Happy Birthday Ashok Kumar: सिनेमा का एक अनोखा सितारा
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Happy Birthday Ashok Kumar: सिनेमा का एक अनोखा सितारा

बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार में से एक अशोक कुमार जो 13 अक्टूबर 1911 में उनका जन्म हुआ था। अशोक कुमार को कुमुदलाल गांगुली, और दादामोनी  के नाम से इंडस्ट्री में बुलाया जाता था। अशोक कुमार भारतीय सिनेमा के एक मशहूर एक्टर थे, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में प्रतिष्ठित स्थिति हासिल की। भारत सरकार द्वारा सिनेमा कलाकारों के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार के साथ उन्हें 1988 में सम्मानित किया गया था और भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए 1999 में पद्म भूषण भी मिला था। उन्हें भारत के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक माना जाता है जो हर तरीके के किरदार निभा लेते थे।

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कुमुदलाल गांगुली की ज़िन्दगी

कुमुदलाल गांगुली यानी अशोक कुमार भागलपुर, बंगाल प्रेसीडेंसी, में पैदा हुए थे अशोक कुमार बंगाक्ल परिवार से रखते थे, उनके पिता, कुंजलाल गांगुली एक वकील थे, जबकि उनकी माँ, गौरी देवी हाउस वाइफ थी। कुमुदलाल चार बच्चों में सबसे बड़े थे। उनकी इकलौती बहन, सती देवी, जो उनसे कुछ साल छोटी थीं।  विवाह बहुत कम उम्र में शशधर मुखर्जी के साथ कर दिया गया था और वे एक बड़े “फ़िल्मी परिवार” के महानायक बन गए। लेकिन उनकी ज़िन्दगी में भी कुछ ऐसे पल आए थे जिन्हें वो कभी भुला नहीं पाए थे। उसने अपने जन्मदिन का जश्न मनाना बंद कर दिया, क्योंकि उसके सबसे छोटे भाई किशोर की 1987 में उसी दिन मृत्यु हो गई।

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शादी के बाद जिया साधा जीवन

अशोक कुमार बहुत ही साधारण इंसान थे जो बिलकुल साधारण जीवन जीते है। शादी  के बाद सबकी ज़िन्दगी थोड़ी बदल जाती है। ऐसे ही युवा कुमुदलाल का विवाह शोभा से सामान्य भारतीय शैली में उनके माता-पिता द्वारा आयोजित एक समारोह  में हुआ था। उनका जीवन बहुत ही पारंपरिक तौर से बिता था और अपने बच्चों को भी उसी तरीके से रखा था। वे एक बेटे, अरूप गांगुली, और भारती पटेल, रूपा वर्मा और प्रीति गांगुली नाम की तीन बेटियों के माता-पिता थे।

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अशोक कुमार की पढ़ाई 

अशोक कुमार ने कोलकाता में कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंसी कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्होंने वकील बनने के लिए अध्ययन किया। लेकिन उनका वकालत करने का नहीं था गांगुली को सिनेमा में अधिक रुचि थी, जिसमें उन्होंने एक तकनीशियन के रूप में काम करने का सपना देखा था। 

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ऐसे आए फिल्मों में

कुमुदलाल की बहन सती देवी का विवाह बहुत कम उम्र में शशधर मुखर्जी से हुआ था, जो मुंबई में रहते थे और फिल्म उद्योग में एक तकनीशियन के रूप में काम करते थे। इस कनेक्शन के परिणामस्वरूप कुमुदलाल फिल्म निर्माण (अभिनय का नहीं) के तकनीकी पहलुओं में कुछ हद तक दिलचस्पी रखने लगे। वकालत की पढ़ाई में फैल होने के बाद घर में डाट खाने के बाद कुछ दिन बहन के घर रहने आए तब देखा जीजा को ये काम करते हुए तब से काम करने का मानों जादू चढ़ गया था। बाद में  वरिष्ठ पद पर कार्यरत भी बन गए थे। 5 साल प्रयोगशाला सहायक भी रहे थे।

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1943 में आए सिनेमा में

ज्ञान मुखर्जी ने 1943 में अपनी फिल्म किस्मत का निर्देशन किया जिसमें अशोक को विलन के रोल में लिया गया था जिसमें अशोक कुमार को भारतीय सिनेमा में पहले विरोधी नायक के रूप में दिखाया गया। जिसने बॉक्स ऑफिस के सभी मौजूदा रिकॉर्ड तोड़ दिए, बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ की कमाई करने वाली पहली हिंदी फिल्म बन गई। किस्मत की सफलता ने अशोक कुमार को भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार बना दिया। किस्मत के बाद  अशोक कुमार को संबसे मेहगा एक्टर कहा जाता था।

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अशोक कुमार की मशहूर फिल्में

 अशोक कुमार की वैसे तो बहुत सी फिल्म फेमस है लेकिन ये फिल्म सबसे ज्यादा फेमस हुई थी ,चल चल रे नौजवान (1944), शिकारी (1946), साजन (1947), महल (1949), मशाल (1950), संग्राम (1950) और समाधि (1950)।  

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12 October, 2019

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Ashish Jain