मुंशी प्रेमचंद 139 जयंती : धनपत राय से मुंशी प्रेमचंद तक, संजीवनी, रचनाएँ ,साहित्य
शख्सियत, स्पेशल स्टोरी

मुंशी प्रेमचंद 139 जयंती : धनपत राय से मुंशी प्रेमचंद तक, संजीवनी, रचनाएँ ,साहित्य

नई दिल्ली : धनपत राय , जुलाई 31, 1880 में जन्मे थे।लमही गॉव में इनका जन्म हुआ था जो कि वाराणसी, उत्तर प्रदेश में स्थित है। मुंशी प्रेमचंद एक हिंदी साहित्कार (Writter) है, इनको सफलता मुंशी प्रेम चंद के नाम से मिली, यही नहीं इन्होने नवाब राय के नाम से अपनी साहित्ये लोगो तक पहुंचाई। मुंशी प्रेमचंद को पहला नाम उनकी साहित्य से प्यार करने वाले लोगो ने ही दिया तब उनका नाम पड़ा मुंशी।

Munshi Pemchand Books
Munshi Prem Chand Books Source-Google


मुंशी प्रेमचंद के द्वारा हज़ारो साहित्ये 250-300 से भी ज़ादा शार्ट स्टोरीज और कई निबंद भी लिखे। यही नहीं बल्कि इन्होने बहुत सी इंग्लिश लिटरेचर का हिंदी में अनुवाद किया है।

किताबो के लिए उनका प्यार कभी न ख़त्म होने वाला था, प्रेमचंद जी ने लिखना शुरू अपनी माता के निधन के बाद किया था, यही नहीं मुंशी प्रेमचंद जी का किताबो के प्रति प्यार कबीले तारीफ था, उन्होंने किताबे बेचने का काम शुरू किया था जो की एक व्होले सेल बुक मार्किट (Whole Sale Book Market) में उन्होंने नौकरी करनी शुरू की थी।

आज मुंशी प्रेमचंद के 139 के जन्म दिवस के मोके पर उनके द्वारा लिखी गई किताबे , कुछ किताबो पर हम आज रौशनी डाल रहे है जो आप

मुंशी प्रेमचंद की किताबे

गोदान (Godan)

  • गोदान को हिंदी उपन्यास में सबसे अच्छी उपन्यास माना गया है। मॉडर्न इंडियन लिटरेचर, गोदान, को सबसे पहले 1936 में छापा गया था, इसी बुक को इंग्लिश में भी ट्रांसलेट किया गया और गोदान का नाम “The Gift Of a Cow”
    यह बुक सबसे पहले इंग्लिश में 1957 में जय रतन, पी. लाल के द्वारा की गई है, टोडरमल 1968 ट्रांसलेशन को क्लासिक नावेल का ख़िताब भी दिया गया है, गोदान नावेल Pre-Colonial समय के ऊपर निर्धारित है जिसमे भारत के किसान के जीवन को बड़ी ख़ूबसूरती से बताया गया है।

Munshi Premchand Books
Munshi Premchand Books Source-Google

गबन (Gaban)

  • गबन को 1931 में छापा गया था , प्रेमचंद ने गबन नमक नावेल को रेअलिस्म स्टाइल में लिखा था जिसमे की पढ़ने वालो को करैक्टर से रूबरू हो जाते है जिसमे इंडियन सोसाइटी की एक पिक्चर दिखाई गई है , और गबन नामक नावेल को इंग्लिश में ट्रांसलेट किया गया था क्रिस्टोफर आर. किंग के द्वारा।

Munshi Premchand Birthday Special
Munshi Premchand Books Source-Google

निर्मला ( Nirmala)

Munshi Premchand Birthday Special
मुंशी प्रेमचंद की किताबे Source-Google
  • निर्मला नावेल एक जवान लड़की के ऊपर यह नावेल निर्धारित है जिसमे एक जवान लड़की की शादी उसके पिता के जितने बड़े आदमी से करा दी जाती है,निर्मला की कहानी दूसरी पत्नी के रूप में होती है
    जिसमे निर्मला के पति और बेटे के बीच की कहानी बेटे के मौत तक कब पहुँच जाती है, निर्मला नामक इस नावेल को सबसे पहले 1927 में पब्लिश्ड किया गया था। यही नहीं निर्मला नमक इस नावेल को इंग्लिश में भी ट्रांसलेट किया गया था जिसको नाम दिया गया The Second Wife by David Roobin.
31 July, 2019

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