राष्ट्रकवि कुवेम्पु (National Poet Kuvempu): कन्नड़ भाषा के मशहूर लेखक, ज्ञानपीठ(Gyanpit) और पद्मविभूषण(Padma Bhushan) से किया गया सम्मानित

नई दिल्ली। कन्नड़ भाषा के मशहूर कवि कुप्पाली वेंकटप्पा पुटप्पा(Kuppali Venkatappa Puttappa) का आज 114वां जन्मदिन है। गद्य और पद्य दोनों ही विद्याओं में निपुण वेंकटप्पा को साहित्य जगत में कुवेम्पु(Kuvempu) के नाम से जाना जाता है। पिछले साल कन्नड़ भाषा के मशहूर कवि कुवेम्पु (Kuvempu)की जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया था।

तो चलिए जन्मदिन पर जानते हैं कैसा रहा कुवेम्पु(Kuvempu) का साहित्यिक सफर…

कन्नड़ भाषा के मुखर समर्थक थे कुवेम्पु(Kuvempu)

29 दिसंबर, 1904 को मैसूर के कोप्पा तालुक में कुवेम्पु(Kuvempu) का जन्म हुआ। 1920 के दशक में कुवेम्पु ने मैसूर विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा प्राप्त की। कुवेम्पु (Kuvempu) कन्नड़ भाषा के मुखर समर्थक थे। 1929 में मैसूर के महाराजा कॉलेज(Maharaja College) से ग्रैजुएट होने के बाद कुवेम्पु ने बतौर लेक्चरर अपना करियर उसी कॉलेज से शुरू किया, जहां वह पढ़ा करते थे।

महाराजा कॉलेज (Maharaja College)में पढ़े वहीं के प्रिंसिपल बने

1936 में कुवेम्पु (Kuvempu) बेंगलुर कें सेंट्रल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुए। 10 साल बाद वह दोबारा मैसूर लौट आए और महाराजा कॉलेज(Maharaja College) में बतौर प्रोफेसर नियुक्त हुए। साल 1955 में कुवेम्पु महाराजा कॉलेज (Kuvempu Maharaja College)के प्रिसिंपल बने। 1956 में कुवेम्पु विश्वविद्यालय (Kuvempu University)का वाइस चांसलर बनाया गया। चार साल इस पद पर सेवा देने के बाद कुवेम्पु रिटायर हो गए। इस पद तक पहुंचने वाले कुवेम्पु विश्वविद्यालय (Kuvempu University) से ग्रैजुएट होने वाले पहले छात्र थे।

अंग्रेजी की जगह कन्नड़ भाषा में शिक्षा की करी वकालत

कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने में कुवेम्पु का बड़ा योगदान रहा। कुवेम्पु का मानना था कि कर्नाटक में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी के बजाय कन्नड भाषा में होना चाहिए।

गिरीश कर्नाड ने कुवेम्पु (Kuvempu) के साहित्य पर बनाई फिल्म

साहित्यिक योगदान की बात करें तो कुवेम्पु (Kuvempu)की रचनाओं पर मशहूर निर्माता गिरीश कर्नाड ने कन्नड भाषा में उनके जीवन पर एक फिल्म बनाई। कुवेम्पु के साहित्य ‘कनरू सुबम्मा हेग्गाडिथी’ पर आधारित इस फिल्म का नाम ‘कनरू हेग्गाडिथी’ था।

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुई कुवेम्पु के साहित्य पर आधारित फिल्म

इस फिल्म को साल 2000 में कन्नड भाषा की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। फिल्म की रिलीज के बाद इस उपन्यास की करीब 2 हजार नई कॉपियां रिप्रिंट होकर बिकीं।

रामायण को आधुनिक नजरिए से पेश किया

साहित्यिक क्षेत्र में कुवेम्पु का सबसे बड़ा योगदान रहा रामायण की नई सिरे से व्याख्या। कुवेम्पु ने रामायण को आधुनिक नजरिए से पेश करते हुए ‘श्री रामायण दर्शनम’ की रचना की। कुवेम्पु (Kuvempu) का यह नजरिया पाठकों को काफी पसंद आया।

राष्ट्रकवि और कर्नाटक रत्न कहलाए कुवेम्पु (Kuvempu)

कन्नड साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने कुवेम्पु (Kuvempu) को ‘राष्ट्रकवि’ और ‘कर्नाटक रत्न’(Karnataka Ratan) जैसे नाम दिए। साल 1988 में भारत सरकार ने साहित्य जगत में कुवेम्पु (Kuvempu) के योगदान को सराहते हुए उन्हें पद्मविभूषण (Padhmabhushan)से नवाजा।

कर्नाटक का राज्य गीत लिखा

कर्नाटक के राज्य गीत ‘जय भारत’ की रचना करने वाले कुवेम्पु को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा। कुवेम्पु (Kuvempu)कन्नड भाषा के उन चुनिंदा साहित्यकारों में से एक थे, जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1 नवंबर 1994 को 89 साल की उम्र में कन्नड भाषा के महान कवि कुवेम्पु का निधन हो गया।