सफेद जहर हैं चीनी-नमक और चावल, ज्यादा खाने से शरीर को होता है इतना बड़ा नुकसान

नई दिल्ली। हमारे खाने में रोजमर्रा की तरह इस्तेमाल होने वाली चीनी, नमक और चावल शरीर को कितना नुकसान पहुंचाते है इसका अंदाजा शायद आपको नहीं। बड़े-बड़े विशेषज्ञ खुद इन चीजों को सफेद जहर की संज्ञा दे चुके हैं।

यदि आप अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहते हैं, तो आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि कैसे ये चीजें आपके शरीर को नुकसान पहुंचा रही है और आप इनसे किस तरह बच सकते हैं।

चीनी, नमक और चावल के अलावा गाय का पॉस्चुराइज्ड दूध और मैदा ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें पोषक तत्व नहीं होते। उल्टे इनका सेवन शरीर को नुकासान ही पहुंचाता है।

इन पांचों चीजों का रंग सफेद है, इसीलिए विशेषज्ञों ने इन्हें व्हाइट प्वाइजन नाम दिया है। हां, नमक का थोड़ा सा इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा आपको अस्पताल पहुंचाने के लिए काफी है।

चीनी यानि कोई पोषक तत्व नहीं

चाय में चीनी, दूध में चीनी, कोल्ड ड्रिंक, काफी और न जाने किन-किन चीजों में हम रोज न जाने कितनी सारी चीनी का सेवन कर लेते हैं। चीनी में कैलोरी के नाम पर कुछ नहीं होता।

इसके अलावा न इसमें कोई विटामन होता है और न मिलरल्स, इसी वजह से चीनी को फूडलेस फूड कहा जाता है। सफेद चीनी का ज्यादा इस्तेमाल मोटापे, शुगर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और यहां तक की कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।

रिफाइनिंग में खत्म हो जाते हैं सारे पोषक तत्व

दरअसल, चीनी को बनाने के लिए उसे रिफाइन किया जाता है। सल्फर डाई ऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, एक्टिवेटेड कार्बन और कैल्शियम हाइड्रोक्साइड जैसे जहरीले रसायनों से चीनी को साफ किया जाता है। इस वजह से चीनी में मौजूद सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और बचता है केवल सूक्रोज। सुक्रोज की अधिक मात्रा शरीर के लिए बेहद घातक होती है।

क्या हैं विकल्प

चीनी से होने वाले नुकसान से बचने के लिए आप प्राकृतिक रूप से मीठी चीजों का सेवन कर सकते हैं। चीनी के बजाय गुड़, शहद, खजूर आदि का सेवन आप चीनी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा फलों का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

नमक यानि हार्ट अटैक की जड़

यह तो सभी लोग जानते हैं कि नमक का इस्तेमाल हमारे शरीर के लिए जरूरी है। लेकिन, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि नमक का ज्यादा इस्तेमाल आपको मौत के मुंह तक पहुंचा सकता है।

सेहत से ज्यादा स्वाद को महत्व देने वाले लोग नमकीन और तला-भुना ज्यादा खाते हैं। तेज नमक के शौकीन लोग बिन बुलाए मेहमान की तरह गंभीर बीमारियों को दावत दे रहे हैं।

गंभीर बीमारियों को न्यौता देता है नमक

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर दिन नमक का 5 ग्राम से अधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सामान्य मात्रा में नमक का सेवन हमारे शरीर के लिए अच्छा है। लेकिन, ज्यादा मात्रा में नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर और हाईपरटेंशन जैसे समस्याएं खड़ी हो जाती है। इन्हीं की वजह से दिल की बीमारियां, गुर्दे की खराबी और स्ट्रोक जैसे जानलेवा रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

नमक खाने से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है और पेट में एसिडिटी की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसी स्थिति में भूख नहीं लगने पर भी लोगों को पेट भूखा लगने लगता है। ऐसे में वह ज्यादा से ज्यादा खाना खाते हैं और मोटापे को दावत देते हैं।

कैसे घटाएं नमक का इस्तेमाल

नमक का सेवन कम करने के लिए कोशिश करें कि इसकी शुरुआत घर के खाने से हो। घर के खाने में धीरे-धीरे नमक का इस्तेमाल कम करते जाएं। इसके अलावा नमकीन चीजों का सेवन भी कम करें। खाने में सलाद या दही के ऊपर से नमक न डालें।

पापड़, चटनी और अचार का सेवन भी धीरे-धीरे कम कर दें। दरअसल, नमक में मौजूद सोडियम का अधिक सेवन किडनी, फेफडों और दिल पर सीधा असर डालता है। इसीलिए डाक्टर इन बीमारियों के मरीजों को कम नमक खाने की सलाह देते हैं।

पेट जाम कर देता है मैदा

गेहूं से तैयार होने वाला मैदा भी आपके शरीर को 1 प्रतिशत भी फायदा नहीं पहुंचाता। मैदा तैयार करते वक्त इसके सभी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। मैदे को इतना बारीक पीसा जाता है कि गेंहू में मौजूद फाइबर पूरी तरह नष्ट हो जाता है। बिल्कुल चिकना होने के कारण मैदा पेट में जाने के बाद आसानी से नहीं पचता।

कई बीमारियों की जड़ है मैदा

मैदा इकट्ठा होकर पेट को जाम कर देता है, जिससे पाचन तंत्र और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। मैदा खाने से वजन बढ़ना, सिरदर्द, माइग्रेन और तनाव की समस्या आमतौर पर बढ़ जाती है। इसके अलावा ज्यादा मैदा खाने से बैड कोलेस्ट्रोल का स्तर भी बढ़ जाता है। इसकी वजह से हाई बल्ड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां आपको घेर लेती हैं।

कैसे करें बचाव

कभी-कभार मैदे के सेवन से ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन रोजाना इस्तेमाल से आपकी तबीयत पर बुरा असर पड़ना तय है। बाजार में मिलने वाले समोसे, नान और मोमो की जगह आप उन्हें खुद घर पर बनाएं।

मैदे की जगह इन चीजों में आटे का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, फास्ट फूड के शौकीनों के लिए ब्रेड, पास्ता, नूडल्स और मैक्रोनी आदि आटे से बनी भी बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।

किसी काम का नहीं सफेद चावल

भारत की लगभग ज्यादातर आबादी चावल का सेवन हर दिन करती है। सफेद चावल को साफ करते वक्त भूसा और ब्रान अलग हो जाता है, जिसमें सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। सफेद चावल को और सुंदर बनाने के लिए मशीनों में चावल पॉलिश किया जाता है, जो बचे-खुचे पौष्टिक तत्व खत्म कर देता है।

स्टार्च से भरा रहता है सफेद चावल

रिफाइनिंग के बाद सफेद चावल में बचता है तो सिर्फ एंडोस्पर्म। एंडोस्पर्म एक तरह का शुद्ध स्टार्च है, जिसे मेडिकल जगत में इंसानी शहर के लिए खतरनाक माना जाता है। स्टार्च के सेवन से इंसुलिन का खतरा बढ़ जाता है। चावल की वजह से खून में शुगर का स्तर बढ़ता है और आगे चलकर यही गलती डायबिटीज की बीमारी को जन्म देती है।

ब्राउन राइस है बेहतर विकल्प

सफेद चावल से होने वाले नुकसान से बचने के लिए इसका इस्तेमाल कम कर दें। कोशिश करें कि जब भी चावल खाने का मन हो तो भूरे चावल यानि ब्राउन राइस का ही इस्तेमाल करें।

भूरे चावलों में फाइबर और दूसरे पोषक तत्वों की मात्रा कई गुना ज्यादा होती है। इसमें पाया जाने वाला ब्रान फाइबर का अच्छा स्रोत है। भूरे चावल विटामिन बी12, मिनरल्स और एमिनो एसिड से भरे होते हैं, इसलिए विकल्प के तौर पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।