चंद्रशेखर आजाद के जीवन से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें, जिसे जानकर आप भी करेंगे सलाम
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चंद्रशेखर आजाद के जीवन से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें, जिसे जानकर आप भी करेंगे सलाम

नई दिल्ली: अंग्रेजों के चंगुल से निकलने में हमें 100 से ज्यादा साल लग गए थे। आजादी के लिए देश को कितनी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा था। देश के लोगों से लेकर क्रांतिकारियों एवं नेताओं के बलिदान के बाद हमें आजादी मिली है। उनके त्याग के बाद ही आज हम आजादी की हवा में सांस ले पा रहें है। इसी कड़ी में आज हम आापको बताएंगे अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले भारतवर्ष के महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बारे में। जिनकी बातें सुनकर क्रांतिकारियों के अंदर एक नया जोश उत्तपन हो जाता था। अपना रंग-ढंग और वेश-भूषा बदलने में माहिर आजाद ने देश के लिए लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की बलि दे दी थी।

आजाद है हम आजाद ही रहेंगे

आजाद का कहना था कि दुश्मन की गोलियों का हम डटकर सामना करेंगे। आजाद है हम आजाद ही रहेंगे। सन् 1919 में जालियावाला बाग हत्याकांड के समय आजाद कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन मौका मिलते ही उन्होंने अपना क्रांतिकारी रंग दिखाना शुरु कर दिया।

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आजाद जाति से ब्राह्मण थे। सन् 1921 में गांधी जी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 15 बेतों की सजा मिली थी। अंग्रेज अधिकारियों के हर बेंत के साथ आजाद भारत माता की जय का नारा लगाते। जिससे खीझकर अंग्रेज अधिकारी के बेंत की रफ्तार और तेज हो जाती थी। लेकिन आजाद ने भारत माता की जय का नारा लगाना नहीं छोड़ा। आजाद ने कहा था मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा घर जेल है।

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अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगाने वाले आजाद का मानना था कि यदि कोई युवा मातृभूमि की सेवा नहीं करता है, तो उसका जीवन व्यर्थ है। दिल्ली के असेंबली में बम फेंकने के कारण सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने खुद को गिरफ्तार करा लिया। और बाद में इन्हें फांसी हो गई। बता दें कि इस टीम को आजाद ही लीड कर रहे थे।

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आजाद बनें क्रांतिकारी संगठन के सदस्य

उनके गिरफ्तारी के बाद आजाद चाचा नेहरु से मिले और नेहरु से कहा कि वह महात्मा गांधी से उन्हें छुड़वाने की बात करें। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, उन्हें फांसी दे दी गई। आजाद ने कहा था कि मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता समानता और भाईचारे के बारे में सीखाता है।

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चौरा-चौरी हत्याकांड के बाद महात्मा गांधी ने बिना किसी से पूछे असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। जिससे आजाद कुछ ज्यादा ही नाराज हो गए और क्रांतिकारी का जीवन अपना लिया। इसी क्रम में वह भारत की तत्कालीन क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान रिपब्लित एसोशियशन के सदस्य बन गए। और देश की क्रांति में कूद पड़े।

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22 July, 2019

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