सैम मानेकशॉ: पिता से बगावत कर ज्वाइन की थी आर्मी, इंदिरा गांधी को कहा था- ‘मैं हमेशा तैयार हूं, स्वीटी’
शख्सियत

सैम मानेकशॉ: पिता से बगावत कर ज्वाइन की थी आर्मी, इंदिरा गांधी को कहा था- ‘मैं हमेशा तैयार हूं, स्वीटी’

  • रिटायरमेंट से पहले पांच सितारा रैंक हासिल करने वाले इकलौते अधिकारी हैं सैम मानेकशॉ
  • सैम मानेकशॉ के नेतृत्व में लड़ी गई थी 1971 की जंग, 90000 युद्धबंदियों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
  • इंदिरा गांधी के गुस्से पर भी नहीं घबराए थे सैम मानेकशॉ

नई दिल्ली। भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की आज जयंती हैं। सैम बहादुर के नाम से मशहूर फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ भारतीय सेना के 8वें प्रमुख थे। 1971 में सैम मानेकशॉ के नेतृत्व में ही भारत ने पाकिस्तान को हराया था। चलिए जानते हैं कौन है सैम मानेकशॉ और उनकी बहादुरी के कुछ मशहूर किस्से…

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कौन है सैम मानेकशॉ

भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ ने अपने मिलिट्री करियर की शुरुआत ब्रिटिश इंडियन आर्मी  की थी। उनका सैन्य करियर 4 दशकों तक चला। सैम मानेकशॉ ने इस दौरान अपने करियर में 5 युद्ध भी लड़े। सैम मानेकशॉ के नेतृत्व में भारत-पाक युद्ध में 90000 सैनिकों को बंदी बनाया गया था, जो एक रिकॉर्ड है।

पिता के खिलाफ बगावत कर ज्वाइन की थी सेना

सैम मानेकशॉ ने जब सेना में जाने का फैसला किया तो उनको पिता के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने पिता के खिलाफ बगावत कर दी और इंडियन मिलिट्री अकैडमी, देहरादून में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा दी। वह 1932 में पहले 40 कैडेट्स वाले बैच में शामिल हुए।

इंदिरा के सामने भी नहीं घबराए

  • सैम मानेकशॉ किसी भी परिस्थिति में नहीं घबराते थे। इससे जुड़ा एक किस्सा है, जब 1971 की जंग में सैम मानेकशॉ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी नहीं डरे। दरअसल, इंदिरा गांधी ने असमय पूर्वी पाकिस्तान पर हमले के लिए सैम मानेकशॉ से बात की। इस पर सैम मानेकशॉ ने कहा कि हम अभी हमला कर देंगे तो हार तय है।
  • सैम मानेकशॉ की बात से इंदिरा गांधी को गुस्सा आ गया। इंदिरा के गुस्से की परवाह किए बिना सैम मानेकशॉ ने कहा कि प्रधानमंत्री, क्या आप चाहती हैं कि आपके मुंह खोलने से पहले मैं कोई बहाना बनाकर अपना इस्तीफा सौंप दूं।
  • इस घटना के लगभग 7 महीने बाद सैम मानेकशॉ ने पूरी तैयारी के साथ बांग्लादेश का युद्ध लड़ा। युद्ध से पहले जब इंदिरा गांधी ने उनसे भारतीय सेना की तैयारी के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं हमेशा तैयार हूं, स्वीटी।’

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रिटायरमेंट से पहले फील्ड मार्शल बनने वाले इकलौते अधिकारी

सैम मानेकशॉ के देशप्रेम और निस्वार्थ सेवा को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1972 में दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से नवाजा। सेना की पांच सितारा रैंक फील्ड मार्शल के पद पर सैम मानेकशॉ 1973 को प्रमोट किया गया। हालांकि, इसी माह वह सेना से रिटायर हो गए।

सैम मानेकशॉ देश के एकमात्र सैन्य अधिकारी थे, जो सेवानिवृत्ति से पहले ही पांच सितारा रैंक तक पहुंच गए थे। वृद्धावस्था में उन्हें फेफड़े से संबंधी बीमारी हो गई और 27 जून, 2008 को तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित सैन्य अस्पताल में उनका निधन हो गया।

3 April, 2019

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