भारतीय गणितज्ञ और खगोल शास्त्री, जिसकी लिखी हुई बातें अब हो रही है सच
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भारतीय गणितज्ञ और खगोल शास्त्री, जिसकी लिखी हुई बातें अब हो रही है सच

  • नई दिल्ली: भारतीय गणितज्ञ, हमारे देश भारत के पास सदियों पहले विश्वगुरु का ताज था। ऐसा कहा जाता था कि दुनिया के लोग सदियों पहले भारत का अनुसरण करते थे, चीजों को देखते थे, चीजों को समझते थे और उसे अपने जीवन में उतारने की कोशिश करते थे।
  • भारतीय गणितज्ञ , उस समय हमारे भारत के बारे में दुनिया की सोच बहुत अलग थी दुनिया के लोग भारत में विश्वास रखते थे। लेकिन हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है कि पीछले लगभग आठ सौ वर्षों से इसमें भारी गिरावट आई है, जो हमारे लिए सही नहीं है।
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  • बता दें कि इस भारत की मिट्टी से हर तरह के लोग पैदा हुए है, चाहें हम बात करें महापुरुषों की या फिर बात करें वैज्ञानिकों की या फिर गणितज्ञों की ही बात कर लें। हम पाएंगे, कि उनके बदौलत हम हर क्षेत्र में सदियों से आगे थे।
  • और कुछ क्षेत्र तो आज भी ऐसे है जहां हमारे सामने टिकने की कोई ताकत ही नहीं रखता। जी हां बिल्कुल सही पढ़ा आपने, भारत की इस पवित्र धरती पर ऐसे लोग हुए जिनका कोई मुकाबला ही किसी ने मेघदूत लिखकर बारिश करा दी तो किसी ने आज की दुनिया के बारे में सदियों पहले ही बता दिया था।
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  • भारतीय गणितज्ञ , इन्हीं में से एक नाम आता है हमारे देश के सुप्रसिद्ध गणितज्ञ एवं खगोल विज्ञानी नीलकंठ सौम्या जी का। जिन्होंने अपने एक किताब में आज से लगभग पांच सौ साल पहले ही पूरे सौरमंडल के बारे में बता दिया था, यहां तक की चंद्रमा से पृथ्वी की दूरी भी बता दी थी।
  • भारतीय गोल शास्त्री, बता दें कि इनका जन्म आज के दिन ही (14 जून 1444) को केरल के दक्षिणी मलावार में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इन्हें शुरु से ही खगोल शास्त्री विज्ञान में रुचि थी, इनकी खगोल शास्त्री एवं वेदांता की शिक्षा रवि नाम के एक शिक्षक से मिली जो कि प्रसिद्ध भारतीय खगोल शास्त्री परमेश्वर के बेटे थे।
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  • भारतीय खगोल ,
    सौम्या जी ने अपनी पहली पुस्तक तंत्रसंग्रह में सौरमंडल से जुड़ी सभी बातों का जिक्र किया है। इस किताब को लोगों ने बहुत पसंद किया था उनके द्वारा लिखी गई बातें आज सच होती नजर आ रही है। यह किताब उनके जीवन की सबसे सफल रचनाओं में से एक रही।
  • यह किताब संस्कृत भाषा में लिखी गई है, इस किताब में 432 श्लोक है। जिनमें ग्रहों की गति, सूर्य से ग्रहों की दूरी, प्रत्येक ग्रहों के चंद्रमा के बारे में बताया गया है। सौम्या जी खगोल शास्त्री के साथ-साथ एक बहुत ही सुलझे हुए गणितज्ञ थे। इनकी मृत्यु सन् 1544 में हो गई।
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 π/4 = 1 – 1/3 + 1/5 – 1/7 + …….
tan-1x = x – x3/3 + x5/5 – x7/7 +…. 

  • सीरिज में x=1 रखें, रीजल्ट π/4 आएगा।
  • सन् 1670 में लैबनिज (labinez) और जेम्स ग्रेगम (james gregam) ने यह सीरिज बनाई थी, कुछ लोगों को इनका प्रयास बहुत अच्छा लगा।
  • लेकिन कुछ लोग जिन्होंने सौम्या जी की किताबें पढ़ी थी उन्होंने विरोध जताया। बता दें कि इस सीरिज के आने के लगभग 170 साल पहले ही महान खगोलविज्ञानी नीलकंठ सौम्या जी ने अपनी किताब तंत्रसंग्रह में इसका जिक्र कर दिया था।
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  • इन्होंने एक किताब गोलारा (golarara) लिखा, जिसमें संस्कृत के 56 श्लोक हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे गणित का प्रयोग करके खगोलीय डाटा को निकाला जाता है।
  • इनकी तीसरी रचना का नाम सिद्धांत दर्पण है जिसके 32 संस्कृत के श्लोक हैं। जिसमें सौरमंडल के खाका (आकार) के बारे में चर्चा की गई है।

हमारे देश के महान खगोलविज्ञानी एवं गणितज्ञ सौम्या जी को शत-शत नमन, और हम आपसे आग्रह करते है कि सौम्या जी द्वारा रचित पुस्तकों को अवश्य पढ़े। इनकी रचनाओं में ज्ञान का भंडार है जिससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।

14 June, 2019

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