हरिवंश राय बच्चन(Harivansh Rai Bachchan Biography): मधुशाला (Madhushala)की रचना कर बदल दी हिन्दी साहित्य की तस्वीर, तेजी से की थी दूसरी शादी
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हरिवंश राय बच्चन(Harivansh Rai Bachchan Biography): मधुशाला (Madhushala)की रचना कर बदल दी हिन्दी साहित्य की तस्वीर, तेजी से की थी दूसरी शादी

नई दिल्ली। हरिवंश राय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan) हिंदी भाषा के एक ऐसे कवि थे, जिन्हें नई सदी के साहित्य का रचयिता भी कहा जाता है। अपनी रचनाओं के जरिए काव्य की नई धारा लाने वाले कवि हरिवंश राय बच्चन की आज जयंती हैं। हरिवंश राय बच्चन ने कई ऐसी रचनाएं की, जो हर काल में नई सी लगती हैं। ‘मधुशाला’ (Madhushala) और ‘लो दिन बीता, लो बात गई’ हरिवंश राय बच्चन की दो ऐसी कृतियां हैं, जो हर दौर में नई लगती हैं।

हरिवंश राय बच्चन का जीवन(Harivansh Rai Bachchan Biography)

27 नवंबर 1907 को हरिवंश राय(Harivansh Rai Bachchan) का जन्म इलाहबाद के बाबूपट्टी गांव में हुआ था। कायस्थ परिवार में जन्में हरिवंश राय को गांव के लोग बचपन में ‘बच्चन’ अर्थात ‘बच्चा’ कहकर पुकारते थे। बस यहीं से हरिवंश राय के साथ बच्चन शब्द जुड़ गया, जो अब उनके परिवार की पहचान बन गया है। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद हरिवंश राय बच्चन ने प्रयाग विश्वविद्यालय से एम.ए. और फिर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University)से अंग्रेजी साहित्य के प्रख्यात कवि डब्ल्यू. वी. यीट्स की कविताओं पर शोध कर पीएचडी की डिग्री हासिल की।

पहली पत्नी की मौत के बाद की तेजी से शादी (Harivansh Rai Bachchan’s 2nd Marriage)

1926 में हरिवंश राय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan)

का विवाह श्यामा देवी से हुआ, लेकिन शादी  के 10 साल बाद ही श्यामा देवी टीबी के कारण चल बसीं। अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद हरिवंश राय बच्चन ने 1941 में तेजी सूरी से विवाह कर लिया। तेजी उस वक्त रंगमंच और गायन से जुड़ी थीं। इसी समय हरिवंश राय बच्चन ने ‘नीड़ का निर्माण’जैसी कविताएं लिखीं। हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन के दो पुत्र – अमिताभ और अजिताभ हुए।

हरिवंश राय बच्चन कई सालों तक इलाहबाद विश्वविद्यालय (Allahbadh University) में अंग्रेजी के प्राध्यापक भी रहे। बाद में वे कुछ समय के लिए आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से जुड़ गए। 1955 में विदेश मंत्रालय ने हरिवंश राय बच्चन को हिन्दी विशेषज्ञ नियुक्त किया। हरिवंश राय बच्चन के बारे में कहा जाता है कि उनकी कविताएं के कारण हिन्दी के ही नहीं, बल्कि भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में उनका नाम शामिल है।

(साभार-गूगल)
ऐसे शुरू हुआ कविताओं का सफर(First Step Towards Poetry)

1935 में हरिवंश राय बच्चन का पहला काव्य संग्रह ‘मधुशाला’(Madhushala) प्रकाशित हुआ। मधुशाला के प्रकाशन से हरिवंश राय बच्चन का नाम पूरे साहित्य जगत में छा गया। मधुशाला,(Madhushala) मधुबाला और मधुकलश… एक के बाद एक इन तीनों संग्रहों ने साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बना गए। हिन्दी साहित्य में एक शब्द है हालावाद, यानि जिस कविता में स्वर्ण सुरा और सुंदरी की प्रधानता हो। हरिवंश राय बच्चन के तीनों काव्य हालावाद के धर्म ग्रंथ बन गए। हरिवंश राय बच्चन को हालावाद कविता पद्धति का संस्थापक भी माना जाता है।

महान अंग्रेजी साहित्यकार शेक्सपियर (Shakespear) की प्रसिद्ध Macbeth और Othello जैसी रचनाओं का हरिवंश राय बच्चन ने हिंदी में अनुवाद किया है। 1966 में हरिवंश राय बच्चन राज्यसभा में नामांकित हुए। हिंदी भाषा के दो महान कवियों सुमित्रानंदन पंत और रामधारी सिंह दिनकर डॉ. हरिवंश राय बच्चन के अच्छे मित्रों में से एक थे।

बॉलीवुड ने अपनाई हरिवंश राय बच्चन की कृतियां(Deeds): (Harivansh Rai Bachchan’s Death

होली पर हरिवंश राय बच्चन ने एक गीत लिखा था, जिसके बोल थे ‘रंग बरसे’(Rang Barse)। डॉ. हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखा गया ये गीत बॉलीवुड फिल्म सिलसिला (SIilsile) में उनके बेटे अमिताभ बच्चन पर ही फिल्माया गया। इस गीत को आवाज भी खुद अमिताभ बच्चन ने ही दी थी। हरिवंश राय बच्चन की एक और कविता ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ भी बॉलीवुड फिल्म ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ में प्रयोग की जा चुकी है। 18 जनवरी 2003 को सांस की लंबी बीमारी के बाद हिंदी के इस महान कवि ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

27 November, 2018

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