भारत रत्न रवींद्रनाथ टैगोर के वो 7 विचार जो आपकी जिंदगी वाकई में बदल सकती है
शख्सियत

भारत रत्न रवींद्रनाथ टैगोर के वो 7 विचार जो आपकी जिंदगी वाकई में बदल सकती है

नई दिल्ली: गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर… एक ऐसी शख्सियत जो पहचान की मोहताज नहीं है। जो भी उनके संपर्क में आया.. वो हमेशा के लिए उनसे जुड़ गया। लंबी चौड़ी कद काठी, धीर गंभीर व्यक्तित्व, जबरदस्त प्रतिभा और कला-संगीत ही उनकी पहचान थी। यही वजह थी कि लोग उनके दीवाने हो जाते थे।

आज उसी शख्सियत की जयंती है। 7 मई साल 1861 में कोलकात में जन्में रवींद्रनाथ टैगोर अपने आप में बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। रवींद्रनाथ टैगोर के पिता का नाम देवेंद्रनाथ टेगौर और माता का नाम शारदा देवी था। रविंद्र नाथ टैगोर का व्यक्तित्व ऐसा था जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। रवींद्रनाथ टैगोर वो नाम है जिसके बारे में कुछ कहने औऱ लिखने के लिए भी शब्द कम पड़ जाते हैं। रवींद्रनाथ टैगोर का भारत के लिए योगदान इतना है जिसे जिंदगी भर कोई नहीं भूल सकता है।

जिस राष्ट्रगान को आज देश ही नहीं विदेश में भी गाया जाता है। उसके रचनाकार भी रवींद्रनाथ टैगोर ही हैं। उनके चिंतन, विचारों, स्वपनों और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति उनकी कविताओं, कहानियों, उपन्यास, नाटकों, गीतों और चित्रों में होती है। उनके गीतों में से एक-“आमार सोनार बांगला” जो बांग्लादेश का राष्ट्रीय गीत है वो भी शामिल है। रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों को ‘रविन्द्र संगीत’ के नाम से जाना जाता है।

रवींद्रनाथ टैगोर विचारों के भी धनी थे। ‘सभी गलतियों के लिए अगर आप दरवाजे बंद कर दोगे तो सत्य बाहर रह जायेगा’ से लेकर ‘खुद को कला में उजागर करता है कलाकृति को नहीं’ जैसे कई विचारों को लोग आज भी अपनी जिंदगी में अमल करते हैं। ये वो विचार हैं जो सीधे-सीधे हर शख्स की जिंदगी में असर छोड़ जाती है। आज NewsUp2Date आपको उन्हीं विचारों से रूबरू कराएगा।

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7 मई, 2019

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Awnish