स्वामी चिन्मयानंद के वो 5 तर्कसंगत और प्रेरणादायी विचार, जो आपका मन परिवर्तन कर सकते हैं

नई दिल्ली: भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक और वेदान्त दर्शन के विश्व प्रतिद्ध विद्वान स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती की आज 103वीं जयंती है। वो स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ही थे जिन्होंने धर्म के नाम पर फैली भ्रांतियों का निवारण कर शुद्ध धर्म की स्थापना की थी। स्वामी चिन्मयानन्द जी का जन्म 8 मई 1916 को दक्षिण भारत के केरल प्रान्त में एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम ‘बालकृष्ण मेनन’ था।

स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने ‘गीता ज्ञान-यज्ञ’ प्रारम्भ किया और 1953 में ‘चिन्मय मिशन’ की स्थापना की। स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने उपनिषद, गीता और आदि शंकराचार्य के 35 से अधिक ग्रंथों पर व्याख्यायें लिखीं। ‘गीता’ पर लिखा गया उनका भाष्य सर्वोत्तम माना जाता है।

स्वामी चिन्मयानंद के प्रवचन इतने तर्कसंगत और प्रेरणादायी होते थे कि उन्हें सुनने के लिए अच्छी खासी भीड़ जमा हो जाती थी। उनके प्रेरणादायी विचारों के आज भी लोग दीवाने हैं। स्वामी चिन्मयानंद के ये वो 5 प्रेरणा देने वाले विचार हैं, जो असल जिंदगी में लोग अमल करते हैं।