिया को सहायता मिलती है जो खाया जाता है वह शरीर में लगता है। इस तरह शरीर  कार्य स्वाभाविक रूप से और ठीक ठाक होने लगता है। 

मालिश द्वारा बिमारियों का इलाज़ संभव (Massage Health Benefits)

  • मालिश(Massage) से लगभग सभी बिमारियों का इलाज़ आजकल यूरोप धड़ल्ले से हो रहा है वहाँ मालिश के अनेक अस्पताल खोल रखे है जहां हज़ारो संख्या में रोगियों का इलाज़ केवल मालिश के विभिन्न  वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग करके सफलता पूर्वक किया जाता है।
  • इन देशों के कुछ शहरों  में कुछ ऐसी संस्थाए कायम  गई  गयी है जहां मालिश कला का व्यवहारिक ज्ञान कराया जाता है एवं उनकी शिक्षा दी  जाती है।
  • हमारे यहां भी आयर्वेद में मालिश पर काफी प्रकाश डाला गया है। भिन्न -भिन्न रोगों में मालिश का प्रयोग भिन्न -भिन्न तरीकों से शरीर के विभिन्न अंगो पर किया जाता है,जिसका प्रभाव रक्त एवं मांसपेशियों पर आश्चर्यजनक रूप से पढ़कर रोगों से छुटकारा दिला देता है।

गठिया रोग और मालिश

  • इस रो में मालिश से बहुत लाभ होता है। मालिश करते समय शुद्ध सरसों का तेल या टिल का तेल पयोग में लाना चाहिए तथा धूप में बैठ कर मालिश करनी चाहिए मालिश में उतनी ही ताकत लगानी चाहिए जितनी की रोगी आसानी से सह सके।
  • मालिश करते समय रीढ़ और जोड़ो पर विशेष ध्यान देना चाहिए मालिश काफी देर तक होनी चाहिए जिससे रक्त में गर्मी और उसकी गति में तीव्रता उत्पन्न हो जाये। मांसपेशियों में रक्त पहुंचाने का जो गुण और शक्ति मालिश में होती है उसके कारण बच्चे की लकवे की बीमारी में भी ये बहुत लाभ करती है।

मालिश(Massage)करने का तेल

  1. साधारण मालिश के लिए सरसों का तेल, नारियल का तेल व तिल का तेल उत्तम रहता है। बच्चों व रोगियों के लिए जैतून का तेल लाभदायक होता है।
  2. अधरंग व जोड़ों का दर्द,गठिया,सायटिका आदि में लाल रंग की बोतल का तेल विशेष लाभकारी रहता है।
  3. सिर दर्द में कद्दू रोगन, बादाम रोगन या हलके नील रंग की बोतल का तेल लाभ करता है।
  4. चर्म रोग पर आधा भाग निम्बू का रस,आधा भाग नारियल का तेल हरे रंग की बोतल में तैयार करके रुग्ण स्थान पर लगाया जाता है।